भाद्रपद पर्वों का राजा, तो चैत्र माह कल्याणकों का महाराजा

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11 मार्च 2026 / चैत्र कृष्ण नवमी /चैनल महालक्ष्मी और सांध्य महालक्ष्मी/ शरद जैन
आज एक अनोखा चिंतन, विश्लेषण दे रहा है चैनल महालक्ष्मी आपको, आप उस परिधि से गुजरते जरूर हैं, पर इतनी गहराई में कभी उतरे नहीं, आज वही अनोखी बात इस चैत्र माह की –

॰ हिंदी तिथियों का कलेण्डर इसी चैत्र माह से शुरू होता है।

॰ चैत्र माह में सबसे ज्यादा 17 कल्याणक आते हैं- 3-3 गर्भकल्याणक व जन्मकल्याणक, एक तप कल्याणक और 5-5 ज्ञान व मोक्ष कल्याणक।

॰ वैसे सबसे ज्यादा ज्ञान कल्याणक 6, पौष माह में आते हैं, जिसके शुक्ल पक्ष में चार कल्याणक और चारों ही ज्ञान कल्याणक, इसलिये उसे ज्ञान पखवाड़ा भी कह सकते हैं।

॰ सबसे ज्यादा मोक्ष कल्याणक इसी चैत्र माह और फाल्गुन माह में 5-5 आते हैं।

॰ चैत्र माह में प्रथम तीर्थंकर श्री आदिनाथ का कृष्ण नवमी को तथा अंतिम तीर्थंकर महावीर स्वामी का शुक्ल त्रयोदशी को जन्म कल्याणक आता है।

॰ साल में एक मात्र दिन जिस दिन दो तीर्थंकरों के मोक्ष कल्याणक आते हैं, वो है चैत्र माह की अमावस, जब 14वें तीर्थंकर अनंतनाथजी व 18वें तीर्थंकर अरनाथ जी का मोक्ष कल्याणक आता है।

॰ चैत्र ही एक मात्र माह है, जिसमें दो दिन 3-3 कल्याणक आते हैं। अमावस को तीर्थंकर अनंतनाथ जी का ज्ञान व मोक्ष तथा अरनाथ जी का मोक्ष कल्याणक, वहीं शुक्ल एकादशी को सुमतिनाथ जी का जन्म, ज्ञान, मोक्ष कल्याणक आता है। वैसे एक दिन में चार कल्याणक पौष कृष्ण एकादशी को चन्द्रप्रभ व पारस प्रभु का जन्म-तप कल्याणक आता है।

॰ दिनों के हिसाब से भी सबसे ज्यादा 12 कल्याणक दिन चैत्र माह में आते हैं। उसके आगे-पीछे के दोनों माह बैसाख में 9 दिन में 13 कल्याणक और फाल्गुन के 11 दिन में 15 कल्याणक आते हैं।

॰ ये तीन लगातार आने वाले माह फाल्गुन-चैत्र-बैसाख के 90 दिन के 32 दिन में 45 कल्याणक आते हैं, कुल 120 कल्याणकों के एक तिहाई से भी कहीं ज्यादा।

॰ इन तीन माह में ही 24 में से आधे से ज्यादा यानि 13 तीर्थंकरों को, मोक्ष प्राप्त होता है।

॰ चैत्र माह की कृष्ण नवमी बहुत खास है, यानि इस दिन प्रथम तीर्थंकर ऋषभनाथ जी का ही जन्म-तप कल्याणक नहीं, बल्कि इसी दिन प्रथम चक्रवर्ती भरत व प्रथम आर्यिका ब्राह्मी का भी जन्म हुआ था।

इसीलिए तो कहते हैं, अगर भाद्रपद माह पर्वों का राजा है, तो चैत्र माह कल्याणकों का महाराजा है।