॰ दत्तात्रेय जी को मानने वाले कुछ साधुओं-अनुयायियों की जूनागढ़ में रैली
॰ जैन मुनियों के अंतिम संस्कार व समाधि स्थलों की न हो इजाजत : मांग
॰ जैन महाभारत का सार्वजनिक अपमान
॰ हिंदू मंदिरों – स्मारकों पर जबरन लगाये जैन चिह्न : आरोप
॰ 1980 के बाद के सभी अवैध निर्माण तोड़े जाएं : मांग
28 अप्रैल 2026 /बैसाख शुक्ल त्रयोदशी /चैनल महालक्ष्मी और सांध्य महालक्ष्मी/
23 अप्रैल, दिन गुरुवार, जूनागढ़, गिरनार में दत्तात्रेय जी को मानने वाले कुछ साधुओं की अगुवाई में उनके अनुयायियों ने गिरनार की रक्षा के नारे लगाते हुए एक बड़ी रैली निकाली। गिरनार प्रोटेक्शन कमेटी का आरोप है कि जैन सम्प्रदाय के कुछ संगठन और तत्व गिरनार इलाके में दत्तात्रेय विरोधी गतिविधियां कर रहे हैं और हिंदू धार्मिक स्थलों पर गैर कानूनी तरीके से कब्जा करने की कोशिशें की जा रही हैं।

खोई जमीन पाने की कवायद
अपुष्ट सूत्र कहते हैं कि इसके पीछे मंशा यही है कि महेश गिरि अपनी खोई हुई जमीनी ताकत पर वापस पकड़ बना ले। कहा जाता है कि भाजपा की राजनीति से अलग-थलग होने के बाद यहां एक साधु की मृत्य के समय जो गलत कार्य किये गये, उनसे उनकी बहुत निंदा हुई और साइड लाइन हो गये।
पहले श्वेताम्बर जैनों को अच्छा और दिगंबरी पर हमला करने वाले, अब श्वेताम्बर जैनियों को निशाने पर लेकर अपनी खोई पहचान वापस पान की जुगत में है।
जैन जमीन पर खड़ा किया विवाद
मिली जानकारी के अनुसार 97-98 में कलेक्टर द्वारा जैन संघ को 99 साल के पट्टे पर जगह दी गई, जिस पर हो रहे निर्माण को लेकर विवाद हो रहा है। कुछ हिंदू संगठनों का कहना है कि 2008 में गिरनार को वाइल्ड लाइफ सेन्चुरी घोषित कर दिया गया, तो इस जमीन पर निर्माण कार्य कैसे? (सवाल तो यह भी है, कैसे यह जमीन केवल एक सम्प्रदाय (श्वेताम्बर) को दी गई, क्योंकि सरकार द्वारा भू आवंटन पूरे समुदाय (जैन) के लिये ही होता है।
टोंको के नाम पर दावा
महेश गिरिजी ने आरोप लगाया कि गिरनार के हिंदू शिखरों और मंदिरों के नाम बदले जा रहे हैं, जैसे दत्तात्रेय शिखर को नेमिनाथ, गोरखनाथ शिखर को शम्भू स्वामी और भ्रष्टाचार के माध्यम से सनातनी भूमि पर अतिक्रमण हो रहा है।
जैन शास्त्र का अपमान
महंत शारदूमलनाथ जी ने तो जैन महाभारत पुस्तक हाथ में लेकर कहा कि इसमें पूरे गिरनार की कहानी है कि नेमिनाथ के वैराग्य की कथा की आलोचना करते हैं। उन्होंने कहा कि नेमिनाथ जैसे लोग 2600 साल पहले पैदा हुए, 5000 साल पहले की कृष्ण की कहानी में 2600 साल पहले पैदा हुए जैन सम्प्रदाय को जोड़ दिया है। नेमिनाथ के वैराग्य के कारण में श्री कृष्ण की पृष्ठभूमि पर भी व्यंग्य करते हैं।
जैन ट्रस्ट के नक्शे को विवादित बताते कहा जाता है कि इस नक्शे में अपनी जगहों की संख्या 46 से बढ़ाकर 102 कर दी। यह नक्शा अवैध है।

रोका जाये निर्वाण लाडू कार्यक्रम
इन सबके चलते कलेक्टर को 60 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा गया, जिसमें गिरनार प्रोटेक्शन कमेटी ने खासतौर पर चेतावनी दी है कि आने वाली जुलाई में जैन सम्प्रदाय के शिखर पर निर्वाण लाडू चढ़ाने की प्रक्रिया रोक दी जाये क्योंकि यह सनातन परम्परा में इस रस्म को अशुद्ध माना जाता है। ऐसे समारोह से करोड़ों हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचेगी और देश में धार्मिक दुश्मनी पैदा हो सकती है।
श्वेताम्बर सम्प्रदाय पर आरोप
एक अन्य मांग में आरोप है कि जैन श्वेताम्बर सम्प्रदाय की ‘देवचंद लक्ष्मीचंद पेढ़ी’ और अन्य संस्थाओं ने वन विभाग की सीमा में लगभग 60 हजार वर्ग फुट से अधिक क्षेत्र में अवैध निर्माण किया है। इसे तुरंत गिरने की मांग की गई।
एक और मांग गौमुखा गंगा की ओर जाने वाले मार्ग पर जैन सम्प्रदाय द्वारा किये गये निर्माण को हटाने और उसे सनातन धर्म के अनुयायियों के लिये स्वतंत्र रखने की मांग की।
जैन पहचान हटायें
यह भी मांग रखी कि गिरनार पर स्थित सनातन धर्म के प्राचीन मंदिरों और स्थानों को ‘अपमान’ से बचाने और उनके आसपास जैन प्रतीकों को जबरन नहीं लगाया जाये।
मुनियों के समाधि स्थल-संस्कार बंद हो
साथ ही गिरनार पहाड़ी क्षेत्र में जैन मुनियों के अंतिम सरकार और समाधि स्थल बनाने पर तत्काल रोक लगे।
यही नहीं भवनाथ इलाके को इको-सेंसेटिव जोन से बाहर रखने और रात में भजन कीर्तन के लिये परमानेंट इजाजत की मांग की।
साथ ही रास्ते में सुरक्षा के लिये विशेष चैक पोस्ट बनाने का सुझाव दिया ताकि अवैध रूप से निर्माण सामाग्री ऊपर न ले जा सके। विभिन्न ट्रस्टों की मौजूदा जमीनों के दस्तावेजों की फिर से जांच हो। सनातन धर्म के साधुओं भक्तों के लिए गिरनार के हर हिस्से में बिना किसी रोक-टोक के प्रवेश सुनिश्चित हो।
आंदोलन उग्र करने की चेतावनी
ज्ञापन में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि गिरनार सनातन धर्म का अनादि काल से पवित्र स्थल है। यदि प्रशासन इन 60 मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं करता है, तो साधु-संतों ने उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है। इस रैली में जूनागढ़ के कलेक्टर को जो ज्ञापन सौंपा गया है, उसकी प्रतियां, भारत के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, गुजरात के मुख्यमंत्री को भी भेजी गई हैं।
उधर जैन समाज के स्थानकवासी-मूर्तिपूजक संघ के प्रतिनिधियों ने भी शांति बनाये रखने की अपील की है और कहा है कि वे भी कानून सम्मत कार्यवाही और अवैध अतिक्रमण हटाने के पक्ष में हैं, बशर्ते उनके प्रचीन धार्मिक अधिकारों का हनन न हो।
इस बारे में पूरी विस्तृत रिपोर्ट चैनल महालक्ष्मी के एपिसोड नं. 3692 व 3698 में देख सकते हैं।
चैनल महालक्ष्मी चिंतन : 13 फरवरी 2005 के अदालती आदेश के बावजूद बार-बार दबाव की राजनीति व प्रशासन को भी भ्रष्टाचार के आरोप के साथ निशाने पर लिया जाना गंभीर स्थिति को दर्शाता है। पर जैसे प्रतिक्रिया-आरोप व रैली में मांगें उठाई हैं, उन पर न्यायोचित चिंतन जरूरी है।
1. निर्वाण लाडू चढ़ाने को रोकने का षड्यंत्र : 2016 तक जैन समुदाय शुरू से यहां 22वें तीर्थंकर के मोक्ष कल्याक पर निर्वाण लाडू चढ़ाता है। पर उसके बाद दबाव बनाकर, धार्मिक उन्माद, सामप्रदायिक झगड़ों, का डर दिखाकर उस पर विराम लगवा दिया, जिसे कोरोना काल का भी बहाना मिला। गत वर्ष लाडू तो नहीं चढ़ने दिया, पर हर जैन यात्री की तलाशी ऐसे ली गई जैसे उनके पास चावल, बादाम, नारियल नहीं, गोला बारूद था। शायद दुनिया के किसी भी देश में ऐसा दुर्व्यवहार अपने धार्मिक श्रद्धालुओं से नहीं किया जाता होगा।
2. अवैध निर्माण रुके, हटे :- बिल्कुल सही है, पूरा न्याय हो, कहीं भी पूरे गिरनार में 1980 के बाद अवैध निर्माण हो हुआ हो तो चिन्हित करते कार्यवाही हो, चाहे वो टोकों के अंदर हुआ है या वंदना मार्ग के दोनों तरफ।
3. रास्ते में चैकपोस्ट:- यह मांग जैन समुदाय पहले से करता आ रहा है, पर हकीकत उलट है। सुरक्षा कर्मी ही असुरक्षा की भावना कैसे पैदा करते हैं, वो पांचवीं टोंक पर स्पष्ट देखा जा सकता है। पूरा क्षेत्र सीसीटीवी की जद में हो, उसका कंट्रोल कलेक्टर आफिस में हो, पर उसका फीड दोनों सम्प्रदायों को भी मिले।
4. रात भर भजन कीर्तन :- यह वाइल्ड लाइफ सेन्चुरी है, यहां बहुत बड़ी संख्या में वन्य जीव रहते हैं, आज वो इतने परेशान हैं कि बार-बार वंदना पथ व तलहटी में आ जाते हैं, नियमानुसार उनके क्षेत्र में ऐसा सोचना भी शायद – यथोचित नहीं।
5. कौन है सनानत – बार-बार वैष्णव-हिंदू धर्म को सनातन धर्म कहा जाने लगा है। सनातन किसी धर्म का नाम नहीं, अतिप्राचीनता की पहचान है। जिस तरह हिंदु धर्म है, वैसे ही जैन धर्म है, प्राचीन नामों में वैष्णव व श्रमण धर्म, और दोनों ही सनातन है, हमें यह ध्यान रखना होगा।



















