11 मई 2026 / जयेष्ठ कृष्ण नवमी /चैनल महालक्ष्मी और सांध्य महालक्ष्मी/
॰ 14 पहिये के कंटेनर की चपेट में आने से सभी 12-14 श्रद्धालु बचे
॰ दो अनजान कुत्ते साथ रक्षक के रूप में चले
॰ महज चार कदम दूर से लौट गई मौत
04 मई सुबह 6.30 बजे का वक्त था। 12-13 श्रद्धालुओं के साथ आचार्य श्री अतिवीरजी का ग्रेटर नोएडा से विहार चल रहा था, लगभग साढ़े चार किमी विहार हो चुका था। उस विहार में एक विशेष बात यह थी कि उनके विहार में दो कुत्ते साथ-साथ चल रहेथे। एक चार कदम आगे, दूसरा चार कदम पीछे। पीछे वाला शरारती था, बार-बार सड़क पर घूम जाता, आचार्य श्री उसे इशारा करते, फिर पीछे आ जाता।

चार कदम से लौट गई मौत, क्या कुत्ता बना रक्षक
घटना के बाद चैनल महालक्ष्मी टीम आचार्य श्री अतिवीरजी के पास पहुंची, तो उन्होंने बताया कि उस घटनास्थल पर, फिर वह कुत्ता हाइवे पर बीच में जाने लगा, तो चंद सेकेंड (शायद 6-7 सेकेंड) आचार्य श्री रुके और उसे पीछे आने को टोका। शायद वो रुकने वाले चंद सेकेंड ने मौत के मुंह से सभी को बचा लिया। 16 पहियों का बड़ा कंटेनर उनसे महज चार कदम दूर 180 डिग्री पर घूम कर दो हिससे में हो गया, आगे का तो वैसे ही खड़ा रहा, पीछे का धड़ाम गिरा, जिसके नीचे आगे चल रहे 28 वर्षीय युवक को गहरी चोट लगी। सिर फट गया और पीठ पर चोटें आर्इं। आचार्य श्री सहित शेष सभी बाल-बाल बच गये, जैसे स्पष्ट लगा, वो दोनों कुत्ते उन सबके लिए रक्षक बनकर आये थे।

आचार्य श्री ने बताया कि उस कंटेनर के ठीक सामने पलटने में एक गहरी साजिश लगती है। इतना बड़ा हादसा होने के बाद, ड्राइवर बाहर नहीं आया। तब विहार करा रहे एक श्रद्धालु आदीश जैन ने उसका दरवाजा खोला – वो बिल्कुल सफेद नई टी शर्ट में हाथ पर हाथ बांधकर ऐसे बैठा था, जैसे कुछ हुआ नहीं। आचार्य श्री ने इशारे से पूछा – यह क्या? वो अपने अंदाज में बोला – ब्रेक जाम हो गई थी। बस उधर मुंह कर लिया, न उतरा, न अफसोस, ऐसे बड़े हादसे के बाद। हाइवे पर दूर तक कोई नहीं था, फिर ब्रेक पर पैर कैसे?
उधर कंटेनर की चपेट में आया युवा, खून से लथपथ हो चुका था, सबकी नजर उस पर टिक गई, तुरंत उसे अस्पताल पहुंचाने में लोग और उसके प्रति चिंता हो गई। किसी ने उसको पकड़ने या रिपोर्ट करने की कोशिश नहीं की।
आचार्य श्री ने चैनल महालक्ष्मी को बताया कि उसके हाव-भाव व ड्रेस से वह ड्राइवर नहीं लग रहा था। ऐसा लग रहा था जैसे वो अपने काम में कहीं चूक गया था। उसे कोई पछतावा नहीं। तेजी से ट्रक का मुड़ना और बिल्कुल सामने पलटना किसी साजिश का अंदेशा करता है।

कुत्तों के साथ, कौन था साथ?
उन कुत्तों को कोईनहीं जानता था, कब साथ चल दिये? इस बात पर विचार तब गहरा हुआ, जब आचार्य श्री सोसाइटी के अंदर जाने लगे। तब दोनों कुत्ते उसके गेट के भीतर नहीं गये। आचार्य श्री ने स्वयं कहा, जब मैं भीतर गया तो मुझे काफी नेगेटिविटी का आभास हो रहा था, मुझे भी 20-25 मिनट में वापस आना पड़ा। जब वापस आया तो गेट पर खड़े दोनों कुत्ते कहां चले गये, पता नहीं चला।
48 घंटे बाद दूसरा हमला
सोमवार के बाद बुधवार को भी इसी तरह जब सुबह विहार चल रहा था, तब भी उल्टी दिशा में चलने के बावजूद एक कार तेजी से उनके सामने त्रिकोण बनाती आई और छूने से बाल-बाल बचते, वापस मुड़ गई। क्या यह टक्कर मारने की कोशिश थी, पर पटरी होने के कारण वह वहां नहीं पहुंच पाई।
फरीदाबाद सुरक्षित, नोएडा खतरनाक
चैनल महालक्ष्मी ने आचार्य श्री से जब थाने में शिकायत के बारे में पूछा तो समाज चुप था। उन्होंने कहा कि अभी एक डेढ़ माह फरीदाबाद-बल्लभगढ़ में अच्छी प्रभावना करके आये थे। इस बेल्ट में पहले भी आचार्य श्री वसुनंदी जी सहित 3-4 साधुओं के साथ घटनायें हो चुकी हैं। अब जब भी इधर आऊंगा तो पुलिस को लिखित सूचना देकर, उन्हीं की सुरक्षा में विहार करूंगा और यह बात सभी साधुओं को इस तरफ विहार के समय ध्यान रखनी होगी।
इसकी जानकारी चैनल महालक्ष्मी के एपिसोड नं. 3710 में देख सकते हैं।
चैनल महालक्ष्मी चिंतन : इस घटना से जहां समाज में रोष फैल गया पर एक बार पुरानी घटनायें ताजा हो गई। इस बेल्ट को किसी भी रूप में सुरक्षित नहीं कहा जा सकता। एक अफसोस की बात यह है कि समाज क्यों पुलिस को पूर्व सूचना देकर सुरक्षा नहीं लेता और इस कारण कभी दुर्व्यवहार, कभी दुर्घटनाओं की शिकायतें आती रहती हैं, कहीं न कहीं समाज की लापरवाही दिखती है। वहीं शिकायत न करना और भी अव्यवहारिक कदम है।



















