22 अगस्त 2026 /श्रावण शुक्ल दशमी /चैनल महालक्ष्मी और सांध्य महालक्ष्मी/ शरद जैन
॰ तीर्थक्षेत्र कमेटी टीम को आशीर्वाद व दी गई पूरी योजना
॰ सोशल मीडिया पर शिखरजी क दुष्प्रचार से बचिए, रोकिए

मोक्ष सप्तमी के पावन अवसर पर श्रद्धालुओं की पर्वत वंदना सुविधामय हो, इसके चलते भारतवर्षीय तीर्थक्षेत्र कमेटी के पदाधिकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष जम्बू प्रसाद जैन, राष्ट्रीय महामंत्री संतोष पेंढारी, वीरेश सेठ, हंसमुख गांधी आदि मोक्षसप्तमी पर सम्मेदशिखरजी पहुंचे और वहां की व्यवस्थायें स्वयं देखीं। जैन श्वेताम्बर सोसाइटी के अध्यक्ष रामपुरिया जी के साथ डीसी से भी तीर्थक्षेत्र की सुरक्षा के बारे में चर्चा कर कुछ नियम लागू करने की बात कही, जिस पर अभी आगे भी चर्चा होगी। इस क्षेत्र पर अब अनेकों अजैन पहुंचने लगे हैं और सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ चर्चा छिड़ गई है, इस पर मुनि श्री प्रमाण सागरजी ने पूरी कमेटी से कहा कि उनको समझा दीजिए। अगर आप शंकर जी के मंदिर में जाते हैं, तो वहाँ बेलपत्र चढ़ता है, वहाँ जल चढ़ाया जाता है और हनुमान जी के मंदिर में जाते हैं, तो लोग वहाँ सिंदूर चढ़ाते हैं। हनुमान जी के मंदिर में कभी बेलपत्र नहीं चढ़ता और शंकर जी के मंदिर में कोई सिंदूर नहीं चढ़ाता, तो जैन तीर्थंकर के चरणों में हम चावल के पुंज चढ़ाते हैं, अर्घ्य चढ़ाते हैं, आप भी वही चढ़ाइए। उनको इतना ही तो बोलना है। भाई साहब, ऐसा करिए। आप अपनी थोड़ी सी सोच बदल लीजिए। आप जिसे ट्रैकिंग सोच कर आए हैं, सोच बदल दीजिए, तो वही आपकी तीर्थ यात्रा बन जाएगी। ट्रैकिंग दो पल का मजा देगी, लेकिन तीर्थयात्रा पूरे जीवन को सजा देगी।

मुनि श्री ने उन्हें रोकने की बजाय रूपांतरित करने पर जोर देते हुए कहा कि उनका समझाना होगा, इससे उनका पूरा जीवन सवरेगा, पूरा जीवन बदलेगा। वो प्रेरणा हमें देनी चाहिए, सकारात्मक दृष्टिकोण। और दूसरी बात मैं एक सलाह दूँगा, शरद जी (चैनल महालक्ष्मी) यहाँ हैं… सोशल मीडिया में जिस तरह की बातें लोग फैलाते हैं, सबसे बड़ा नुकसान समाज को होता है।
हमारे ‘व्हाट्सएप वीर’ कुछ भी बातें प्रतिक्रिया स्वरूप दे देते हैं, वास्तविकताओं को जाने बिना। उसका काउंटर रिएक्शन कितना नुकसान पहुँचाता है, आप सब देख रहे हैं। कोई जरूरत नहीं इस मुद्दे को सोशल मीडिया में रखने की, उससे इसका कोई समाधान नहीं होगा। इसी सोशल मीडिया से प्रेरित होकर जब लोग यहाँ आते हैं और लोगों से उलझते हैं, उनके साथ टोक-टाकी करते हैं, दुर्व्यवहार करते हैं और इस तरह के रिएक्शन की वीडियो जब दुनिया में जाती है तो और ज्यादा दुष्प्रचार होता है। इसका जिम्मेदार कौन है? हम लोगों को सकारात्मक प्रेरणा क्यों नहीं दे सकते सोशल मीडिया के माध्यम से? मुनि श्री का स्पष्ट प्रश्न था शंका समाधान कार्यक्रम में।
अन्य लोगों को रोकने का स्पष्ट विरोध करते मुनि श्री ने कहा कि ‘हम किसी को रोकें या रूपांतरित करें, हमें यह तय करना चाहिए न? और किसी को रोकने का अधिकार भी आपके पास नहीं है। तीर्थ सबका है, सबका स्वागत होना चाहिए। बस हमें एक ही भाव रखना चाहिए—तीर्थ में आओ, तो तीर्थ यात्री बनकर के आओ।’

जैन तीर्थ है, जैन विधि से पूजा करो। इतना ही तो हमें चाहिए और क्या है? उनको हम अगर अहिंसा, शाकाहार और नशा मुक्ति की तरफ प्रेरित कर दें, तो समाज के लिए कितनी बड़ी उपलब्धि होगी। यह देश का कितना बड़ा गौरव बढ़ाएगा।
हमें इस तरह की सकारात्मक दृष्टि रखनी चाहिए। मैं तीर्थक्षेत्र कमेटी की पूरी टीम को, जो आज आप लोगों ने विचार बनाया है, मुझे उम्मीद है बहुत जल्दी वह सब कार्यान्वित रूप में होगा। लेकिन एक संदेश पूरे देश को देता हूँ—अगर आप सम्मेद शिखरजी की पवित्रता को बनाए रखना चाहते हैं और सच्चे अर्थों में आप सम्मेद शिखर के भक्त और हितैषी हैं, तो इस मुद्दे को सोशल मीडिया से एकदम कट कर दीजिए।
इस विषय में सोशल मीडिया में अगर कोई संदेश देना ही है, तो केवल और केवल सकारात्मक संदेश दीजिए। लोग गाड़ी चला रहे हैं और वीडियो बना-बना कर भेज रहे हैं, केवल अपने व्यूज और रीच बढ़ाने के चक्कर में! उन लोगों को यह समझ में नहीं आता कि इसका दूरगामी परिणाम कितना भयंकर निकलेगा… और निकल रहा है।
इसलिए इन सब बातों को सभी को ध्यान में रखकर के चलना चाहिए, इस पर विचार करें। मैं शरद जी (चैनल महालक्ष्मी) को विशेष रूप से कहूँगा, उनका मीडिया है, वह अगर कोई सवाल करना चाहें तो कहें, लेकिन सकारात्मक लक्ष्य रखो। हमने नकारात्मकता फैलाकर के सिवाय नुकसान के कुछ नहीं पाया है। हमें एक प्रण लेना चाहिए। हमारे गुरुदेव कहते थे—शराब की निंदा करने की बजाय दूध के गीत गाना शुरू करो। वह दृष्टिकोण रखेंगे, तो हमारे लिए उपलब्धि होगी, अन्यथा हम सब चीजें खोएंगे। हमारे पास अभिव्यक्ति की आजादी है, लेकिन अभिव्यक्ति की आजादी का मतलब यह नहीं कि वे लोग मर्यादा का हनन करें और हमारा व्यवहार औरों के प्रति रूखा हो। दोनों तरफ से हमें ध्यान देना चाहिए।

शंका समाधान के इस कार्यक्रम में शरद जैन (चैनल महालक्ष्मी) ने सवाल पूछते हुए कहा कि गुरुवर, इसी पर आगे जोड़ रहा हूँ… गिरनार चला गया, सम्मेद शिखरजी उसी राह पर है। आज हम अपने बीच में इतनी नेगेटिविटी पैदा करते हैं, यह नहीं कहते आज भी लड़िए, जीत पाओगे। हम हर जगह… हर जगह यही आता है महाराज जी, क्यों हम पॉजिटिविटी में बात नहीं करते? अरे लड़ो-लड़ो तभी जीत पाओगे, अरे पड़े रहोगे तो हर कोई शिकार कर जाता है महाराज जी! आज हमें यह कहने की जरूरत है—ना गिरनार गया है, ना शिखरजी गया है। अरे तुम खड़े हो के कुछ काम तो करो! कुछ तो सहयोग करो! अरे ताली एक हाथ से नहीं, दोनों से बजती है, कोशिश तो करो! तीर्थक्षेत्र कमेटी के हाथ मजबूत करो। गुरुवर, मेरा यही है कि हम नेगेटिव पर नेगेटिव क्यों होते जा रहे हैं, क्यों हम पॉजिटिव ऊर्जा नहीं ला पा रहे हैं?
मुनि प्रमाण सागर जी ने इसका समाधान करते हुए कहा कि बहुत अच्छी बात आपने कही है। हमारे पास कुछ गया नहीं है, जो है उसे हमें संभालना है। हमारा लक्ष्य यही होना चाहिए। और जो सवाल आपने अभी उपस्थित किया है, हमें उसके प्रति पूरी तरह जागरूक होना चाहिए। और मुझे उम्मीद है समाज में एक ऐसा वातावरण बनेगा… और सभी को, जितने लोग यहाँ हैं और जो इस संदेश को सुन रहे हैं, एक सकारात्मक संदेश फैलाना शुरू करें। और हमने एक बहुत अच्छी कार्ययोजना बनाई है, जो आज इन लोगों के बीच मैंने दी है। और वह कार्ययोजना अगर ठीक तरीके से लागू हो गई, तो आप 6 महीने में पूरे सम्मेद शिखर की रंगत बदली हुई देखेंगे।
इस बारे में पूरी जानकारी चैनल महालक्ष्मी के एपिसोड नं. 3817 में देख सकते हैं।



















