वर्षायोग…. कलश…. कलश…. कलश…अब एक तीर्थ सुरक्षा कलश की स्थापना भी! क्यों है ज़रूरी

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24 जुलाई 2026 /आषाढ़ शुक्ल दशमी /चैनल महालक्ष्मी और सांध्य महालक्ष्मी/ शरद जैन
हमारी संस्कृति की आधारशिला, हमारे पावन जैन तीर्थों के संरक्षण और संवर्धन हेतु एक अत्यंत विचारोत्तेजक और सामयिक आह्वान।

चातुर्मास यानी वर्षायोग का पावन समय आ गया। भारतवर्ष के कोने-कोने में हमारे पूजनीय दिगंबर संतों के मंगल प्रवेश और वर्षायोग स्थापना की हर तरफ धूम है। सामान्यत: आज वर्षायोग स्थापना का सीधा संबंध कलश स्थापना से माना जाता है। कहीं एक-दो, कहीं चार-छह, तो कहीं तीन अंकों (सैकड़ों) में कलशों की स्थापना की जा रही है। उत्साह ऐसा है कि आजकल तो इन कलशों की आॅनलाइन बुकिंग भी होने लगी है।
श्रद्धा के इस महासागर के बीच सांध्य महालक्ष्मी समय की मांगानुसार एक गंभीर चिंतन की ओर ध्यान आकर्षित कराना चाहता है। वर्षायोग में आपके यहां जितने भी कलशों की स्थापना हो, उनमें एक कलश ऐसा भी हो, जो हमारे तीर्थों की सुरक्षा के लिए समर्पित हो— जी हां, ‘तीर्थ सुरक्षा कलश’!

124 वर्षों से अनवरत हमारे तीर्थों की सुरक्षा में लगी भारतवर्षीय दिगंबर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी ने यह सार्थक और अनूठी शुरूआत की है, जिसके पुण्यार्जक राशि का शत-प्रतिशत सदुपयोग हमारे प्राचीन दिगंबर जैन तीर्थों, सिद्ध क्षेत्रों, कल्याणक क्षेत्रों और अतिशय क्षेत्रों के जीर्णोद्धार, संरक्षण, संवर्धन और वहां की यात्री सुविधाओं के विकास में सदुपयोग किया जाएगा।

आज तीर्थ सुरक्षा कलश की आवश्यकता क्यों?
आज हमारे तीर्थक्षेत्र कई तरह के संकटों से घिरे हैं। सान्ध्य महालक्ष्मी की नजर में आज इस कलश की आवश्यकता इसलिए है क्योंकि:
बढ़ते खतरे और अवैध कब्जे: कहीं विकास के नाम पर हमारे प्राचीन जिनालय तोड़े जा रहे हैं, तो कहीं जैन समाज की अनुपस्थिति या अकर्मण्यता का फायदा उठाकर हमारे पूज्य स्थलों पर कपड़े डाले जा रहे हैं, सिंदूर लगाया जा रहा है और उन्हें अन्य रूप दिया जा रहा है।

अस्तित्व का संकट:
कहीं अपने ही भाई अज्ञानतावश तीर्थों का मूल रूप बदलने में लगे हैं।
जीर्णोद्धार और सुविधाओं का अभाव: कई अति प्राचीन तीर्थ आज यात्रियों की राह देख रहे हैं, तो कहीं सुविधाओं की कमी के कारण श्रद्धालु पहुंच नहीं पा रहे हैं। इन क्षेत्रों का पुनरुद्धार बेहद जरूरी है।

क्या होगा तीर्थ सुरक्षा कलश से?
वर्तमान में पूरे देश में लगभग 200 स्थानों पर दिगंबर संतों के वर्षायोगों की स्थापना हो रही है। यदि हर वर्षायोग समिति अपने यहाँ कम से कम एक ‘तीर्थ सुरक्षा कलश’ की स्थापना का संकल्प ले, तो इसके दो बड़े दूरगामी परिणाम होंगे:
1. जनमानस में अपने प्राचीन तीर्थों के प्रति सुरक्षा और संरक्षण की भावना अत्यधिक बलवती होगी।
2. तीर्थों के जीर्णोद्धार और विकास के लिए एक समर्पित एवं सशक्त फंड का निर्माण संभव हो सकेगा। आज की यह छोटी सी शुरूआत, कल हमारी संस्कृति और विरासत के संरक्षण में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होगी।

तीर्थ सुरक्षा कलश कहाँ से और कैसे प्राप्त करें?
जैसे वर्षायोग में अन्य कलशों की स्थापना विभिन्न नामों से की जाती है, ठीक उसी तरह ‘तीर्थ सुरक्षा कलश’ को भी सम्मिलित किया जा सकता है। तीर्थक्षेत्र कमेटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बाबू जम्बू प्रसाद जैन के अनुसार, यदि वर्षायोग आयोजक समितियां कमेटी को पूर्व में उचित सूचना देती हैं, तो तीर्थक्षेत्र कमेटी स्वयं ‘तीर्थ सुरक्षा कलश’ की उपलब्धता सुनिश्चित कराने की पूरी व्यवस्था कर रही है।

इस कलश राशि का कहाँ सदुपयोग होगा ?
आयोजक कमेटियों और दाताओं के मन में यह सवाल आना स्वाभाविक है कि इस कलश की सहयोग राशि क्या हो और यह कहाँ जाएगी?

॰ तीर्थक्षेत्र कमेटी के 125वें वर्ष महोत्सव समिति के चेयरमैन जवाहर लाल जैन का कहना है कि तीर्थों की सुरक्षा और पुण्य अर्जन की कोई नियत राशि नहीं होती। प्रत्येक श्रावक अपनी भावना और सामर्थ्य के अनुसार इसमें योगदान दे सकता है। यह राशि सीधे तीर्थक्षेत्र कमेटी के अधिकृत बैंक खाते में जमा होगी। 124 सालों से लगभग 350 प्राचीन तीर्थों की सुरक्षा में निष्पक्ष रूप से लगी कमेटी का यह पूर्ण विश्वास है कि इस राशि का एक-एक पैसा केवल और केवल तीर्थों के जीर्णोद्धार में ही लगाया जाएगा।

यदि वर्षायोग स्थापना के दिन यह कलश स्थापित न हो पाया हो, तो?
चूंकि यह एक नई और अनूठी योजना है, संभव है कि कुछ जगहों पर उचित समय तक जानकारी न मिलने के कारण वर्षायोग स्थापना दिवस पर इस कलश की स्थापना न हो पाई हो। इस शंका का समाधान करते हुए कहा कि:
तीर्थ सुरक्षा की भावना किसी एक दिन की मोहताज नहीं है, यह हर समय प्रत्येक जैन के दिल में धड़कती है। यदि स्थापना दिवस पर यह चूक गया हो, तो आने वाले किसी भी मंगल व विशेष अवसर पर (जैसे- मोक्ष सप्तमी / पारसनाथ निर्वाण महोत्सव, रक्षा सूत्र दिवस या दशलक्षण महापर्व के प्रथम दिवस आदि पर) बोली द्वारा या सर्वसहमति से एक निश्चित राशि के साथ इस ‘तीर्थ सुरक्षा कलश’ को गौरवपूर्वक स्थापित किया जा सकता है।

संपर्क सूत्र :
इस पावन योजना से जुड़ने, कलश मंगवाने या किसी भी प्रकार की जानकारी प्राप्त करने के लिए आप भारतवर्षीय दिगंबर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी के किसी भी आंचलिक कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं अथवा सीधे निम्न नंबरों पर संवाद कर सकते हैं:
शरद जैन (चैनल महालक्ष्मी) 9910690823
मीनू जैन (तीर्थक्षेत्र कमेटी कैम्प आॅफिस) 7078548210

सान्ध्य महालक्ष्मी चिंतन: भारतवर्षीय दिगंबर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी की यह पहल सिर्फ एक वित्तीय सहयोग नहीं, बल्कि हमारी सोई हुई चेतना को जगाने का शंखनाद है। आइए, इस वर्षायोग में अपनी नवग्रह, शांति या साधना कलशों की सूची में एक नाम ‘तीर्थ सुरक्षा कलश’ का अनिवार्य रूप से जोड़ें और अपनी भावी पीढ़ियों के लिए जैन संस्कृति के गौरवशाली प्रतीकों को सुरक्षित रखने का महान पुण्य अर्जित करें।