यह प्रतिमा तीर्थंकर के समवसरण में विराजमान होने की धोतक है, क्यूंकि समवसरण में विराजमान भगवान को दसों दिशाओं से देखा जाता है तो भी भगवान की मुखाकृति स्पष्ट दिखती है ।इस तरह की कलाकृति की प्रतिमाऐं अब नही बनती है।
तीर्थक्षेत्र कमेटी के शतकोत्तर रजत स्थापना वर्ष शुभारंभ का अभूतपूर्व शंखनाद
25 अक्टूबर 2026 / अश्विन शुक्ल चतुर्दशी /चैनल महालक्ष्मी और सांध्य महालक्ष्मी/ शरद जैन
जहां धर्म की ज्योति जले, हर दिल में विश्वास जगे,
मथुरा...



















