शिखरजी घटनाक्रम ने किया जैन समाज को शर्मसार ॰ यात्रियों की गलत हरकतों से सौहार्दमय वातावरण होता खराब

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॰ तीर्थों पर दबंगई-उपदेश देने वाले बाज आयें अपनी हरकतों से
॰ दरवाजे पर आये प्यासे को दुत्कारने वाले कर रहे तीर्थ व कमेटियों को बदनाम

05 फरवरी 2026 / फाल्गुन कृष्ण चतुर्थी /चैनल महालक्ष्मी और सांध्य महालक्ष्मी/ शरद जैन

बुधवार 28 जनवरी को दोपहर में शाश्वत तीर्थ श्री सम्मेदाखिरजी पारसनाथ टोंक पर कुछ लोगों, जिनमें महिलायें भी शामिल थीं, ने पूरे जैन समाज को शर्मसार कर दिया है। अहिंसा के लिये, दान के लिये, त्याग के लिये, भूखे-प्यासों के सहयोग के लिये, जिस समाज की दुनिया उदाहरण देते नहीं थकती, उसी जैन समाज के कुछ लोगों ने आज पूरे समाज के लिये सिर झुकाने को मजबूर ही नहीं किया, बल्कि जहां लोग पुण्यार्जन करने जाते हैं, वहां पापार्जन में कोई कमी नहीं छोड़ी।

उस दिन सायंकाल तक उस वीडियो की क्लिप चैनल महालक्ष्मी के पास भी पहुंची, जो तब तक पूरी मधुबन तलहटी व आसपास तक वायरल हो गया था। प्रशासन व पुलिस भी जिस पर नजर रख रही थी, उसमें जैन बंधु, एक अजैन भाई को उस शाश्वत तीर्थ पर पीने के लिये बोतल में पानी लेने से इंकार कर रहे थे, ठुकुरा रहे थे।

उस वीडियो में साफ सुना व देखा जा सकता है कैसे हमारा तीर्थ, हमारा तीर्थ कहकर एक प्यासे को बोतल में पानी लेने तक से इंकार ही नहीं किया गया, उसका एक प्रकार से निरादर भी किया गया। क्या जैन कुल से जन्म लेकर यही संस्कार दिये गये हैं कि सामने आये व्यक्ति की प्यास बुझाने की बजाय दुत्कारा जाये। क्या पारस प्रभु की मोक्ष स्थली से यही संदेश मिलता है। जहां सम्मेदशिखरजी शाश्वत तीर्थ है, जहां जाकर जैन ही नहीं, अन्य जन भी, तिर्यंच भी, निर्मल भावों से अपना कल्याण करते हैं, वहां अपने ही दूसरों के सहयोग देने की बजाय दुत्कारते हैं, इस वीडियो को चैनल महालक्ष्मी के एपिसोड नं. 3612 में देख सकते हैं आप स्वयं भी।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार वहां इन्दौर से आये मांगीलाल ग्रुप के कुछ यात्रियों ने ऐसा कहा। फिर वहां पर तीर्थक्षेत्र कमेटी के ऊपर कार्यालय के एक कर्मचारी से भिड़ गये, कि तुझे यहां दान कूपन काटने की बजाय ऐसे लोगों को रोकना चाहिए। लोग जूते-चप्पल लेकर ऊपर जा रहे हैं। (पर ऐसी एक भी घटना चैनल महालक्ष्मी के सामने प्रमाण के साथ नहीं आई)। 30 जनवरी को सान्ध्य महालक्ष्मी के सिटी संपादक प्रवीन कुमार जैन ने पर्वत वंदना के समय पारसनाथ टोंक पर देखा कि टोंक से पहले सीढ़ियों पर लाउड स्पीकर से लगातार घोषणा की जा रही थी, कि टोंक पवित्र जैन स्थल है, जूते-चप्पल नीचे ही उतार कर दर्शन करने जाएं। इसके साथ 2-3 गार्ड विशेष रूप से यात्रियों पर निगरानी रख रहे थे और सभी जैनेत्तर समाज भी जूते-चप्पल उतारकर ही टोंक में जा रहे थे।

भारतवर्षीय दिगंबर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी के अध्यक्ष जम्बू प्रसाद जैन ने सान्ध्य महालक्ष्मी को इस घटना की सूचना देते हुये कहा कि ऐसी घटनायें वहां पर सौहार्द और भाईचारे के वातावरण पर कुठाराघात करती हैं, तनाव पैदा करती हैं व जैनों की दान देनी वाली विश्व में प्रसिद्ध संस्कृति की जग हंसाई करती हैं। थाना प्रभारी अगले दिन पारस टोंक पहुंचकर घटनाक्रम की जानकारी लेने को भी पहुंचे।

यही नहीं चैनल महालक्ष्मी को ऐसे अनेक प्रमुख लोगों से ऐसी घटना की निंदा करने की सूचनायें मिली।

चैनल महालक्ष्मी चिंतन – तीर्थों पर दिख रही अव्यवस्थाओं व समस्याओं को सौहार्दपूर्णरूप से हल करने की बजाय स्थिति को बिगाड़ने की कारगुजारियों से बाज आना होगा। आज अपनी कम संख्या के कारण वैसे ही जैन समाज को तकलीफों का सामना करना पड़ता है और उनमें ऐसी घटनायें आग में घी का काम करती हैं। बाहर से आकर हमारा ऐसी शर्मनाक व्यवहार स्थानीय लोगों में विद्वेष, क्रोध, बदले की कार्यवाही का कारण बनता है। अपनी शिकायतें लिखित रूप से तलहटी में बने तीर्थक्षेत्र कमेटी के कार्यालय में दें, जहां ठहरे हैं वहां कोठी इंचार्ज को दें, पर न कानून को हाथ में ले, न स्थिति को बिगाड़े, ऐसे कार्यों सें आप पर अगर कोई प्रशासनिक या पुलिस कार्यवाही करती है, उसकी जिम्मेदारी भी आप स्वयं की ही होगी।