तीर्थों की सुरक्षा के संस्कार से ही सुरक्षा हो पायेगी – आचार्य श्री सौरभ सागरजी

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20 फरवरी 2026 / फाल्गुन शुक्ल तृतीया /चैनल महालक्ष्मी और सांध्य महालक्ष्मी/ शरद जैन
432 वर्षों बाद अतिशय क्षेत्र श्री दिगंबर जैन लाल मंदिर का श्री 1008 मज्जिनेन्द्र त्रिकाल चौबीसी जिनबिम्ब ऐतिहासिक पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव रविवार 15 फरवरी को लाल मंदिरजी के सामने लालकिला मैदान में गणिनी आर्यिका श्री चन्द्रमति माताजी की प्रेरणा से आचार्य श्री श्रुतसागरजी एवं आचार्य श्री सौरभ सागरजी के मंगल सान्निध्य में प्रारंभ हुआ। पंचकल्याणक की शुरूआत भारतवर्षीय दिगंबर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बाबू जम्बू प्रसाद जैन सपरिवार द्वारा ध्वजारोहण से हुआ।

जन्म कल्याणक के दिन 17 फरवरी को पाण्डुकशिला जन्माभिषेक से पूर्व तीर्थों की सुरक्षा पर जागरूकता के लिये भारतवर्षीय दिगम्बर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी द्वारा कार्यक्रम किया गया। इस अवसर पर आचार्य श्री श्रुतसागरजी ने तीर्थों की सुरक्षा में पूर्ण सहयोग तथा तीर्थक्षेत्र कमेटी से जुड़कर तीर्थों के जीर्णोद्धार के लिए पूरी तरह समर्पित रहने की बात दोहराई।

आचार्य श्री सौरभ सागरजी ने कहा कि जैन समाज में उत्सव तो बहुत होते हैं, पर आज उत्साह नहीं होता। जहां-जहां तीर्थंकर हुए या प्रतिमायें धरा से निकली, कल्याण-सिद्ध भूमि सब तीर्थों में परिवर्तित हो चुके हैं, आप देखते हो भारत की धरती पर कही भी खुदाई करते हो, तो सबसे प्राचीन से प्राचीन कोई स्थापत्य कला की चीज निकली है, वो जैन मूर्तियों के रूप में निकलती है, अन्य किसी रूप में नहीं। इसलिये क्षेत्रों की कमी नहीं है, पर सुरक्षा कौन करेगा? जो अपने अंदर संस्कार पैदा कर लेंगे। सिद्ध-अतिशय – कल्याणक – कला क्षेत्र, बहुत तीर्थ हैं जैनों के। साल में जरूर एक बार ऐसे तीर्थों की वंदना करो, जंगल वाले तीर्थों की यात्रा करो। नई पीढ़ी आज जरूर मस्ती में है, पर धर्म की बसदि में नहीं है। धर्म के प्रति उपेक्षा मत करो, तीर्थों की आराधना करो, सुरक्षा करो। तीर्थक्षेत्र कमेटी से जुड़ो, उसके हाथ मजबूत करो।
आचार्य श्री विमर्श सागरजी के सुशिष्य मुनि श्री विशम सागरजी ने कहा कि अभी शरद जी बता रहे थे जीर्णोद्धार के लिए सहयोग की बात। सहयोग की भावना होनी ही चाहिए, चिंतन होना चाहिए तभी बचा सकते हैं। अगर उत्साह की जगह निराशा आ गई, तो बचाना मुश्किल है।

श्रीमती मीनू जैन ने बताया कि अगर सबसे प्राचीन कोई जैन संस्था है, तो वह भारतवर्षीय दिगंबर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी है, जो अब अपने 125 वर्ष पूरे कर रही है, उस कमेटी के चेयरमैन जवाहर लाल जैन हैं व उस कमेटी के दिल्ली अध्यक्ष पुनीत जैन हैं। सभी तीर्थक्षेत्र कमेटी का हर संभव सहयोग करें। तीर्थों की सुरक्षा में सहभागी बने।

चैनल महालक्ष्मी ने पहले दोनों आचार्यों के सम्मुख, प्रतिष्ठाचार्यों व उपस्थित मंदिर कमेटियों से अपील की कि आप कोई भी बड़ा कार्यक्रम, जैसे विधान या पंचकल्याणक या चातुर्मास करवाते हैं, तो एक तीर्थ सुरक्षा कलश की स्थापना जरूर करें, उससे जो भी राशि आये, उसे प्राचीन तीर्थों के जीर्णोद्धार के लिये भारतवर्षीय दिगंबर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी को जमा करायें। पांच सिद्धभूमियों को प्रदर्शित करते ऐसे आकर्षक कलश तीर्थक्षेत्र कमेटी तैयार करवा रही है, जल्द ही आप उचित समय रहते हुए, उनसे मंगवा सकते हैं। फिर सभी से कहा कि अपने-अपने मंदिर में तीर्थ सुरक्षा गुल्लक भी रखवायें, जो तीर्थक्षेत्र कमेटी द्वारा मंदिरों में नि:शुल्क दी जा रही है। प्राचीन तीर्थों की यात्रायें करें और तन-मन-धन किसी भी रूप में तीर्थक्षेत्र कमेटी को आर्थिक रूप से मजबूत करें।

यहां पर तीर्थों के जीर्णोद्धार व सुरक्षा के लिए जागरूक करने के लिए तीर्थक्षेत्र कमेटी द्वारा एक स्टाल भी लगाया गया है।