बेलगछिया – जहां रोज होता एक दिन का चातुर्मास ॰ तीर्थक्षेत्र कमेटी के साथ होगा 25 मंदिरों का जीर्णोद्धार- आचार्य प्रमुख सागर

0
1028

27 अगस्त 2025 / भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी /चैनल महालक्ष्मीऔर सांध्य महालक्ष्मी/ शरद जैन /
79वें स्वतंत्रता दिवस और जन्माष्टमी के अवसर पर चैनल महालक्ष्मी पहुंची तीर्थक्षेत्र कमेटी के अध्यक्ष जम्बू प्रसाद जैन जी के साथ कोलकाता के बेलगछिया दिगम्बर जैन मंदिर में, जहां 13 पिच्छी के साथ अपना 25वां चातुर्मास कर रहे हैं आचार्य श्री प्रमुख सागरजी। सन् 2022 में श्री सम्मेदशिखरजी, 23 में गुवहाटी, 24 में डीमापुर और अब 25 का 25वां वर्षायोग कोलकाता में।
वि.स. 1878 का अंग्रेज काल में निर्मित बेलगछिया मंदिर, जहां सांची के द्वारों की एक छवि प्रदर्शित करता है, वहीं मुख्य मंदिर में चारों कोनों पर चार शिखर अनंत चतुष्टय और बीच में 5 शिखर पंच परमेष्ठी के प्रतीक हैं। 81 फीट का श्वेत मानस्तम्भ, जिसमें नीचे श्यामवर्ण की और ऊपर श्वेत वर्ण की पद्मासन पारस प्रभु प्रतिमायें हैं, उसके बायें-दायें, दो-दो वेदी हैं, जिनमें क्रमश: तीर्थंकर श्री आदिनाथ, शान्तिनाथ, नेमिनाथ व महावीर स्वामी की पद्मासन प्रतिमायें हैं।

मूल मंदिर में विक्रम सं. 1878 की पद्मासन नयनाभिराम श्वेत पाषाण की प्रतिमा तथा उसी का छोटा रूप बायीं वेदी में विराजमान है। बायीं वेदी का जीर्णोद्धार कार्य चलने से उसे पीछे मन्दिर की खाली वेदी में विराजमान किया गया है, जिसका उपयोग भादों के महीने में विधान आदि कार्यक्रमों के लिये किया जाता है, तब एक प्रतिमा मूल मंदिर से लाकर यहां विराजित की जाती है। कोलकाता में वैसे तो 30 के लगभग मंदिर हैं, जिनमें से 11 बड़े मंदिर हैं।

चार मास का चातुर्मास यहां एक अनोखे रूप में मनाया जा रहा है, आजकल अनेकों जगह साधु के चातुर्मास कराने में संकोच करने लगे हैं, उनको पुन: नि:संकोच कराने की धारा में जोड़ने के लिए आचार्य श्री प्रमुख सागरजी ने एक नई शुरूआत की है कि रोजाना एक परिवार द्वारा चातुर्मास यानि एक दिन का चातुर्मास। यह लोगों में हिम्मत देगा कि आज एक-एक दिन, फिर पूरे चार माह का चातुर्मास करा सकें। इस एक दिन के चातुर्मास में सौभाग्यशाली परिवार द्वारा प्रात: अभिषेक, शांतिधारा, विधान, वात्सल्य भोज, आहार, आरती आदि सभी कार्यक्रमों को कराने का अवसर प्राप्त होता है। संभवत: यह अनूठी पहल पहली बार की गई। साथ ही यहां रोजाना 5-10 परिवार विधान कराते हैं, जिनके बीच में आचार्य श्री के प्रवचन होते हैं।

चैनल महालक्ष्मी ने आचार्य श्री से गत तीन वर्षों के पूर्वोत्तर क्षेत्रों में विहार आदि पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि इन क्षेत्रों में दिगम्बर संतों का कम विहार होता है, जबकि वहां पर लोग उनके दर्शन के लिये लालायित रहते हैं। समाज संतों के विहार में प्रशासन द्वारा समुचित सुरक्षा की व्यवस्था करे, तो इधर भी दिगम्बर संत महती प्रभावना कर समाज को लाभान्वित कर सकते हैं। उत्तर व पश्चिमी भारत से आकर यहां हजारों परिवार बसे हैं व आर्थिक रूप से मजबूत हैं।

उन्होंने कहा कि उन्हें राजकीय अतिथि सरकार द्वारा बनाया गया, तो उनके विहार में 50 से 100 पुलिस वाले साथ चलते थे और वे पुलिस वाले उनके साथ चलकर अपने को धन्य मानते थे, एक ने कहा कि कहां नेताओं के आगे-पीछे घूमना और कहां जैन संतों के साथ, उसे ऐसा आशीर्वाद मिला कि साधारण पुलिसकर्मी से आज वह डीआईजी हो गये। अनेक अजैन परिवारों ने अभक्ष्य त्यागा। गोलाघाट के गुड्डू प्रसाद वर्मा के पूरे परिवार ने न केवल अभक्ष्य छोड़ा, बल्कि राष्ट्रीय राजमार्ग 39 के रंगाजान गांव की अपनी हनुमान ट्रांसपोर्ट कम्पनी का कार्यालय जैन संत भवन के रूप में समर्पित कर दिया सदा के लिये तथा उधर से विहार करने वाले संतों के बड़े संघों के ठहरने की भी पूरी व्यवस्थायें कर दी। आचार्य श्री का संघ भी आते-जाते 3 रातें वहीं ठहरे। एक अन्य संत भी वहां उके बाद ठहर चुके हैं।