धर्मस्थल षड्यंत्र पर्दाफाश! ॰ डॉ. वीरेन्द्र हेगड़े की छवि धूमिल करने और धर्मस्थल कब्जाने की थी क्या साजिश?

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॰ सैकड़ों शव दफनाने वाला आरोपी ही गिरफ्तार
॰ अपनी बेटी के गायब होने, यौन शोषण के बाद हत्या का आरोप लगाने वाली महिला का बड़ा झूठ बेनकाब
॰ क्या इस षड्यंत्र की बड़ी मछलियां अभी भी पकड़ से दूर

27 अगस्त 2025 / भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी /चैनल महालक्ष्मीऔर सांध्य महालक्ष्मी/ शरद जैन /
हां, वह तारीख थी 11 जुलाई, जब पूरी तरह से काले कपड़े पहने और आंखों पर सिर्फ एक पारदर्शी पट्टी से ढका 45 वर्षीय नकाबपोश बेल्थागडी की स्थानीय अदालत में अपना बयान दर्ज कराने, हाथों में इंसानी खोपड़ी को बोरी में लपेटे पहुंचा। दावा किया कि 12 साल छिपने के बाद, अत्यंत प्रतिष्ठित जैन धर्मस्थल मंदिर में सफाई कर्मचारी के रूप में कार्य किया। पर 2014 से अब तक उसने कहा, ‘मैं जो मानसिक यातना झेल रहा था, वह असहनीय हो गई थी। फिर चंद दिनों के बाद एक महिला ने, अपनी युवा बेटी के गायब होने की बात कही। तब मंदिर के पर्यवेक्षकों से जुड़े एक व्यक्ति ने उनके ही परिवार से यौन उत्पीड़न किया, बस फिर वह वहां से भागने को मजबूर हो गया।’ दिसम्बर 2014 में वह नकाबपोश अपने परिवार के साथ धर्मस्थल से भाग गया, क्योंकि उसको पता था कि लाशों को दफनाने का सिलसिला उसने रोका, तो उसे ही दफना दिया जायेगा, जैसे उसने 1995 से 2014 के बीच सैकड़ों को दफनाया, जिनमें अधिकांश महिलायें और लड़कियां थी, जिनकी कथित तौर पर यौन उत्पीड़न के बाद हत्या कर दी, कुछ बेसहाय पुरुष भी थे, जिनकी हत्याओं का गवाह होने का दावा उसने किया।

एसआईटी को खुदाई में क्या मिला : अदालत के बाद सरकार ने एसआईटी का गठन किया और शिकायतकर्ता द्वारा बताई 17 साइटों की खुदाई की। साइट न. 6 से खुदाई में 14 हड्डियां मिली, जिनमें दांत और खोपड़ी के कुछ हिस्से, जिनको जांच के लिये भेज दिया गया।

साइट नं. 13 में शिकायतकर्ता ने 60 से 100 शवों को दफनाने का दावा किया। 16 फुट गहराई तक खुदाई हुई। पेनिट्रेटिंंग रेडार (जीपीआर) को भी लगाया गया, पर कुछ नहीं मिला।
साइट न. 11 की खुदाई के समय नकाबपोश ने कहा असली स्थान यहां से थोड़ी दूरी पर है, जो बंगालेगुडडा कहा जाता है। 150 मीटर दूर उसे साइट न. 14 कहा गया वहां 81 हड्डियां, खोपड़ी व रीढ़ की हड्डी मिली, उन्हें भी जांच के लिये भेजा गया। वहां एक आदमी के कपड़े और पेड़ से लटकी साड़ी भी मिली, जांच से पता चला कि अभी कुछ वर्ष पहले आत्महत्या का वह केस था और खुदाई में कुछ नहीं मिला। ये भी 2015 से पहले का नहीं, बल्कि कुछ वर्ष पहले का केस था। दोनों साइटों से मिली हड्डियां भी दोनों पुरुषों की थी, जो आत्महत्या के केस अभी कुछ वर्ष पहले के ही थे। यानि सैकड़ों शव दफनाने के मामलें में खुदाई से कुछ न मिला। कर्नाटक में राजनीति गरम होती जा रही थी।

किसी बड़ी साजिश की बू : 800 वर्ष प्राचीन जैन धर्मस्थल के हड़पने की कोई यह चाल तो नहीं थी। हजारों को नि:शुल्क भोजन रोजाना, कर्नाटक में हर व्यक्ति जिन्हें भगवान कह कर पुकारता था, सभी बड़े सम्मानों को प्राप्त करने वाले तथा राज्यसभा में मनोनीत जैन सांसद डॉ. वीरेन्द्र हेगड़े को फंसाने की कोई साजिश, जिसकी बदबू आ रही थी।


अचानक बदल गई तस्वीर:
फिर 22 अगस्त 2025 को सारी शंकाओं और उधेड़बुनों के बीच मानो एक बड़ा विस्फोट हो गया। सुजाता भट ने एक बड़ा यू-टर्न लिया। बताया कि वह उस नकाबपोश की पहली पत्नी है और दक्षिण कन्नड़ जिले से 2003 से गायब होने वाली उसकी कोई बेटी गायब नहीं थी, न उसका यौन शोषण हुआ, न हत्या की गई। वास्तव में उसकी कोई बेटी ही नहीं है। उसकी जमीन का धर्मस्थल से कोई विवाद चल रहा था, उसके लिये किसी के कहने पर यह झूठी कहानी रची थी।

उसने कहा कि वह नकाबपोश जो उसका पति था, उसे खूब परेशान करता था, वह अच्छा आदमी नहीं है, हमारी 1999 में शादी हुई थी और अब मोटी रकम पाने के लिये उसने यह षड्यंत्र रचा है। फिर डीआईजी ने उस नकाबपोश से सवाल किये और उसे शनिवार को गिरफ्तार कर अदालत में पेश कर 03 सितम्बर तक रिमांड पर ले लिया। अभी जांच जारी है, और कई खुलासे होने की संभावना है।

पूरा मामला चैनल महालक्ष्मी के एपिसोड नं. 3443 में देख सकते हैं।

चैनल महालक्ष्मी चिंतन
इस सारे प्रकरण में किसी बड़े षड्यंत्र की बू आ रही है, इस बड़े प्लान में नकाबपोश तो शायद एक मोहरा ही हो, उसकी पहली पत्नी ने क्यों झूठ बोलने के बाद यू-टर्न लिया? क्यों पहले वकीलों ने इस पर पहल की? एक बड़े मीडिया ग्रुप ने तो हिरासत में उससे घंटे भर का साक्षात्कार लेकर उसे प्रचारित किया। राजनीजिक शतरंजी चालों से इंकार नहीं किया जा सकता। वहीं कर्नाटक के इस जैन धार्मिक स्थल को हड़पने तथा डॉ. वीरेन्द्र हेगड़े की श्वेत छवि को धूमिल करने की अटकलों से भी इंकार नहीं किया जा सकता। निश्चित ही आज जैन संस्कृति, विरासतों और सम्पत्तियों को हड़पने और जैन छवि को बदनाम करने की हरकतें जोरों पर हैं।

तिथिनुसार घटनाक्रम

22 जून दो वकील – ओजस्वी गौड़ा और सचिन देसाई ने दावा किया कि 1995-2014 के बीच श्रीक्षेत्र धर्मस्थल मंदिर में कार्यरत पूर्व सफाईकर्मी सामूहिक दफनों की जगह दिखाने को तैयार है, जब यौन शोषण के बाद मर्डर कर उन्हें दफनाने को मजबूर किया, जिनमें अधिकांश महिलायें थी।
3-4 जुलाई दक्षिण कन्नड़ पुलिस के पास नकाबपोश ने शिकायत की और उसके अनुसार प्राथमिकी दर्ज कर दी गई।
11 जुलाई बेल्थांगडी अदालत में नकाबपोश हाथ में एक इंसानी खोपड़ी लेकर पहुंचा और दावा किया कि बरसों पहले उसे दफनाया था।
15 जुलाई सुजाता भट ने शिकायत दर्ज कराई कि उसकी बेटी अनन्या भट जो मेडिसन की पढ़ाई कर रही थी, 2003 में धर्मस्थल जाने के बाद से गायब हो गई।
19 जुलाई कर्नाटक सरकार ने डीजीपी प्रोनब मोहंती के नेतृत्व में विशेष जांच टीम (एसआईटी) का जांच हेतु गठन कर दिया।
28 जुलाई शिकायतकर्ता ने नेत्रावती नहाने वाले घाट और आसपास के जंगल क्षेत्र में 13 जगह शवों को दफनाने की बात कही। एसआईटी ने उस क्षेत्र की मार्किंग की।
29 जुलाई एसआईटी ने शिकायतकर्ता की निशानदेही अनुसार वहां खुदाई शुरु कर दी।
22 अगस्त मामले में यू-टर्न, शिकायतकर्ता ही गिरफ्तार।