जनगणना 2027 का दूसरा फेज शुरू , धर्म जैन है, जाति नहीं – इसका रखें विशेष ध्यान

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॰ 17 अगस्त से चार राज्यों के बर्फीले प्रदेशों में स्वजनगणना शुरू
॰ 40 प्रश्नों में से 9, 10, 14 प्रश्न पर विशेष ध्यान

19 अगस्त 2026 /श्रावण शुक्ल सप्तमी /चैनल महालक्ष्मी और सांध्य महालक्ष्मी/ शरद जैन
भारत सरकार द्वारा जनगणना 2027 के दूसरे चरण की घोषणा कर दी गई है। 14 अगस्त को जारी अधिसूचना के तहत 17 अगस्त से जनगणना की प्रक्रिया (विशेषकर बर्फबारी वाले राज्यों- जम्मू कश्मीर, उत्तराखंड, हिमाचल और लद्दाख में) शुरू हो रही है।
इस जनगणना के दूसरे चरण में कुल 40 प्रश्न पूछे जाएंगे। जैन धर्म की सही पहचान और अस्तित्व को मजबूती देने के लिए हम सभी को 3 विशेष प्रश्न क्रमांक 9, 10 और 14 भरते समय विशेष सावधानी रखनी है।

इन 3 प्रश्नों पर दें विशेष ध्यान : 9, 10, 14
1. प्रश्न 9 : धर्म
॰ क्या लिखें : धर्म के कॉलम में ‘जैन’ लिखें।
॰ ध्यान दें : हमारा धर्म ‘जैन’ है, इसे स्पष्ट रूप से दर्ज कराएं।

2. प्रश्न 10: जाति / वर्ग
॰ अनुसूचित जाति (रउ): जनगणना विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सान्ध्य महालक्ष्मी को बताया कि कॉलम में कोई भी गलत टिक न करें। गलत जानकारी देने से आपका नाम ऊपर जैन धर्म की सूची से हट सकता है।
॰ सराक बंधु: सराक समाज के बंधु अनुसूचित जनजाति वाले कॉलम में टिक करके अपनी पहचान ‘सराक’ दर्ज करें।
॰ जाति (उं२३ी) ‘जाति’ वाले कॉलम में ‘जैन’ मत लिखें, क्योंकि ‘जैन’ हमारा धर्म है (जैसे हिन्दू, मुस्लिम, सिख आदि धर्म हैं) जाति में जैन समाज की 84 जातियों में से अपनी सही जाति दर्ज करें, जैसे – खंडेलवाल, पोरवाल, ओसवाल, अग्रवाल, परवार आदि। सान्ध्य महालक्ष्मी ने उन अधिकारी से कहा कि हमारे कुछ संत, विद्वत संत जाति में भी ‘जैन’ लिखने को कह रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि हिंदू मुस्लिम, सिख, ईसाई, फारसी की तरह जैन भी सिर्फ धर्म है, जाति नहीं। आशंका यह है कि हमने जैन जाति लिखना शुरू कर दिया तो कहीं हिंदू की एक शाखा मानकर सरकार उसी में शामिल न कर दे।

3. प्रश्न 14 : मातृभाषा एवं अन्य भाषाएं
॰ मातृभाषा: इसमें अपनी क्षेत्रिय भाषा या मातृभाषा लिखें। जैसे – हिंदी, गुजराती, मराठी आदि।
॰ अन्य भाषाएं: इस कॉलम में प्राथमिकता के आधार पर ‘प्राकृत’ अवश्य लिखें।
॰ प्राकृत क्यों जरूरी है? प्राकृत भाषा में ही हमारे तीर्थंकरों और आचार्यों की मूल वाणी व ग्रंथ रचित हैं। ‘प्राकृत’ कराने से हमारी संस्कृति और धरोहर को आधिकारिक पहचान और सरकारी संरक्षण मिलेगा।

बस 40 प्रश्नों में क्रमश: 9, 10, 14 पर विशेष ध्यान रखें और स्व जनगणना में अपनी भागीदारी जरूर निभायें:-
॰ धर्म : जैन
॰ जाति: अपनी संबंधित जाति (खंडेलवाल, पोरवाल आदि)
॰ अन्य भाषा: प्राकृत
अभी 17 से 31 अगस्त 4 राज्यों – उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर व लद्दाख के बर्फीले प्रदेशों में यह दूसरे फेस की जनगणना हो रही है। 30 सितंबर तक जनगणना अधिकारी घर-घर आयेंगे इन प्रदेशों में।

समाज के हर सदस्य तक यह संदेश पहुंचाए: यह हमारी सांस्कृतिक पहचान, अस्तित्व और अधिकारों से जुड़ा विषय है। स्वयं भी जागरूक रहें और अपने आसपास के सभी जैन परिवारों को भी इसके प्रति सचेत करें। इस बारे में अधिकृत – जानकारी के लिय आप सान्ध्य महालक्ष्मी के व्हाट्सअप नं. 9910690825 पर सम्पर्क कर सकते हैं, इसकी पूरी जानकारी चैनल महालक्ष्मी के एपिसोड नं. 3811 में भी देख सकते हैं।