॰ जहां अनेक 50-100 के जैन समाज भी वर्षायोग के लिये श्रीफल नहीं चढ़ाते, वहीं अजैन गांव ने पेश की अद्भुत मिसाल
24 जून 2025 / आषाढ़ कृष्ण चतुर्दशी /चैनल महालक्ष्मीऔर सांध्य महालक्ष्मी/ शरद जैन /
इसे क्या कहें, अविश्वसनीय, अकल्पनीय, अद्भुत, असंभव, पर राजस्थान के कछोला गांव ने उन सब जैन समाजों के मस्तक शर्म से झुका दिये, जो 50-100 परिवार के समाज होने के बाद भी संतों के चातुर्मास के लिए प्रयास नहीं करते। एक भी जैन नहीं और 36 पिच्छी वाले इतने बड़े संघ का चार माह प्रवास कराना, बड़े-बड़े जैन समाज भी इतनी हिम्मत-पहल नहीं कर पाते।

जहाजपुर से पूर्व चंवलेश्वर तीर्थ की ओर बढ़ रहा था आचार्य श्री वर्धमान सागरजी महामुनिराज का संघ। यह सभी को जानकारी थी कि आचार्य श्री 2025 वर्षायोग के स्थान की घोषणा जहाजपुर में करेंगे। ऐसे में भीलवाड़ा जिले में चवलेश्वर पहुंचने से पहले 17 जून को कछोला गांव में आहार हुआ, रात्रि विश्राम हुआ और 18 जून को प्रात: विहार हुआ। (27 जून को अपने 36वे आचार्य पद दिवस पर आचार्य जी ने टोंक जिले में अपने चातुर्मास की घोषणा कर दी है, पर भाव यह है कि चातुर्मास के लिए श्रीफल चढ़ाने में अजैन समाज ने कितनों के लिए प्रेरणा दे दी)

उस कछोला गांव में एक भी जैन परिवार नहीं, वहां वैष्णव धर्म की अग्रवाल समाज यानि माहेश्वरी परिवारों के सभी 120 घरों के सदस्यों ने मिलकर गुरुवर को श्रीफल समर्पित किया। संघ भी मुस्कराते हुये चौंक गया। उन परिवारों के साथ वहां के थाना प्रभारी, सरपंच और गांव के सभी पंच भी मौजूद थे। सब चातुर्मास के लिये एकमत थे। उन्होंने गुरुवर से कहा कि जैनों के बीच ज्ञान देने से ज्यादा जरूरत हमें हैं। आपकी ज्ञानगंगा की जितनी जरूरत जैनों को है, उससे ज्यादा हमारे गांव में है। हमें भी अच्छे संस्कार मिले, यही भावना है चातुर्मास कराने के लिये। हम सब मिलकर एक नया इतिहास रचेंगे और हम सब इस संघ के प्रति तन-मन और धन से पूरी तरह समर्पित हैं। यह अपरम्पार महिमा है जैन धर्म की और आचार्य श्री वर्धमान सागरजी की। यह महत्वपूर्ण नहीं होता कि आपको चातुर्मास मिला या नहीं, पर आपने भाव बनाये तो उनका पुण्य फल तो मिलता ही है। पूरी जानकारी चैनल महालक्ष्मी के एपिसोड नं. 3376 में देख सकते हैं।
चैनल महालक्ष्मी चिंतन : अजैन गांव ने जैन समाज के लिये एक अद्भुत मिसाल पेश की है। आपके भाव होने चाहिये, कुछ ग्रहण करने के, पूरी तरह समर्पित होने के। ऐसी अकल्पनीय दृढ़ शक्ति प्रेरणा देती है। अनेकों जैन समाज ऐसा जज्बा, समर्पण दिखा नहीं पाते, उन सबके लिये यह एक प्रेरणादायक, सराहनीय प्रशंसात्मक कदम है।















