पूर्व केन्द्रीय मंत्री ने कहा 15 लाख मोरों के हत्यारे दिगम्बर संत? मेनका गांधी ने सीधे जैन धर्म पर, पर्दे के पीछे हिंदू धर्म प्रेमियों को झूठे आरोपों में घेरा

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॰ जैन संतों पर मयूर पिच्छी को लेकर किया सीधा धमकी भरा दबाव
॰ मोरों की हत्या के लिये भगवान श्रीकृष्ण और खाटू श्याम के करोड़ों भक्तों की श्रद्धा पर भी चोट
22 जून 2026 / जयेष्ठ शुक्ल अष्टमी /चैनल महालक्ष्मी और सांध्य महालक्ष्मी/

‘जैन संतों के कारण अब तक 15 लाख मोरों की हत्या हुई है, उनके हत्यारे हो। एक जीव को बचाने में दूसरी की हत्या करते हो, इससे ज्यादा बड़ी तो मैं जैन हूं। अगर आपने सबकुछ छोड़ दिया है, तो इसको (पिच्छी की तरफ संकेत) क्यों नहीं छोड़ देते। मैंने दो बार संसद में इसके विरोध में आवाज उठाई, सफल भी हो गई, पर एन वक्त पर जैनों के दबाव में प्रस्ताव लौट गया।’ मेनका गांधी बोलती जा रही थी लगभग 10 मिनट।

वह दिन था, बुधवार, 17 जून, समय सायं 7.30 बजे, स्थान दिल्ली का दिगंबर जैन लालमंदिर, प्रथम तल पर आचार्य श्री सौरभ सागरजी जहां कुछ क्षण पूर्व तक वे ध्यान में थे, आरती भी हो चुकी थी। और बिना तर्क के, बिना जनाकरी के, पूरी अज्ञानता, बिना आमंत्रण के पहुंचने वाली पूर्व केन्द्रीय मंत्री मेनका गांधी, जिनके साथ चार श्वेताम्बर महाराज साहब भी आये थे। उन सबने पहले कुछ देर तक 9 नम्बर कमरे में विश्राम किया और जब मेनका गांधी से कहा कि आओ मंदिर के दर्शन कर लो, तो उसने हाथ उठाकर मना कर दिया। पहले सूचना मिली थी कि साढ़े चार बजे आ रही हैं, पर आई सवा सात बजे। यह सब जानकारी चैनल महालक्ष्मी को एक्सक्लूजिव रूप से ही लालमंदिर के मैनेजर श्री पुनीत जैन ने दी, फिर पंडित संदीप जैन ‘सजल’। जब चैनल महालक्ष्मी टीम अगली सुबह 18 जून को श्रुत पंचमी के कार्यक्रम में पहुंची। तभी उस मंच से इस जानकारी के बाद चैनल महालक्ष्मी ने कहा कि ‘कोई भक्त कहे या नहीं, यह आवाज दिल्ली नहीं, पूरी दुनिया में उठायंगे अगर कोई हमारे साधु पर, उनके उपकरण के बारे में चोट करता है तो हम चुप नहीं बैठेंगे, आवाज उठायेंगे, अगर हम अपने संतों की रक्षा नहीं कर पाये, तो हम जैन कुल में जन्म लेने के लायक नहीं। स्पष्ट बात है विहार हो, आहार हो, चर्या हो, उनके ऊपर या उपकरण पर कोई गलत बात करे, हमको आवाज उठानी होगी। जब तक आवाज नहीं उठाओगे, तो पड़े हुए शेर का तो गीदड़ भी शिकार कर लेता है। अब जागने का, सच बात तो बताने का और कुचक्र से परदा उठाने की जरूरत है। ’

क्या कोई हमारे ही जिनालय में हमारे ही पूजनीय संत के सामने ऐसी गलत बात करे और हम चुप रह जायें। आचार्य श्री ने मेनका गांधी को चुपचाप सुना और जब सच बताने के लिये उन्होंने कहना ही शुरू किया, वो उठ कर चल दी। यह भी जैन समाज का निरादर रहा।

इस पर सबसे पहले आवाज चैनल महालक्ष्मी ने ही उठाई और फिर उस पर कई ने साथ दिया।

आचार्य श्री सौरभ सागरजी ने तत्काल एक बड़ा आह्वान किया कि अब समय आ गया है कि समाज में गौशालाएं बाद में बनाई जाएं, लेकिन सबसे पहले मयूर अभयारण्य खोले जाएं, ताकि राष्ट्रीय मोर का पूरी तरह से संरक्षण हो सके और ऐसे भ्रामक आरोपों को हमेशा के लिये शांत किया जा सके।

इस पर आचार्य श्री विशुद्धसागरजी, आचार्य श्री सुनील सागरजी, आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी, मुनि श्री समत्व सागरजी ने भी राजनेता मेनका गांधी के दावों को झूठा और पूरी अज्ञानता का पुलिंदा बताया।
मेनका जी! पहले जानिये क्यों रखी जाती है मयूर पिच्छी – सान्ध्य महालक्ष्मी स्पष्ट कर देना चाहता है कि दिगम्बर संत अत्यंत सूक्ष्म जीवों को बहुत ही कोमलता से हटाने के लिए मयूर पिच्छी का उपयोग करते हैं। इसका एकमात्र उद्देश्य यही होता है कि किसी भी जीव को कोई चोट न पहुंचे यानि यह पूरी तरह से जीव रक्षा और अहिंसा का एक परम पावन साधन है।

अब पढ़िए मेनका गांधी जी, पिच्छी में मयूर पंख ही क्यों? मोर के पंख बहुत कोमल होते हैं, इतने कि आपकी आंख में जायें, तो भी कोई असर नहीं, बहुत हल्के होते हैं, यह धूल, पानी की बूंद कुछ ग्रहण नहीं करते, चींटी जैसे सूक्ष्म जीव को भी इससे खरोंच तक नहीं आती। पसीने को भी नहीं सोखते, काफी लचीले होते हैं, मुड़ने या दबने पर भी आसानी से टूटते या चटखते नहीं। यह सहज वस्तु नहीं, बल्कि अहिंसा, संयम, जीव-दया और अपरिग्रह के कठोर पालन का जीता-जागता प्रमाण है।

मेनका जी अब जानिये, मोर को मारकर या स्वत: छोड़े जाते हैं – हां, 15 लाख मोरों की हत्या जैन संतों के कारण, तथ्यहीन बात को भी जान लीजिये। मोर के पंख के लिये उनकी हत्या तो दूर, उन्हें पकड़ा भी नहीं जाता, और न ही उन्हें कोई नुकसान पहुंचाया जाता है। वास्तव में मोर विशेष समय (विशेषकर वर्षा ऋतु के बाद) प्राकृतिक रूप से अपने पंख छोड़ देता है। अगर कोई उनके पंख खींचता है तो उसके किनारे पर लहू का निशान आता है, जिसे कभी पिच्छी के लिये उपयोग नहीं किया जाता। जंगल में केवल जमीन पर गिरे हुए इन प्राकृतिक रूप से झड़े पंखों को ही एकत्र करते हैं।

मेनका जी, 15 लाख मोरों की हत्या पिच्छी के लिये, इसका प्रमाण दीजिए, या तुरंत क्षमा मांगिये – दिगंबर संतों को 15 लाख मोरों की हत्या का आरोपी बताने वाली मेनका गांधी जी सान्ध्य महालक्ष्मी आपसे इस कथन का प्रमाण समाज हित में मांग करता है। उन 15 लाख मोरों की हत्या करने वाले दोषियों को पकड़ने और यह दावा पुख्ता करने का भी प्रमाण दें।

अपमान तो यह श्रीकृष्ण जी और खाटू श्याम जी के साथ पूरे हिंदू समाज का
यह अपमान जैन समाज का ही नहीं, दिगंबर संतों की चतुर्थकालीन आदि परम्परा का ही नहीं किया गया, बल्कि यह अपमान तो मस्तक पर मयूर पंख लगाने वाले श्रीकृष्ण भगवान का, खाटू श्याम का, उनके करोड़ों भक्तों का भी है, यह उन सब बाबाओं, मौलवियों का भी अपमान हैं, जो झाड़ा कर रोग दूर करते हैं। राजनीतिक रोटियां सेकनेवाली नेत्री द्वारा यह पूरे जैन – हिंदू सनातन पम्परा का अपमान है।

इस बारे में पूरी जानकारी सबसे पहले आवाज उठाने वाले चैनल महालक्ष्मी के एपिसोड नं. 3751, 3760 में सीधे देख सकते हैं।

सान्ध्य महालक्ष्मी चिंतन : आज ही नहीं, लगातार सैकड़ों वर्षों से जैन संस्कृति पर, वाणी से, शस्त्र से, सिद्धांत से, शरीर से, उपकरण पर लगातार हमले हो रहे हैं और अफसोस यह है कि कुछ राजनीतिक, कुछ प्रशासनिक दबावों के डर से ऊंच पद पर रहते हुए भीगी बिल्ली बन जाते हैं। बड़ी-बड़ी कमेटियां चुप रह जाती हैं और नेतृत्वहीन समाज बस देखता रह जाता है। उधर यह परोक्ष हमला जैन के साथ, परदे के पीछे हिंदू समाज पर भी है, जो नहीं चाहते कि दो प्राचीन धर्म परम्परायें खुशहाल रूप से चल सके।