यह प्रतिमा तीर्थंकर के समवसरण में विराजमान होने की धोतक है, क्यूंकि समवसरण में विराजमान भगवान को दसों दिशाओं से देखा जाता है तो भी भगवान की मुखाकृति स्पष्ट दिखती है ।इस तरह की कलाकृति की प्रतिमाऐं अब नही बनती है।
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॰ सुप्रीम कोर्ट की इस कानूनी लड़ाई पर सख्त टिप्पणी, फैसला किया सुरक्षित
22 सितम्बर 2026 / भाद्रपद शुक्ल पंचमी /चैनल...



















