वर्षायोग में‘तीर्थ सुरक्षा कलश’ स्थापना अवश्य करें
14 जुलाई 2026 /आषाढ़ कृष्ण अमावस /चैनल महालक्ष्मी और सांध्य महालक्ष्मी/ शरद जैन

2026 – 2027 वर्ष है, तीर्थों के संरक्षण, संवर्धन, विकास व उनकी सुरक्षा के प्रति जागरूकता का। कारण भी है, 22 अक्टूबर 2026 से दिगंबर जैन समाज की अब तक सबसे लंबे समय से अविरल चल रही एकमात्र संस्था, भारतवर्षीय दिगंबर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी अपने 125वें वर्ष में प्रवेश करते हुए, शतकोत्तर रजत महामहोत्सव का सिद्धक्षेत्र मथुरा चौरासी से शंखनाद कर रही है। वही तिथि, वही स्थान, जहां पर इसकी स्थापना हुई थी और इस बार यह पूरा वर्ष, अपने प्राचीन तीर्थों, सिद्ध क्षेत्र, कल्याणक भूमियों, अतिशय क्षेत्रों के साथ, हर जिनालय की सुरक्षा के लिए संकल्पित होने का शुभ अवसर प्रदान करेगा।

वर्षायोग स्थापना 2026 के दौरान तीर्थक्षेत्र कमेटी सभी मंदिर कमेटियों, वर्षायोग समितियों से इस भावना को केंद्र में रखते हुए विनम्र अपील करती है कि जब वर्षायोग की स्थापना हो, उस दिन एक तीर्थ सुरक्षा कलश की भी स्थापना की जाए, जिससे हमारी भी भावनाएं जुड़े कि हम भी अपने जिनालयों और तीर्थों की सुरक्षा के लिए हम भी संकल्पित हैं और यह चातुर्मास तीर्थों के विकास, संरक्षण के लिए समर्पित रहेगा।
राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जम्बू प्रसाद जैन ने चैनल महालक्ष्मी को बताया कि यह तीर्थ सुरक्षा समितियों से पर्याप्त समय पूर्व मिली सूचना पर कलश भारतवर्षीय दिगंबर जैन तीर्थ क्षेत्र कमेटी नि:शुल्क उपलब्ध कराएगी।

उन्होंने यह भी बताया कि तीर्थ सुरक्षा कलशों के लिए वर्षायोग समितियां शरद जैन (चैनल महालक्ष्मी) मो. 9910690823 अथवा मीनू जैन मो. 7078548210 से जल्द से जल्द सीधे संपर्क कर लें और आकर्षक पांच तीर्थंकर सिद्ध क्षेत्र रूपी कलश अपने यहां मंगवा लें। कलश प्राप्त करने का सौभाग्य किनको मिला, इसकी पूरी जानकारी भी वे तुरंत कमेटी को दे दें, जिससे उसका भी उचित प्रकाशन हो सके। वर्षायोग के निष्ठापन में उस कलश से मिली सहयोग राशि, सीधे तीर्थक्षेत्र कमेटी के बैंक अकाउंट में जमा की जा सकती है, जिसकी पूरी जानकारी तीर्थक्षेत्र कमेटी उनको उपलब्ध करा देगी। इस राशि का उपयोग तीर्थ के जीर्णोद्धार में लगेगा।

शतकोत्तर रजत महामहोत्सव मरलसगंज गौरव अंकलीकर परंपराचार्य श्री 108 सौभाग्य सागर मुनिराज और श्री 108 सुरत्न सागर स्थविराचार्य जी के परम सान्निध्य में मथुरा चौरासी में 22 अक्टूबर 2026 से शुरू होगा, जो देश भर में विभिन्न पूजनीय साधु संतों, मंदिर कमेटियों के सान्निध्य में पूरे एक वर्ष चलेगा। इसका मुख्य उद्देश्य हर दिगंबर जैन व्यक्ति को अपने तीर्थों के प्रति जागरूक करना है, अपने तीर्थों का संरक्षण करना है, उन क्षेत्रों में सुविधाओं के विकास का है।
आचार्य श्री सुरत्न सागर जी ने भी समाज से आह्वान किया है कि सभी यथा संभव आर्थिक सहयोग से, जहां पुण्य अर्जन कर सकते हैं, वहीं तीर्थों के संरक्षण में भी सहभागी बन सकते हैं।



















