खौफ के साए में गिरनार! 11 साल के बच्चे को निगल गया शेर ; 20 जुलाई को हजारों जैन श्रद्धालुओं की सुरक्षा राम भरोसे?

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15 जुलाई 2026 /आषाढ़ शुक्ल एकम /चैनल महालक्ष्मी और सांध्य महालक्ष्मी/ शरद जैन
गिरनार पर्वत पर घटित यह रूह कंपा देने वाली घटना केवल एक हादसा नहीं, बल्कि वन विभाग और स्थानीय प्रशासन की घोर लापरवाही और संवेदनहीनता का जीता-जागता प्रमाण है। सैकड़ों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में, मात्र 50वीं सीढ़ी पर एक 11 साल के मासूम बच्चे मयूर चौहान को शेर द्वारा अपना शिकार बना लेना, यह साबित करता है कि प्रशासन यात्रियों की सुरक्षा को लेकर कितना लापरवाह है।
आगामी 20 जुलाई को गिरनार की पावन धरा पर जैन समुदाय के आराध्य, 22वें तीर्थंकर नेमिनाथ जी का मोक्ष कल्याणक महोत्सव होने जा रहा है।

इस पावन अवसर पर देश-विदेश से हजारों की संख्या में जैन श्रद्धालु भाव-विभोर होकर मोक्ष कल्याणक क्षेत्र 5वीं टोंक की वंदना के लिए जुटने वाले हैं। लेकिन इस महापर्व से ठीक पहले हुई इस खौफनाक घटना ने श्रद्धालुओं के मन में भय और आक्रोश भर दिया है।

प्रशासन की लापरवाही पर उठते सुलगते सवाल
वन विभाग ने आनन-फानन में तीन पिंजरे लगाकर शेरों को पकड़ने का दावा किया है और एक शेर के पेट से बच्चे के अवशेष मिलने की पुष्टि भी हो गई है। मात्र 24 घंटे के भीतर रास्ते को दोबारा खोल दिया गया, लेकिन क्या इतनी जल्दी सुरक्षा की गारंटी दी जा सकती है?
॰ सुरक्षा घेरे का अभाव: गिरनार एक अति-संवेदनशील वन्यजीव क्षेत्र है। इसके बावजूद शुरूआती पायदानों पर न तो पर्याप्त लाइटिंग की व्यवस्था थी और न ही वन कर्मियों की तैनाती।
॰ लापरवाहीपूर्ण रवैया: जब प्रशासन को पता है कि 20 जुलाई को हजारों की संख्या में जैन समाज के लोग यहां जुटने वाले हैं, तो उससे पहले पूरे मार्ग की सुरक्षा आॅडिट क्यों नहीं की गई?
॰ जल्दबाजी में रास्ता खोलना: यात्रियों के दबाव या अपनी नाकामी छुपाने के लिए मात्र एक दिन में रास्ता खोल देना सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है। क्या प्रशासन किसी और बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है?

इस बारे में पूरी जानकारी चैनल महालक्ष्मी के एपिसोड नंबर 3774 में देख सकते हैं


आस्था की सुरक्षा सर्वोपरि
जैन समाज के लिए गिरनार केवल एक पर्वत नहीं, बल्कि उनकी अगाध आस्था का केंद्र है, जहां से तीर्थंकर श्री नेमिनाथ ने मोक्ष प्राप्त किया था। श्रद्धालु वहां पूरी सात्विकता और तपस्या के भाव से जाते हैं। प्रशासन का यह दायित्व है कि वह इन श्रद्धालुओं को भयमुक्त वातावरण प्रदान करे। पिंजरे में एक शेर को कैद कर लेने से जंगल का खतरा टल नहीं जाता।
प्रशासन को तत्काल कड़े कदम उठाने होंगे: पूरे वंदना मार्ग पर जालीदार सुरक्षा घेरा मजबूत किया जाए, संवेदनशील मोड़ों पर चौबीसों घंटे वन रक्षकों की मुस्तैदी हो और भोर के समय विशेष सुरक्षा दस्ता तैनात रहे।
यदि 20 जुलाई के महापर्व से पहले सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए, तो जैन समाज और आम जनता की यह उत्तेजना एक बड़े जनांदोलन का रूप ले सकती है। प्रशासन जागृत हो, इससे पहले कि कोई और मां अपनी गोद का लाल खो दे।