उतार रहे शरीर से आभूषण, क्यों? ॰ करोड़ों का फण्ड इक्ट्ठा हो रहा

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20 अप्रैल 2026 /बैसाख शुक्ल चतुर्थी/चैनल महालक्ष्मी और सांध्य महालक्ष्मी/

2026 की शुरूआत से सूरत में चल रहा है ‘गोपीपुरा रक्षा अभियान’ जिसका उद्देश्य केवल फण्ड जुटाना नहीं, बल्कि अपनी संस्कृति और धार्मिक विरासतों को बचाने का एक संकल्प भी है।
सूरत का गोपीपुरा इलाका जैन धर्म के लिये एक पवित्र स्थान है, जहां 25 से अधिक प्राचीन जैन मंदिर और 35 से अधिक उपाश्रय हैं। पहले यहां जैनों की बड़ी संख्या थी, पर पिछले कुछ वर्षों में यहां से अधिकांश जैन परिवार बाहर चले गये। अब गोपीपुरा की पवित्रता और शुद्ध शाकाहारी संस्कृति को बनाए रखने के लिए एक विशाल फंड बनाया जा रहा है, ताकि गोपीपुरा में बिकने वाले घरों और दुकानों को ‘बॉयबैक’ योजना के तहत जैन समाज वापस खरीद सके। पूरे गोपीपुरा क्षेत्र को फिर से जैन बहुल बनाना होगा, ताकि मंदिरों की मर्यादा और शाकाहारी माहौल बना रहे। यह कार्यक्रम केवल अमीरों का नहीं है, बल्कि छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर कोई अपनी क्षमता के अनुसार योगदान दे रहा है।

इसके लिए ‘सुवर्ण दान’ अभियान चल रहा है, जिसमें मातायें, बहनें, अपनी स्वेच्छा से पहने हुए हार, चूड़ी, अंगूठी, झुमके आदि गहने उतार कर दानपात्र में डाल रही हैं। सूरत के श्रावकों ने इसके लिये करोड़ों रुपये और भारी मात्रा में सोना एकत्रित कर लिया है। इस बारे में पूरी जानकारी चैनल महालक्ष्मी के एपिसोड नं. 3680 में देख सकते हैं।

चैनल महालक्ष्मी चिंतन:PIPURA, SAVE JAINISM ‘सेव गोपीपुरा’ एक शुरूआती अभियान है, ऐसे ही अभियान शिखरजी, गिरनारजी, अयोध्या आदि तीर्थक्षेत्रों पर भी जरूरी हो गया है। क्या आप जानते हैं गिरनार क्षेत्र में एक भी दिगंबर जैन परिवार नहीं और अयोध्या में केवल एक जैन परिवार है। ऐसे में हमें ऐसे तीर्थों पर अपनी जड़ों को मजबूत करना आवश्यक है।