जैन नहीं जनगणना के प्रति जागरूक ॰ दिल्ली NDMC में एक फीसदी जैनों ने भरी स्व जनगणना

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॰ यही हाल उत्तराखंड, म.प्र., छत्तीसगढ़, बिहार आदि में भी

॰ सोशल मीडिया में आज भी गलत भ्रामक पोस्टों की बाढ़
॰ अगर इस बार भी सही गणना नहीं, तो आने वाला भविष्य अंधकारमय
22 अप्रैल 2026 /बैसाख शुक्ल षष्ठी/चैनल महालक्ष्मी और सांध्य महालक्ष्मी/

जैनों की 2011 की सरकारी जनगणना की आफीशियल गिनती 44,51,753 को हर बार गलत करार देने वाला समाज दावा तो 2 से 3 करोड़ की करता है, पर जब सही गिनती दिखाने की बात आती है, तो वहीं ढाक के तीन पात।

अभी हाल में दिल्ली में एक से 15 अप्रैल तक स्वजनगणना का अवसर मिला, जिसमें NDMC क्षेत्र में तो अब दोबारा यह सुविधा नहीं मिलेगी। एमसीडी क्षेत्र में जरूर 1 से 15 मई का मौका मिलेगा।
चैनल महालक्ष्मी को इस क्षेत्र से जानकारी लेने के बाद यह कहने में संकोच नहीं है कि एक फीसदी ने भी स्वजनगणना में भाग नहीं लिया और 16 से जनगणना अधिकारियों ने घर-घर जाना भी शुरू कर दिया। इस दौरान सरकार प्रशासन के द्वारा जागरूकता के लिए प्रचार-प्रसार किया गया। वहीं जैन मंदिरों में इसके लिये न कोई जागरूकता, न कार्यशालायें लगाई गई, जैसे जनगणना में आम जैनों को कोई इंटरेस्ट ही नहीं।

10 अप्रैल से उत्तराखंड में भी स्वजनगणना शुरू हो गई, आप तक ये खबर पहुंचने तक खत्म भी हो जाएगी। 16 अप्रैल से म.प्र., छत्तीसगढ़, आंध्रप्रदेश, हरियाणा, चंडीगढ़ आदि में भी शुरू हो गई। 17 अप्रैल को आचार्य श्री विशुद्ध सागरजी के सान्निध्य में चल रहे पंचकल्याणक के दौरान मंच से जब इसके बारे में जागरूकता और स्वजनगणना में चैनल महालक्ष्मी के द्वारा फार्म भरने की बात पूछी, तो अफसोस कि एक ने भी हाथ स्वीकृति में ऊपर नहीं किया। बिहार में भी 17 अप्रैल को शुरू हो चुकी है।

जनगणना के ये आंकड़ें भविष्य में कल्याणकारी योजनायें व सरकारी सुविधाओं के लिये आधार बनते हैं।
इस बारे में पूरी जानकारी चैनल महालक्ष्मी के एपिसोड नं. 3682 में देख सकते हैं।

चैनल महालक्ष्मी चिंतन: अब वक्त आ गया है, जब जैन समाज की सही संख्या सामने आ सके और सही गणना हो, इसके लिये स्वजनगणना रूपी हथियार आपके पास ही है, इसका सदुपयोग अगर न किया, तो हमारी ही बड़ी भूल है। लोकतांत्रिक भारत में जनसंख्या का बहुत महत्व होता है। यही जनगणना का आधार हर समाज की नीतिगत भागीदारी, सरकारी योजनाओं, अधिकारों को प्राप्त करने के लिये महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। बार-बार जैन समाज सरकार से मांग करता है, पर जब तक सही गणना ही नहीं हुई, तो लाभ तो दूर, प्रतिनिधित्व, सामाजिक स्तर पर हानि भी उठानी पड़ सकती है। जागिये और स्वजनगणना में अपनी भागीदारी की जिम्मेदारी निभाइये।