27 वर्षों में दिगंबर संतों की कैसे घटी-बढ़ी संख्या ॰ गत 3 वर्षों से लगातार बढ़ रही दीक्षायें, समाधि, नये पद

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12 अक्टूबर 2026 / अश्विन शुक्ल द्वितीया /चैनल महालक्ष्मी और सांध्य महालक्ष्मी/ शरद जैन
॰ 27 वर्षों की लगातार वर्ष दर वर्ष गणना केवल सान्ध्य महालक्ष्मी द्वारा
॰ पिछले 27 वर्षों में आचार्य ढाई गुना, मुनि सवा दो गुणा, ऐलक दो गुणा, क्षुल्लक ढाई गुणा, क्षुल्लिकायें साढ़े पांच गुणा हुई।
॰ मुनिराजों से ज्यादा आर्यिकायें, क्षुल्लकों से ज्यादा क्षुल्लिकायें
॰ एक समय भद्रबाहु स्वामी के साथ 24 हजार दिगंबर साधु थे, आज कुल 2000 भी नहीं, वहीं बाद में अकाल के कारण वस्त्र धारण करने वाले श्वेताम्बर साधु आज साढ़े बाईस हजार के पार।
॰ पहली बार एक ही दिन में एक ही आचार्य द्वारा 7 आचार्य पद, 9 गणिनी आर्यिका पद।
॰ आशा है 2026-27 में दिगम्बर संत गणना 2000 के पार होगी।

वर्तमान में दिगम्बर संतों की अनुमानित संख्यायें –
॰ आचार्य श्री 124
॰ उपाध्याय श्री 30
॰ मुनि श्री 610
॰ गणिनी आर्यिकाएं श्री 83
॰ आर्यिका माता श्री 640
॰ ऐलक श्री 52
॰ क्षुल्लक श्री 191
॰ क्षुल्लिका माता श्री 254
कुल दिगंबर संत 1984

27 वर्षों में ढाई गुणे के पार हुए दिगंबर संत
इस चार्ट में आचार्य में 2 पट्टाचार्य, 1 गणधराचार्य, 1 गणाचार्य शामिल है
उपाध्याय में 3 बालाचार्य, 5 एलाचार्य, 1 आचार्यकल्प शामिल है।
मुनि में 2 स्थविर, 1 गणधर, 2 प्रवर्तक, 1 पाठक, 13 निर्यापक श्रमण शामिल है।
नोट: उपरोक्त चार्ट में हर वर्ष चातुर्मास से चातुर्मास तक की संख्या है।

दिगंबर संत बढ़ रहे, अब जैनों की गिनती भी करनी सही
सवाल यही है कि जब पिछले 27 सालों में दिगंबर संतों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ते हुए 790 से 1983 तक पहुंच गई, जबकि भद्रबाहु स्वामी के समय यही 24 हजार थी, वहीं जैनों की संख्या एक समय 40 करोड़, फिर अकबर काल में 4 करोड़ और 2011 की सरकारी गणना में 44,51,753 रह गई, पर अब 2027 जनगणना का दूसरा चरण है, इसमें हमें धर्म के कॉलम में ‘जैन’ लिखकर अपनी वर्तमान की सही गणना सामने लानी है।

दिगंबर संतों की गणना घट कर अब 5 फीसदी बढ़ी
पिछले 27 वर्षों में 2008, 2016, 2019, 2020 और फिर 2025 में यानि 5 बार पिछले वर्ष से दिगंबर संतों की संख्या घटी। पिछली सदी के शुरू में, या कहें 1132 वर्ष पहले भी कई दिगंबर संत थे, पर तब विहार वस्त्रों के घेरे में सीमित रूप में होता था। तब आज की तरह सार्वजनिक रूप से दिगंबर रूप में नहीं विहार नहीं होता था, फिर 3 संतों ने दिगंबरत्व की परम्परा शुरू की और आज भी वही 3 परम्परायें आगे चल रही हैं।

आचार्यों की गणना 50 से 124 – इन 27 वर्षों में
गत सदी में 1913 में सबसे पहले दीक्षा मुनि कुंजर आदिसागर अंकलीकर जी ने, जिनके वर्तमान में चतुर्थ पट्टाचार्य हैं आचार्य श्री सुनील सागरजी, वहीं 1920 में चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शांतिसागर जी ने दीक्षा ली और 1924 में आचार्य बने, अब उस परम्परा में सप्तम् पट्टाचार्य आचार्य श्री वर्धमान सागरजी है, वहीं इसी परम्परा में तीसरे आचार्य शांतिसागरजी (छाणी) थे, जिस परम्परा में वर्तमान में सप्तम् पट्टाचार्य ज्ञेय सागरजी हैं।
एक वर्ष में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी 13 आचार्य 2007 में रही, वहीं 2015 और 2025 में 12-12 आचार्य पद पर बढ़ोतरी रही। 11 फरवरी 2026 को णमोकार तीर्थ पर आचार्य श्री देवनंदी जी ने एक बार में अधिकतम 7 को आचार्य पद दिया। इस आचार्य पद की गिनती में जैसा चार्ट में देख रहे हैं, गिनती में बढ़ा उतार-चढ़ाव रहा है। पिछले 2 वर्षों से 112 की गिनती इस बार सर्वाधिक 124 तक पहुंच गई है।
इसी आचार्य पद में 2 पट्टाचार्य, 1 गणधराचार्य व एक गणाचार्य भी शामिल हैं।

उपाध्याय पद – मिटता, पर अब 30
27 वर्ष पूर्व 22 और आज 30, केवल इस चतुर्थ परमेष्ठी की बढ़ोतरी की रफ्तार सबसे धीमी है। 2022 में तो यह गिनती 15 ही रह गई, पर फिर 2024 में पथरिया में आचार्य श्री विराग सागर ने कुछ को उपाध्याय पद देकर इस संख्या को मजबूत किया। वर्तमान की 30 की अधिकतम संख्या 16 वर्ष पहले 2010 में भी 30 थी। इस 30 की गणना में 3 बालाचार्य, 5 एलाचार्य, एक आचार्यकल्प शामिल है। यह गणना स्पष्ट संकेत देती है कि पिछले डेढ़ दशक में मुनि श्री से सीधे आचार्य श्री बनने को ज्यादा महत्व दिया जा रहा है। अगर सिर्फ उपाध्याय पद देखें, तो 2021 में मात्र 7 रह गई थी।

चार वर्ष पूर्व निर्यापक श्रमण पद की शुरूआत
निर्यापक श्रमण पद की शुरूआत 2022 में संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी ने की, जब उन्होंने 13 निर्यापक श्रमण बनाये। इनकी गणना मुनि श्री में शामिल की गई है।

मुनिराजों-आर्यिकाओं में कम, क्षुल्लक-क्षुल्लिकाओं में बढ़ा अंतर
गत वर्ष में पहली बार क्षुल्लक संख्या में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई यानि 2025 व 2026 में 191 ही रही, जो 2024 के अधिकतम 230 से काफी कम है, वहीं क्षुल्लिकायें 233 से 256 हो गई, जो अब तक की अधिकतम संख्या है। इस वर्ष वहीं मुनिराजों और आर्यिकाओं के बीच अंतर कम हुआ, कारण मुनिराजों की अपेक्षाकृत बढ़ती संख्या में जहां आर्यिकाओं में 8 की वृद्धि हुई, वहीं मुनिराजों में 57 की बढ़ोतरी हुई। गणिनी आर्यिकाओं में एक ही दिन में एक ही स्थान पर 9 के बनने से णमोकार तीर्थ पर 11 फरवरी 2026 को अनोखा रिकॉर्ड बना।

अब मुनि आदि आर्यिकाओं आदि से आगे निकले
पिछले 27 वर्षों में महिला दिगंबर संतों की गिनती सदा आगे रही है, पर अब 972 के मुकाबले 1007 है यानि आचार्य 124, उपाध्याय 30, मुनिराज 610, ऐलक 52 व क्षुल्लक 191 है, वहीं गणिनी आर्यिकायें 83, आर्यिकायें 640 तथा क्षुल्लिकायें 274 हैं।

गत तीन वर्षों में दीक्षा, समाधि व पदों का बढ़ता क्रम
पिछले तीन वर्षों 2024 से 2026 के आंकड़ें देखे तो 139, 159 और इस बार 184 सर्वाधिक दीक्षायें हुई यानि अब तक किसी वर्ष में सबसे ज्यादा दीक्षायें 2025-26 में हुई, इसी क्रम में समाधि भी सर्वाधिक 82 हुई। 2024 में 70 व 2025 में मात्र 47 हुई, इस बार अधिकतम 21 नये पद दिये गये, 2024 में 8 व 2025 में 3 नये पद दिये गये थे।

माह अनुसार दीक्षाओं की संख्या इस प्रकार रही। सन् 2025 के चातुर्मास से जुलाई में 7, अगस्त में 4, सितम्बर में 25, अक्टूबर में 19, नवम्बर में अधिकतम 50, दिसम्बर में 7 हुई। इस 2026 में जनवरी में 10, फरवरी में 44, मार्च में 3, अप्रेल में 20, जून में 3, जुलाई में चातुर्मास स्थापना तक 10 दीक्षायें दी गर्इं।
इस वर्ष पदोन्नति में 9 आचार्य पद, 2 निर्यापक श्रमण, 1 स्थविर, 1 सिद्धांत वारिधि व 8 गणिनी आर्यिकायें पद पर घोषणायें हुर्इं।

श्वेताम्बर साधु बाद में हुए 11 गुणा ज्यादा
आज जहां दिगम्बर संतों की संख्या अभी 2000 भी नहीं हुई, वहीं श्वेताम्बर साधुओं की संख्या 22, 500 के पार है। आचार्य भद्रबाहु के समय उनके साथ 24 हजार दिगंबर संत थे, जिनमें से 12 हजार दक्षिण में चले गये, शेष 12 हजार यहीं रह गये, जिन्हें अकाल जैसी आपदा के कारण वस्त्रों का धारण कर श्वेताम्बर रूप धारण करना पड़ा। उसके बाद दिगंबर संतों की संख्या में 8वीं-नवीं सदी से कमी आने लगी और 20वीं सदी में बहुत कम हो गई। श्वेताम्बर साधुओं की बढ़ती संख्या का कारण दिगम्बरत्व में कठिन तपस्या-चर्या, ज्यादा परिषह है, जिस कारण 11 गुणा का अंतर है। वहीं दिगंबर समाज में 10-15 तक एक साथ दीक्षायें देखी जाती है, वहीं श्वेताम्बर समाज में एक बार में 50 से 75 तक भी होती हैं।