गिरनार से चार बड़ी खुशखबरी : 5वीं टोंक व पूरे वंदना मार्ग में लगे कैमरे, वॉयस रिकार्डिंग के साथ

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2. तीर्थक्षेत्र कमेटी करायेगी भगवान अनिरुद्ध स्वामी टोंक का जीर्णोद्धार
3. 5वीं टोंक के नीचे जिनालय के लिये ली जायेगी जगह
4. तीर्थक्षेत्र कमेटी कार्यालय खुलेगा गिरनार में
21 जनवरी 2026 / माघ शुक्ल तृतीया/चैनल महालक्ष्मी और सांध्य महालक्ष्मी/ शरद जैन
शुभ समय, शुभ क्षेत्र, शुभ काल, शुभ भाव और सान्निध्य है तपस्वी संतों का, तो जो काम और मांग दशकों से पूर्ण नहीं होती, वह चंद मिनटों में हो जाती है।

शुभ दिन था मकर संक्रांति का, शुभ क्षेत्र था सिद्धक्षेत्र गिरनारजी, शुभ सान्निध्य था आचार्य श्री सुनील सागरजी महामुनिराज का और फिर भारतवर्षीय दिगंबर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जम्बू प्रसाद जैन जी और गुजरात अंचल के अध्यक्ष पारस जैन बज की अगुवाई में सारे काम बनते चले गये।
मकर संक्रांति को तड़के 4 बजे गाजियाबाद-दिल्ली से चलकर राजकोट उतरकर तीर्थक्षेत्र कमेटी के अध्यक्ष जम्बू प्रसाद जैन जी व चैनल महालक्ष्मी जूनागढ़ पहुंचे, जहां गुजरात अंचल अध्यक्ष पारस जैन बज पहले से ही आचार्य श्री सुनील सागरजी के मंगल प्रवेश की तैयारियां देख रहे थे। हजारों यात्रियों की व्यवस्था की गई, यात्री कहीं भी ठहरे, सब के भोजन की नि:शुल्क व्यवस्था, तीनों पहर की निर्मल ध्यान केन्द्र में की गई।

गिरनार का वंदना मार्ग सीसीटीवी कैमरों की नजर में

आचार्य श्री के आशीर्वाद के बाद सीधा पहुंचे एसपी कलेक्टर कार्यालय में, जहां पारस जैन बज की अगुवाई में पहले एसपी सुबोध ओडेदरा, फिर कलेक्टर अनिल रानावालिया से मिले। उन्हें बताया कि आज 900 जैन बंधु 5वीं टोंक तक गये। एसपी महोदय हैरान थे, कि इतने जैन यात्री एक साथ गये, और हलचल नहीं हुई, वे तुरंत अपना मोबाइल देखने लगे। बताया कि अब पूरे वंदना मार्ग का निरीक्षण यहीं बैठे कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि अब 5वीं टोंक सहित नीचे तक पूरा वंदना मार्ग सीसीटीवी कैमरों की नजर में है, वो भी साउण्ड के साथ। यह जानकर सभी के चेहरों पर मुस्कान आ गई।

मिल बैठ कर हर विवाद का हल निकल जाएगा
कलेक्टर महोदय से साधु-संतों के लिये विशेष सुविधाओं के साथ यात्रियों को सुलभ दर्शन पर भी तीर्थक्षेत्र कमेटी की चर्चा हुई। बात सुमधुर व विवाद खत्म करने की दिशा में सौहार्दपूर्ण रूप से हुई। सब एकमत थे कि मिल-बैठकर चर्चा हो। एक में तो नहीं, कई बैठकों के दौर में सौहार्दपूर्ण हल जरूर निकल जाएगा।

छोटी चर्चा में निकले बड़े हल
फिर आचार्य श्री सुनील सागरजी से तीर्थक्षेत्र कमेटी की मंच पर चर्चा हुई। आचार्य श्री ने कुछ बातें समाज हित में रखी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि ‘मिलकर ही हल निकलेगा, विरोध करके नहीं। उन्होंने मंच से कहा कि आज दो-तीन बातों का एकदम दो-तीन मिनट में फैसला हो गया। जब प्रबुद्ध लोग इक्ट्ठे होते हैं, तो बड़ी मीटिंग नहीं करनी पड़ती। यही खड़े थे पारस जी, जम्बू जी, शरद जी, राजेन्द्र जी, तो जो सुबह विषय निकला, उस पर तुरंत मुहर लग गई।’

तीर्थक्षेत्र कमेटी का गिरनार में कार्यालय
आचार्य श्री सुनील सागरजी ने कहा कि पहली बात तो यह कि यहां भारतवर्षीय तीर्थक्षेत्र कमेटी का कार्यालय हो, ताकि यहां विशेष सुविधायें, व्यवस्थायें हो, यात्रियों से संबंधित बातों का ध्यान रखा जा सके। अब तीर्थक्षेत्र कमेटी का 125वें वर्ष में प्रवेश से पहले अपना कार्यालय यहां खोलने जा रही है, जिसका वर्षों से इंतजार था। आज कार्यालय का आगाज है समझिये, क्योंकि कह दिया, तो कर दिया।

दूसरी टोंक का शीघ्र जीर्णोद्धार
आचार्य श्री ने कहा कि दूसरी बात, अनिरुद्ध कुमार भगवान के चरण कितनी बार देखा, जब भी हम यात्रा करने वहां जाते, तो उसकी बुरी हालत देखते, हमने 7-8 यात्रायें तो कर ली हैं, और हर बार दो मिनट के लिए जरूर बैठते या तो नीचे या फिर ऊपर, जाप भी करते। उबड़-खाबड़ हो गया है चबूतरा। अब तीर्थक्षेत्र कमेटी जीर्णोद्धार करने जा रही है, अगर यही टोंक नीचे होती तो आलीशान मंदिर तक बन जाता। इतने ऊंचे पहाड़ पर, एक सुंदर छतरी रूप आ जाये, तो भी बड़ी बात होगी। अगले ही दिन वंदना के दौरान आचार्य श्री ने सैकड़ों लोगों की उपस्थिति में वहां बैठकर शांति मंत्र का जाप किया।
इससे पूर्व पारस बज जी ने बताया कि इस जीर्णोद्धार के लिए सरकार, प्रशासन व वन विभाग से अनुमति ले ली है, और इस कार्य के लिये जम्बू प्रसाद जी ने तत्काल अनुमति दे दी। इसके लिये जैन समाज से लगातार मांग आ रही थी।

पांचवीं टोंक के पास हो नेमिनाथ जिनालय
पारस बज जी ने बताया कि पांचवीं टोंक से 70-80 सीढ़ी नीचे 2600 फीट जगह पहाड़ी पर ढूंढ निकाली है, इतनी बड़ी जगह ऊपर मिलना असंभव सा है, पर 5-6 बरस के प्रयास से यह मिल पाई है। आचार्य श्री ने कहा कि पांचवीं टोंक पर प्रभु नेमिनाथ जी के श्री चरण तो है, वह तो है, लेकिन उसके नीचे की तरफ जैसा अभी सुन रहे थे, 80-90 सीढ़ी नीचे और जगह है, वहां एक चैत्यालय टाइप का जिनालय या विश्राम गृह का कुछ बने और उसमें नेमिनाथ भगवान विराजे। आपके सामने पारसजी ने कहा बरसों से इसके लिये प्रयास कर रहे हैं। करने से काम होता है और मानने से नेमिनाथ भगवान आते हैं।

इस बारे में चैनल महालक्ष्मी ने वहीं सार्वजनिक मंच से स्पष्ट किया कि नीचे जिनालय भगवान नेमिनाथ जी प्रतिमा व पूजा-पाठ, विश्राम आदि के लिये होगा। पांचवीं टोंक के तीर्थंकर नेमिनाथ जी के चरण यथावत वही रहेंगे।

पंथवाद -सतंवाद को खत्म करें, एकता का परिचय दे
तीर्थक्षेत्र कमेटी अध्यक्ष जम्बू प्रसाद जैन जी ने सभी कार्यों की सहर्ष अनुमति देते हुये कहा कि हमें संतवाद-पंथवाद को भूलना होगा और एकता का परिचय देना होगा, तभी हमारे तीर्थ बच सकेंगे। तीर्थ बचेंगे, तो हमारी संस्कृति बचेगी और संस्कृति बचेगी तो हम बचेंगे। आप सबको तीर्थक्षेत्र कमेटी का हर संभव सहयोग देना चाहिए, जब यह आर्थिक रूप से मजबूत होगी, तभी तीर्थों पर सुविधायें व जीर्णोद्धार संभव हो सकेगा।

शतकोत्तर रजत महोत्सव में विशेष दान निकाले
आचार्य श्री सुनील सागरजी ने जोर देकर कहा कि जम्बू प्रसाद जी की अध्यक्षता में भारतवर्षीय दिगंबर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी 22 अक्टूबर 2026 से 22 अक्टूबर 2027 तक शतकोत्तर रजत महोत्सव मना रही है, इसे पूरा समाज मिलजुल कर मनाये और इस वर्ष तीर्थों के जीर्णोद्धार के लिये विशेष प्रयास किये जायें।

विशेष कलश स्थापना हो। वर्षायोग स्थापना पर हो, विशेष आयोजनों पर हो, उस कलश की राशि सीधे तीर्थक्षेत्र कमेटी को दी जाये। विशेष आयोजनों पर एक विशेष धनराशि तीर्थों के विकास के लिये निकाले। यह कमेटी की भावना है, ये हमारी जीवंतता के प्रतीक हैं, इन तीर्थों का सभी लोग विकास करें।


14 जनवरी मकर संक्रांति को आचार्य श्री सुनील सागरजी से चर्चा के दौरान भारतवर्षीय दिगंबर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी द्वारा भगवान अनिरुद्ध स्वामी की जीर्ण-शीर्ण होती टोंक के जीर्णोद्धार की सहर्ष घोषणा की, उसके अगले ही दिन आचार्य श्री ने गिरनार की वंदना के दौरान दूसरी टोंक पर शांति मंत्र का जाप किया। शीघ्र ही इस टोंक का जीर्णोद्धार शुरू होगा।