1920 में कोहिमा में निर्मित यह जैन मंदिर , दुसरे विश्व युद्ध के दौरान मूर्तियों को यहाँ से कहीं और स्थानांतरित कर दिया गया था, फिर 62 वर्षो के पश्चात् आचार्य श्री दया सागर जी के सानिध्य में 2003 में वापस यहाँ विराजमान किया गया दश॔न कीजिये ।
वर्षायोग…. कलश…. कलश…. कलश…अब एक तीर्थ सुरक्षा कलश की स्थापना भी!...
24 जुलाई 2026 /आषाढ़ शुक्ल दशमी /चैनल महालक्ष्मी और सांध्य महालक्ष्मी/ शरद जैन
हमारी संस्कृति की आधारशिला, हमारे पावन जैन तीर्थों के संरक्षण...














