क्या कहने पुलिस कार्यवाही के! जैन समाज पर अपशब्द, अभद्र टिप्पणियां … फिर जैनों पर ही लाठीचार्य

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॰ यह कैसी कानूनी कार्यवाही
॰ पुलिस ने मॉब लिंचिंग न हो, इस बहाने मुख्य आरोपी को बचाया
॰ आज तक के इतिहास में अहिंसक जैनों ने कभी नहीं की मॉब लिंचिंग
॰ अल्पसंख्यक समाज की यह कैसी अनदेखी
॰ कुछ नाबालिगों को भी चोटें
08 जनवरी 2026 / माघ कृष्ण षष्ठी /चैनल महालक्ष्मी और सांध्य महालक्ष्मी/ शरद जैन

शुक्रवार 03 जनवरी रात लगभग साढ़े आठ बजे यानि नये वर्ष के दूसरे दिन का सूरज जब डूब चुका था और चांद ने भी पूर्णिमा के बाद अपना कद घटाना शुरू कर दिया था। तब जबलपुर के पॉश एरिया कमानिया गेट के पास 1889 से प्रतिष्ठित जैन बंधु के बड़कुल स्वीट्स केपास यह दुखद घटना हुई।

क्या है मामला?
सूत्रों से चैनल महालक्ष्मी को मिली जानकारी के अनुसार प्रतिष्ठान के मालिक को कर्मचारी ने अपशब्द कहे, उनके साथ जैन धर्म पर भी अभद्र टिप्पणियां तथा दूसरी बात जो सामने आ रही है, वह यह कि राजकुमार जैन को ठंडी भजिया परोसी गई, जब उन्होंने शिकायत की तो कर्मचारी ने उन पर, फिर पूरे जैन समाज पर, वहां के कर्मचारियों ने अशोभनीय टिप्पणियां कीं। तब यह सुनकर जैन लोग इकट्ठे हो गये।

प्रत्यक्षदर्शी व शिकायत दर्ज
राजकुमार जैन के अनुसार वह किसी काम से बड़कुल स्वीट्स के पास खड़े थे, इसी दौरान वहां मौजूद मैनेजर या कहें उसकी सीट पर बैठे व्यक्ति ने उनको तथा जैन समाज को अपशब्द कहे। इस विवाद में उनके साथ भद्दी टिप्णियां व गाली-गलौज की गई। यह सुनकर वहां जैन समुदाय के कुछ लोग इकट्ठे हुये कि आरोपियों ने फोन करके अपने कुछ लोगों को बुला लिया, जिनमें दो बेसबाल के डंडे लेकर मारने आ गये। कहा गया कि मारपीट भी की गई और जैन समाज के खिलाफ अपशब्द भी कहे गये। तुरंत जैन समाज में भारी आक्रोश फैल गया। उधर पुलिस को सूचना दी गई, 5-6 पुलिसवाले आये।

पुलिस के सामने क्या हुआ?
कोतवाली थाने से 5-6 पुलिस वाले वहां पहुंचे। उनके देखते ही जैन लोग एक तरफ हट गये और उन आरोपियों पर कार्यवाही करने को कहा। पुलिस ने उनके खिलाफ कार्यवाही की बजाय समझाने लगी। लेकिन जैन समाज आक्रोशित था। पुलिस मामला यूं ही निबटा कर शांति बनाने की कोशिश करती रही।

फिर हुआ लाठीचार्ज
थोड़ी देर में पुलिस वाले फिर आये। पुलिस का कहना है कि उन्होंने दो आरोपियों को लोगों से छुड़ा कर थाने पहुंचाया और तीसरा मुख्य आरोपी बड़कुल स्वीट्स में छिप गया। पुलिस का कहना है कि उन्हें नहीं छुड़ाते तो भीड़ से मॉब लिंचिंग हो सकती थी। और फिर भीड़ को तितर-बितर करने के लिये लाठीचार्ज किया। कुछ जैन भाई घायल हुये, वहीं पुलिस के अनुसार कुछ पुलिसकर्मी भी घायल हुए।

अहिंसक समाज ने आज तक नहीं की मॉब लिंचिंग
वहां मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार पुलिस मुख्य आरोपी को छिपाती रही। पुलिस ने शांत अहिंसक समाज पर उल्टे लाठीचार्ज भी किया। जैन समाज का इतिहास है कि वे न पत्थर फेंकते हैं, न मॉब लिंचिंग करते हैं, न तोड़फोड़ करते हैं, पर यह सब जानते हुए, उग्रता मानकर उन्हीं पर लाठीचार्ज किया गया, जबकि आरोपियों को बचाया गया। आरोपी बेसबाल के बेट लेकर हमले की इरादतन वहां आये थे।

जैन समाज के आरोप
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि उन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन किया। जब पुलिस आरोपियों को बचाने के लिये और मामले को वहीं निबटाने की कोशिशों में लगी थी। कोई भी तोड़फोड़ नहीं की गई। पुलिस ने एकतरफा कार्यवाही की और जैन युवकों पर लाठीचार्ज किया। कुछ नाबालिगों को चोटें भी आर्इं। आरोपियों ने बेसबाल के बल्लों से हमला किया, पर लाठियां फिर भी जैनों पर बरसाई गई।

अल्पसंख्यक समाज में आक्रोश
जैन समाज में आक्रोश है कि जिन पर कार्यवाही हो, उनके पक्ष में उल्टे मामला समझाने में लगा रही पुलिस। पुलिस की कार्यवाही निष्पक्ष नहीं थी। साथ ही आरोपियों पर कड़ी कार्यवाही करे। जैन समाज द्वारा इस मामले को लेकर पुलिस अधीक्षक, आईजी कार्यालय और आवश्यकता पड़ने पर मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपे जाएंगे।

इस बारे में पूरी जानकारी चैनल महालक्ष्मी के एपिसोड नं. 3590 में देख सकते हैं।

चैनल महालक्ष्मी चिंतन : बेकसूर होने के बावजूद पुलिसिया लठैत। एक धार्मिक समुदाय पर अपशब्द, जिस पर अहिंसक समाज ने कहा कि कठोर कार्यवाही हो, जिससे दोबारा ऐसा न हो। आज हमारी संख्या बल की कमी और गलत के प्रति एक होकर आवाज उठाने की कमी, हमारे ऊपर अत्याचार के मानो कारण बन गई है। हमें एक होना होगा और हर गलत बात का मिलकर विरोध करना होगा।