गिरनार वंदना पर संकट ? बिना आधार कार्ड कैसे होगी दिगंबर मुनिराजों की वंदना!

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21 जुलाई 2026 /आषाढ़ शुक्ल अष्टमी/चैनल महालक्ष्मी और सांध्य महालक्ष्मी/ शरद जैन
एक बहुत ही गंभीर और विचारणीय विषय सांध्य महालक्ष्मी इस समय जैन समाज के सामने खड़ा कर रहा है। गुजरात प्रशासन द्वारा 17 जुलाई (तीर्थंकर श्री नेमिनाथ जी मोक्ष कल्याणक से ठीक 48 घंटे पहले) गिरनार वंदना के लिए आॅनलाइन पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया और इस प्रक्रिया के लिए पहचान पत्र (आधार कार्ड) होना जरूरी है।

लेकिन यहाँ एक बड़ा और संवेदनशील सवाल खड़ा होता है:
हमारे पूज्य दिगंबर संतों के पास कोई भौतिक पहचान पत्र या आधार कार्ड नहीं होता। वे अपरिग्रही हैं, तो फिर हमारे संत गिरनार महातीर्थ की वंदना कैसे करेंगे? क्या उनकी वंदना रुक जाएगी? बड़ा सवाल सांध्य महालक्ष्मी का यही है, क्योंकि प्रशासन द्वारा कोई स्पष्टीकरण का अभी तक इंतजार है।

जैन समाज के लिए चिंतन :
परंपरा बनाम नियम: दिगंबर संत सदियों से स्थापित त्याग और अपरिग्रह की परंपरा का पालन करते हैं। उनके पास न कोई संपत्ति होती है, न कोई दस्तावेज।

अब आस्था पर सवाल:
गिरनार जी हमारा एक सर्वोच्च सिद्धक्षेत्र है। ऐसे में आस्था और प्रशासनिक नियमों के बीच का यह टकराव एक बड़ा सवाल बन चुका है।

चैनल महालक्ष्मी चिंतन :
प्रशासन को जैन संतों की चर्या और परंपराओं को ध्यान में रखते हुए नियमों में विशेष छूट देनी चाहिए। बिना किसी दस्तावेज के, संतों की वंदना को निर्बाध रूप से जारी रखने की व्यवस्था की जानी चाहिए।