जैनों की जीत : भूगर्भ से निकली प्रतिमा बुद्ध नहीं, तीर्थंकर मुनिसुव्रतनाथ की-प्रतिमा पुलिस के मालखाने में, कब मिलेगी जैनों को

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॰ एएसआई ने जांच कर विवाद को किया समाप्त, जैन प्रतिमा बताई
॰ प्रतिमा पुलिस के मालखाने में, कब मिलेगी जैनों को
24 जून 2025 / आषाढ़ कृष्ण चतुर्दशी /चैनल महालक्ष्मीऔर सांध्य महालक्ष्मी/ शरद जैन /

शुक्रवार 20 जून को उत्तर प्रदेश के एटा जिले के रिजोर में टीले पर आर आर सेंटर की खुदाई के दौरान लगभग 4 फीट ऊंचाई की सुंदर प्रतिमा निकली। उसमें श्रीवत्स चिह्न, नासा दृष्टि, बायें हाथ पर दाये हाथ के साथ ध्यान मुद्रा, घुंघराले बाल, लंबे कान, पाषाण का आभा मण्डल, मस्तक के दोनों तरफ गज और उनको उठाते श्रावक-श्राविका, हां ऊपर का तीन स्तर का छत्र अलग हो गया था। गांव में मूर्ति निकली, जगंल में आग की तरह बात हर तरफ फैल गई। आसापस के गांव में ज्यादा जैन परिवार नहीं हैं। स्पष्ट रूप से वह दिगंबरत्व रूप की तीर्थंकर प्रतिमा ही दिख रही थी, पर उधर से बौद्ध मतवाले उसे अपनी प्रतिमा का दावा लेकर आ गये। पुलिस ने विवाद के चलते प्रतिमा अपने कब्जे में लेकर पुरातत्व विभाग को सूचित कर दिया।

रविवार को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) टीम आगरा से वहां जांच करने वहां पहुंची। दोपहर साढ़े बारह बजे पहुंची टीम ने उस प्रतिमा पर कछुए के चिह्न को देखकर उसे जैन तीर्थंकर प्रतिमा कहकर पुलिस के सुपुर्द कर दिया। प्रतिमा थाने में है। जैन समाज के लोग डीएम प्रेम रंजन सिंह से मिलकर प्रतिमा सौंपे जाने की मांग कर चुके हैं। अब यह प्रतिमा कब तकजैन समाज से दूर थाने के मालखाने में रहेगी, यह नहीं कहा जा सकता।

चैनल महालक्ष्मी चिंतन : धरा से निकले या जल की धारा के बीच मिले, 90 फीसदी प्रतिमायें दिगंबर स्वरूप में तीर्थंकर प्रतिमायें ही निकलती हैं और उनमें से कई बार उनके कई दावेदार सामने आ जाते हैं। अगर जैन चौकस, सावधान, सजग नहीं रहे, तो हमारी अनमोल संस्कृति को लुटने, बदलने से बचाने के लिए कोई बाहर से नहीं आयेगा। जो स्वयं हिम्मत करता है, उसी का साथ देने ही कोई आता है। बस जागते रहो।