28 फरवरी 2026 / फाल्गुन शुक्ल दवादिशि /चैनल महालक्ष्मी और सांध्य महालक्ष्मी/ शरद जैन
राजस्थान के गंगापुर सिटी के आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर के फर्जी दस्तावेजों से जायदाद पर नगर परिषद से पट्टा हासिल कर लिया। यह तब था कि मंदिर के नाम पूरे दस्तावेज थे। मंदिर की दुकान जिसको बरसों से मंदिर से ही बिजली दी जा रही थी। अब अलग मीटर लगवाने के लिये जब बिजली विभाग के लोग आये, तो पड़ोसी ने दस्तावेज से अपना कब्जा बताया। तब मंदिर अध्यक्ष प्रवीण गंगवाल ने तुरंत कार्यवाही कर, न केवल मूल कागज नगर पालिका में दिखाये और आंदोलन की बात कही। पड़ोसी ने अपने फर्जी दस्तावेज बनवाये और दो गवाह के शपथ दिलवा कर पट्टा संख्या 663 दिनांक 04 मई 2022 क्रमांक 2021-22 / 66628 पट्टा प्राप्त कर लिया। जबकि यह मंदिर देव स्थान विभाग राजस्थान, जयपुर में पहले ही पंजीकृत है।

इस मंदिर के साथ की दो दुकानें 18Ÿ17 फीट की दो मंजिला बनी हुई हैं। भूतल वाली दुकान पर प्रकाश चंद पल्लीवाल 17 मई 1963 से किराये पर हैं और ऊपर की मंजिल पर मंदिर का कर्मचारी रहता है। इन दुकानों का ब्यौरा टामा सर्वे रिपोर्ट में सफा पृष्ठ नं. 38 पर क्रम संख्या 1394 पर जैन मंदिर के नाम पर दर्ज है, यही नहीं नक्शा मिलान शीट नं. 93 में भी खसरा नं. 1399 पर पृथक रूप से लिखा है। यानि मंदिर की इन दुकान की जमीन का किसी और के नाम पर नहीं है।

अब दशकों से बिजली मंदिर से दिये जाने के बाद मंदिर कमेटी ने अलग मीटर के लिये आवेदन किया, तो वहां मीटर लगाने आये बिजली विभाग के कर्मचारियों को पड़ोसी ने अपने कागज दिखाकर वापस लौटा दिया, तब मन्दिर कमेटी चौंक गई। जब सारे कागज दिखा दिये, तो नगर परिषद में व्याप्त भ्रष्टाचार स्पष्ट दिखा। फिर दबाव बना और पड़ोसी ने फर्जी कागज वापस जमा कराये और 04 फरवरी को नगर परिषद ने अखबार में सार्वजनिक सूचना नगर आयुक्त द्वारा छपवाई कि अमुक व्यक्ति अवैध कब्जे के कागज वापस करे और उनका कही दुरुपयोग न हो।

इस बारे में पूरी जानकारी चैनल महालक्ष्मी के एपिसोड नं. 3625 में देख सकते हैं।

चैनल महालक्ष्मी चिंतन : यह एक ऐसा नमूना है जो साफ दर्शाता है प्रशासन में व्याप्त भ्रष्टाचार को और कैसे कोई झूठे शपथ पत्रों के साथ ही सम्पत्ति के भी कागज बनवा लेता है। दूसरी बात यह भी कि कमेटियों की जागरूकता बहुत जरूरी है। मंदिर के दस्तावेज पूरे रखें व प्रशासन के पास पूरे दर्ज हो, जिनको छोटे-छोटे अंतराल पर चैक जरूर करते रहें।















