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बहुत दुखद ! तीर्थंकरों और करोड़ों देवी-देवताओं की भूमि पर भारत सरकार ने खोला पहाड़ी पशु याक के व्यवसायिक वध का रास्ता

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Channel Mahalaxmi
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December 1, 2022
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    01 दिसंबर 2022/ मंगसिर शुक्ल नवमी /चैनल महालक्ष्मी और सांध्य महालक्ष्मी
    अत्यधिक ऊंचाई पर पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले हिमालयी याक (Himalayan Yak) उन इलाकों में रहने वाले स्थानीय लोगों के लिए बहुआयामी भूमिका निभाते हैं। पहाड़ी गाय की तरह दिखने वाला विशालकाय याक का दूध अत्यधिक पौष्टिक, वसा से भरपूर, आवश्यक खनिज युक्त और औषधीय महत्व वाला होता है। याक के शरीर पर बड़े- बडे़ मुलायम बाल होते हैं जो बड़े गर्म होते हैं जो भयानक ठंड से उसका बचाव करते हैं।

    याक से प्राप्त ऊन बड़ी गर्म और मुलायम होती है। इसके लिये भी याकों का शोषण किया जाता है। याक की बहुआयामी उपयोगिता के कारण पहाड़ी लोग पारंपरिक रूप से याक को कृषि गतिविधियों, भार लादने के लिये, दूध दोहन तथा मांस के लिये उपयोग कर अपनी पोषण एवं आजीविका सुरक्षा हेतु पालते रहे हैं। इसी अंधाधुंध दोहन की वजह से पिछले कुछ सालों में याक की संख्या में भारी कमी आई है।
    ( साल 2019 में हुई जनगणना के अनुसार भारत में कुल 58000 याक हैं, जो कि साल 2012 में की गई जनगणना की तुलना में लगभग 25 प्रतिशत कम है।)

    भारत सरकार ने अरुणाचल प्रदेश के पश्चिम कामेंग जिले में राष्ट्रीय अनुसंधान केंद्र, याक (National Research Center, Yak) स्थापित कर रखा है ताकि याक के वेल्फेयर के लिये कुछ कार्य हो। पर जितने भी सरकारी पशु-पक्षी पालन अनुसंधान केन्द्र हैं उनका अंततोगत्वा यही कार्य सामने आता है कि आदमी के खाने हेतु ज्यादा मांस प्राप्त करने के लिये पशु- पक्षियों का ज्यादा से ज्यादा दोहन कैसे किया जाये?..अतः इस संस्थान NRC,YAK से भी कुछ अलग उम्मीद करना व्यर्थ ही होगा। इसके निदेशक डा मिहिर सरकार ने याक को खाद्य पशु के रूप में मान्यता देने हेतु 2021 में भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) को अपना प्रस्ताव दिया था कि इससे याक की जनसंख्या बढ़ाने में सहायता मिलेगी। ( खाद्य पशु Food Animals वह पशु होते हैं, जिन्हें मनुष्यों द्वारा खाद्य उत्पादन या सेवन के लिए पाला और उपयोग किया जाता है। )

    उपरोक्त प्रस्ताव को भारत सरकार के पशुपालन और डेयरी विभाग ने सपोर्ट किया। उसकी सिफारिशों के बाद FSSAI ने याक को खाद्य पशु (Food Animals) मानने के लिये आधिकारिक तौर पर मंजूरी दे दी है।

    अब सरकारी वाशिंदे डॉ सरकार तर्क दे रहे हैं कि FSSAI द्वारा हिमालयी याक को खाद्य उत्पादक पशु (Food Animal) के रूप में दी गई मान्यता से किसानों को पशु पालन के लिए आर्थिक रूप से लाभान्वित होने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही Food Processors को भी इससे आर्थिक फायदा होगा। आर्थिक लाभ याक की जनसंख्या बढ़ाने में मदद मिलेगी।

    यह बेहद ही दुखद है कि हिमालय के बर्फीले माहौल में भी सिस्टम एक जानवर को जिंदा नहीं रहने देना चाहते हैं। बड़ा प्रश्र यह है कि याक गायवंशी प्रजाति का पहाड़ी शाकाहारी पशु है और गौतुल्य है। क्या सरकारी संस्थानों को इस सीधे विशालकाय पशु को खाद्य पशु का दर्जा देकर व्यापारिक दोहन के शैतानी पंजों को सौंप देना चाहिए?
    – एन के जीवमित्र

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