आगरा में तीर्थ सुरक्षा संकल्प दिवस : 2030 तक संतों की उपस्थिति में चढ़ेगा 5वीं टोंक पर निर्वाण लाडू – आचार्य श्री सौभाग्य सागर जी

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21 जुलाई 2026 /आषाढ़ शुक्ल अष्टमी/चैनल महालक्ष्मी और सांध्य महालक्ष्मी/ शरद जैन

संतों के सहयोग से तीर्थों की सुरक्षा का होगा जन-जागरण -सुरत्न सागराचार्य
अपने तीर्थों की सुरक्षा के लिये अब हल्ला बोलने का वक्त- मुनि श्री समत्व सागर जी
॰ संगठन को मजबूत करने की जरूरत- जम्बू प्रसाद जैन
॰ शिखरजी में दान अनादिनिधन तीर्थ के लिये भी कीजिए

मरसलगंज गौरव परम्पराचार्य श्री सौभाग्य सागर जी, स्थविर संत सुरत्न सागराचार्य और मुनि श्री समत्व सागर जी के परम सान्ध्यि में रखें, तीर्थकर श्री नेमिनाथ जी के 86724वें मोक्ष कल्याणक दिवस पर आगरा के रामबाग, टोंक रोड स्थित नसियां जी में क्षेत्र की सबसे प्राचीन श्री नेमिनाथ जी की प्रतिमा पर निर्वाण लाडू कार्यक्रम में भारतवर्षीय दिगबंर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी की उपस्थिति में, यह दिन तीर्थ संकल्प दिवस के रूप में मनाया गया।

इस अवसर पर परम्पराचार्य श्री सौभाग्य सागर जी ने कहा कि अगर तीर्थक्षेत्रों को सुरक्षित रखना है तो जितने भी दिगंबर संत है, उनको 8 माह गांव-गांव, शहर-शहर भ्रमण कराओ और फिर 4 महीने जहां आवश्यकता है, उन तीर्थों पर संतों का चातुर्मास तीर्थक्षेत्र कमेटी करायें। अगर उन तीर्थों पर आवश्यक व्यवस्था नहीं है, तो उसके निकट सिटी में करायें, पर इससे क्षेत्र के नाम पर चातुर्मासों में धन का सदुपयोग करें। आज प्रदर्शन नहीं, समर्पण होना चाहिए। आज इस प्रदर्शन के कारण ही तीर्थों से दूर हो रहे हैं।

उन्होंने एक बड़ी बात कहकर पूरे जैन समाज में खुशी की लहर दौड़ा दी, जब गिरनार पर 5 वीं टोंक पर न लाडू चढ़ रहा था, न अर्घ, न जयकारा, तब उन्होंने याद दिलाया मेरु भूषण महाराज के 20 दिन के आमरण अनशन का इधर उनकी समाधि हो गई, उधर सरकार के वायदे की भी। अब साधु संतों का आगे आना होगा, और मैं विश्वास दिलाता हूं कि हम भी गिरनार की यात्रा को जायेंगे, अनेक संत जायेंगे और सब मिलकर 2030 तक वही 5वीं टोंक पर निर्वाण लाडू चढ़ायेंगे, जैसे 2015 तक होता था।

इस तीर्थ सुरक्षा संकल्प दिवस पर स्थविर संत सुरत्ना सागराचार्य जी ने कहा कि आज 5 वीं टोंक पर न लाडू चढ़ा, न जयकारा ऐसी स्थिति क्यों? आज तीर्थ सुरक्षित करना है तो पूरे समाज को एक होकर जागृत होना होगा। आज अफसोस है कि जब तीर्थ सुरक्षित होता है, तो आपके पास समय नही होता, और जब वह निकल जाता है तो आपको समय मिल जाता है।

उन्होंने कहा अभी चैनल महालक्ष्मी के शरद जैन जी से चर्चा हो रही थी सांध्य महालक्ष्मी देखकर कि अब जब आधार कार्ड के साथ गिरनार वंदना के लिये पंजीकरण करना जरूरी हो गया है तो दिगंबर संत कैसे करेंगे वंदना? आज हमारी सोच तो ऐसी हो गई है कि अपने तीर्थां को ही पर्यटन बनाने में लगे हैं और सरकार तो पहले ही इस कोशिश में है।

उन्होंने कहा कि तीर्थक्षेत्र कमेटी ने संकल्प लिया है कि अब संतों के साथ मिलकर जागरण करेंगें। जैसी शरद जी ने जानकारी दी कि तीर्थक्ष्ोत्र कमेटी हर साधु के पास जाकर अनुरोध कर रही है कि जहां भी वर्षायोग हो, वहां तीर्थां के प्रति जागरूकता के लिये आहवान करें। कहते हैं तीर्थक्षेत्र कमेटी ने क्या किया, तो समझ ले आज शिखरजी , गिरनार जी, केसरिया जी, शिरपुर जी आदि के दर्शन कर पा रहे हैं वो इसी की देन है। एक पत्थर शिखर में लगता है वो सबको दिखता है और एक नींव में, जो दिखता नहीं पर पूरा जिनालय उसी पर खड़ा होता है, तीर्थक्षेत्र कमेटी वहीं नींव का पत्थर है।

मुनि श्री समत्व सागरजी ने कहा कि एक वह युग था जब श्रीकृष्ण जी ने सत्य के साथ खड़े होने के लिये कम संख्याबल वाले पाण्डवों का साथ दिया और आज उन्हीं के अनुयायी सत्य की बजाय बहुसंख्य बल के साथ खड़े हो रहे हैं। आज हमारे देश की सरकार जैन ग्रंथों को नहीं स्वीकारती, तो विदेशी मंच पर जायें, वो आज भी निरपेक्ष रूप से स्वीकार करेंगें। भारत का इजिहास प्रमाण है कि जैनों ने किसी के धार्मिक प्रतिष्ठानों पर कभी कब्जा नहीं किया।

उन्होंने कहा कि अब हल्ला बोलना पड़ेगा, आवाज उठानी होगी। मैंने 2016 में आर टी आई से जैन जिनालयों की जानकारी चाही तो जवाब मिला केवल चार जिनालय। आज ‘आरा’ के सभी 50 के लगभग जिनालयों का बिहार संस्कृति पर्यटन विभाग के पास पंजीकृत है, पर ऐसी स्थिति और कहां-कहां है, शायद कहीं नहीं। सरकार के यहां पंजीकरण कराये, कहीं किसी और जिनालय की गिरनार जैसी स्थिति न हो। ध्यान रखना होगा जिनालयों के नव निर्माण में फूल पत्ती न बनवायें, उनकी जगह पिच्छी कमण्डलु बनवायें, दिवारों, शिखरों पर तीर्थंकरों की खड्गासन प्रतिमायें उकेरें। बाडंड्री में ‘यह दिगंबर जिनालय है’ ऐसी प्लेटें डालें, जिनका कुछ हिस्सा बाहर दिखे। वेदी पर अष्ट मंगल, तीर्थंकर के 16 स्वप्न दिगम्बर आमनाओं के अनुरूप में ही बनवायें। 2021 में मैने इसी सुरक्षा के लिये कम्प्यूटर द्वारा ताड़ पत्रों पर लेखन शुरू कराया, जिसकी आयु 2000 वर्ष से ऊपर होती है। रिकार्डों का डिजलिटाइज करें। इसके लिये जागरूकता के लिये उन्होंने चैनल महालक्ष्मी को जिम्मेदारी उठाने के लिये कहा।

तीर्थक्षेत्र कमेटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जम्बू प्रसाद जैन जी ने कहा कि हम जैन आपस में लड़ रहें हैं, संगठन कमजोर हो गया है। ऐसे ही चला तो 60-70 साल बाद जैनों का नाम लेने वाला कोई नहीं बचेगा। आपसी झगड़े मिटाकर समन्वय की ओर बढ़े। जातियों में नहीं बांटे, जैन रहिये और अपने नाम के पीछे जैन जरूर लिखिये। पंथवाद-संतवाद पर अब विराम लगाने की आवश्यकता है।

शिखर जी तीर्थ के लिये क्या दान दिया?
इस खचाखच भरी धर्म सभा में एक सवाल ने सभी उठे हाथों को नीचे करने को मानो मजबूर कर दिया। कौन-कौन शिखर जी वंदना करने जाते हैं और दान कहां देकर आते हैं, 90 फीसदी के हाथ खडे हो गये। 10-20 हजार रुपये शिखरजी में जाने, ठहरने, खान-पीने की सुविधायें और दान देने में खर्च करने वालों से अगला सवाल था कि शिखरजी तीर्थ यानि पर्वत के लिये आपने क्या दान उसका संवर्धन, संरक्षण करने के लिये जिम्मेदार, तीर्थक्षेत्र कमेटी को दिया? उठने वाले हजार से ज्यादा हाथो में से चार पांच ही रह गये, बाकी सब नीचे। सभा के संयोजक मनोज बाकलीवाल ने स्पष्ट किया कि आप जहां ठहरते है वहीं दान देते हैं और समझते हैं कि आपने सम्मेद शिखरजी पर्वत के लिये दान दिया। आपने दान दिया अच्छी बात है, पर वो उस कोठी, धर्मशाला की दीवारों से बाहर नहीं जाता। दान आपको शिखरजी तीर्थक्षेत्र कमेटी के कार्यालय में जमा कराना चाहिये, जिसका आफिस विमल सागर समाधि के साथ और बीसपंथी कोठी के सामने है। उस कार्यालय में जमा करायें, दान राशि तो क्यू आर कोड स्केन करके, सीधे तीर्थक्षेत्र कमेटी के बैंक खाते में सीधे जमा करा सकते हैं। इसका सदुपयोग तीर्थों की सुरक्षा संवर्धन में होता है।

इसी तरह गौतम गणधर स्वामी व पारस टोंक पर रखी दिगम्बर भारतवर्षीय दिगंबर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी की गुल्लक में भी दान राशि डाली जा सकती है। पारस टोंक के नीचे तीर्थक्षेत्र कमेटी के कार्यालय में भी जमा करा सकते हैं।

इस अवसर पर आज जैन परिषद के अध्यक्ष श्री जगदीश प्रसाद जैन के साथ पूरी कमेटी, तीर्थक्षेत्र कमेटी के शतकोत्तर रजत वर्ष कमेटी के चेयरमैन जवाहरलाल जैन, चैनल महालक्ष्मी आदि भी उपस्थित थे। मंच संचालन मनोज बाकलीवाल जी ने बखूबी किया।