05 नवंबर 2026 / कार्तिक कृष्ण एकादशी /चैनल महालक्ष्मी और सांध्य महालक्ष्मी/ शरद जैन
निर्यापक श्रमण श्री सुधा सागरजी ने भी हम सबके संशय को दूर करते हुए कहा कि जैन दर्शन के अनुसार दिवाली का संबंध अमावस्या या सिंह लग्न से नहीं है, बल्कि इसका मुख्य आधार महावीर स्वामी के मोक्ष कल्याणक से है। जहां अन्य लोग 08 नवम्बर को अमावस और सिंह लग्न में दिवाली मनायेंगे, वहीं जैन समाज के अनुसार तीर्थंकर महावीर स्वामी को प्रात:काल में मोक्ष हुआ था, इसलिये दिवाली 09 नवम्बर को मनाई जाएगी।

मुहुर्त और समय : सोमवार 09 नवम्बर को प्रात: जिनालयों में लाडू चढ़ाया जाएगा और घर-दुकान पर व्यापार की दिवाली मनाने के लिये दिन में स्थिर लग्न (जैसे कुंभ या वृष लग्न) के दो मुहुर्त बताये गये हैं:-
कुंभ लग्न : दोपहर एक से दो के बीच (1.21 से 2.54 बजे तक)
वृष लग्न : सायं 5 से 6 के बीच (4.25 से 5.51 बजे तक)
रात्रि में बिल्कुल नहीं: मुनि श्री स्पष्ट कहा कि जैन आगम या शास्त्रों में रात्रि के समय दिवाली मानाने, किसी भी भगवान को रात्रि में मोक्ष या केवलज्ञान होने का कोई उल्लेख नहीं मिलता। सभी तीर्थंकरों के जन्म, दीक्षा, केवलज्ञान और मोक्ष दिन के समय ही हुए हैं, इसलिये पूजा और दीपोत्सव दिन में ही करने चाहिए।
पंचागानुसार दिवाली (पं. जैनी जियालाल चौधरी जी पंचांग) – तिथि गणनानुसार 08 नवम्बर को दिन में 11 घं 28 मि. से 09 नवम्बर (सोमवार को अपराह्न 12 घ. 31 मिनट तक अमावस तिथि रहेगी। अत: 09 नवम्बर को सोमवती अमावस, स्वाति नक्षत्र 7/23 तक, तदुपरान्त विशाखा नक्षत्र, सौभाग्य योग, प्रात: सूर्योदय उपरान्त (दिल्ली में सूर्योदय 6.43)। अत: सभी जिनालयों में प्रात:काल में महावीर स्वामी का निर्वाण लाडू बड़े ही हर्षोल्लासपूर्वक अपने आन्तरिक समर्पण भाव से समर्पित कर पुण्य के भागीदार बने। निर्मल भाव से किया गया यह समर्पण, पूजन जीवन में सुख-समृद्धि, शांति, मान-सम्मान, लाभोन्नति का कारण बनता है। श्रेष्ठ समय मुहुर्त में किया गया समस्त कार्य अपने लिए एवं विश्व के लिए कल्याणकारी होता है।
इससे कई बार गौतम गणधर केवलज्ञान तिथि पर शंका भी उठती है, जिसका स्पष्ट समाधान आचार्यगण आगम से देते हुए कहते हैं कि जिस दिन महावीर स्वामी को मोक्ष हुआ, उसी दिन सायंकाल में श्री गौतम स्वामी को केवलज्ञान रूपी लक्ष्मी की प्राप्ति हुई। इसलिये सुबह 12.31 तक तथा सायंकाल 5.27 से शास्त्रीय समय है।
पटाखे-आतिशबाजी नहीं – और सबसे प्रमुख बात ज्योतिष शास्त्र और जैन परम्परा के अनुसार बारूद जलाना या पटाखे फोड़ना अशुभ और अमंगल माना गया है। दीपावली के पवित्र दिन पटाखें या फुलझड़ियां जलाना अशुभ है। अपने-अपने घरों में तीन शुद्ध दीपक (घृृत या कपूर) के जलाने का विधान है।
दीपावली एक उत्सव भी- हां महावीर स्वामी का मोक्ष कल्याणक, सभी के आनंद का उत्सव है, जो स्पष्ट संकेत देती है कि हम अपनी आत्मा से क्रोध, मान, माया, लोभ जैसी कषायों की गंदगी को ज्ञान रूपी बुहारी से स्वच्छ करें। फिर आत्मशुद्धि की भावना से ज्ञानोपयोग का दीपक जलाकर अपने भीतर से अज्ञानता का तिमिर हटाना है।
कषायों के कचरे को ज्ञान की झाड़ू से साफ करो,
आत्मविशुद्धि की सफेदी से मन को पाक करो।
ज्ञानपयोग का जलाकर दीप पावन अनुराग से,
आत्मानुभूति का पालो प्रकाश इस दिवाली हर सांस से।।



















