ट्रस्टियों, बिल्डरों, नेताओं की मिलीभगत से जैन तीर्थ-मंदिरों पर खतरा- यह कैसी दिवाली, जहां निकाल रहे महावीर का दीवाला

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॰ मुख्यमंत्री के निवास पर आमरण अनशन करूंगा – आचार्य श्री गुणधरनंदी
॰ जान दे देंगे, पर बुलडोजर नहीं चलने देंगे- आचार्य श्री गुप्तिनंदी

15 अक्टूबर 2025 / कर्तिक कृष्ण नवमी /चैनल महालक्ष्मीऔर सांध्य महालक्ष्मी/ शरद जैन /
वर्तमान जिनशासन नायक तीर्थंकर श्री महावीर स्वामी के 2552वें मोक्ष कल्याणक के रूप में दिवाली की तरफ बढ़ रहे हैं, बोलते यही हैं ‘वर्तमान में वर्धमान की आवश्यकता है’ पर हकीकत आज उलट है। आज दादा-पिता की समाज को दी गई सम्पत्ति, विरासत को बेचने, नोंचने, खाने में उन्हीं के वंशज आगे आते हैं। यही नहीं राजनीतिक जीभ भी उसी तरह लपलपाती है, जैसे हड्डी को देख गली का कुत्ता नजर रखता है। यह बात हो रही है पुणे के हीराचंद नेमचंद बोर्डिंग को बेचने की और खरीदार बिल्डर द्वारा जैनों के ही बैंक से उस जिनालय और जमीन को गिरवी कर 70 करोड़ रुपये बटोर लेना। कितनी अंधेरगर्दी। डूब मरे, चुल्लू भर नहीं, उसके भी बिना। आज यहां, कल कहीं और होगा। आज चेरिटी कमीशनर भी बिक गया, या खरीदा गया। मुख्यमंत्री की चुप्पी, सांसद की टेढ़ी नजर और हजारों करोड़ की लूट का गोरखधंधा, बहुत बड़ा षड्यंत्र है, अब 17 को पुणे में प्रदर्शन, जो एक टेलर होगा।

आचार्य श्री गुणधरनंदी जी ने कहा है कि अब मैं महाराष्ट्र की औरर विहार करूंगा, अगर बात नहीं बनी, तो महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के निवास के आगे आमरण अनशन पर बैठ जाऊंगा।

उधर, आचार्य श्री गुप्तिनंदी जी कहा कि हम जान देने को तैयार हैं, पर बुलडोजर नहीं चलने देंगे। पुणे के तीन लाख जैन भी एक हो जायें, तो भी सत्ता, प्रशासन हिल जाएंगे।

सन् 1958 में वालचंद ग्रुप, हिंदुस्तान कंसट्रक्शन, प्रीमियर आटोमोबाइल्स के नाम से विख्यात सेठ हीराचंद नेमचंद जी ने एक सार्वजनिक ट्रस्ट के जरिये पुणे में छात्रावास, धर्मशाला आदि धार्मिक कार्यों के लिये 3 एकड़ जमीन समाज को दान कर दी। वहां पर वर्धमान जिनालय भी बना, जिससे 50 से ज्यादा परिवार आज तक जुड़े हैं। बोर्डिंग में 250 होनहार छात्रावास में रहकर अपना भविष्य बना रहे हैं। ट्रस्टियों ने अब चेरिटी कमीश्नर पर आवेदन दिया कि हॉस्टल की इमारत जर्जर हो गई है, उसको दोबारा बनाने के लिये फंड चाहिए। साथ ही आवेदन में मंदिर की जगह प्रार्थना सभा हाल लिख अंधेरे में रखा। स्पष्ट था कि मंदिर बेचा नहीं जा सकता और फिर नेताओं, बिल्डर के दबाव और कुछ कारणों से मजबूत बिल्डिंग को जर्जर बताकर उसे तोड़ने और पूरी जमीन बिल्डर को बेचने की अनुमति चेरिटी कमीश्नर द्वारा दे दी गई।

एचएनडी बोर्डिंग की 129361 वर्ग फुट जमीन बिल्डर को 230 करोड़ में बेचने का सौदा कर लिया। इसमें 10 हजार वर्ग फीट जगह बोर्डिंग को लीज पर दी जाएगी। बस दस हजार वर्ग फीट। मालिक से किरायेदार। समाज को दी गई दान जमीन, उसका बोर्डिंग और सबसे बड़ी बात जिन मंदिर को प्रार्थना हॉल बता कर ट्रस्टियों ने जो चुपचाप गहरी साजिश रची, वह सचमुच आने वाले बड़े खतरे का संकेत कर रही है।

मेट्रो लाइन से 500 मीटर पर पॉश इलाके की 20 हजार रु. प्रति वर्ग फीट इस जमीन का बाजार भाव है। लगभग 11 लाख वर्ग फुट के निर्माण के हिसाब से मूल्य 2500 करोड़ बैठता है, तो फिर बिलडर को 230 करोड़ में बेचना, किसी बड़ी साजिश का संकेत करता है। वैसे चेरिटी कमीशनर ने 230 करोड़ की एफडी बनाकर, उसके ब्याज का उपयोग करने को कहा? पर सोचने वाली बात यह है कि 7 फीसदी के हिसाब से 16.10 करोड़ रु. का ब्याज प्रति वर्ष। क्या इतना खर्च है इस हॉस्टल का। बिल्कुल नहीं। तो फिर इस राशि का क्या इस्तेमाल होगा? पहले ही करोड़ों रुपये इस ट्रस्ट से बालचंद ग्रुप में ट्रांसफर कर दिया और कहते हैं फंड नहीं है।

जिनालय, बोर्डिंग और 200 पेड़ काटने के साथ इसमें बड़ी साजिश की बू आती है। फिर हाईकोर्ट में, अल्पसंख्यक आयोग में शिकायत तथा समाज के कड़े विरोध के बाद प्रमुख ट्रस्टियों की बुद्धि सही नहीं हुई।
पूरी जानकारी चैनल महालक्ष्मी के एपिसोड नं. 3482, 3489, 3505 में देखें।

चैनल महालक्ष्मी चिंतन : इस शर्मनाक कदम ने जैन मंदिरों – तीर्थों के लिये अपने ही लोगों से सावधान रहने की घंटी बजा दी है। कई कमेटी वाले कुर्सी से चिपक कर, वहीं कई ट्रस्टी बने रहकर समाज के दान पैसे से व्यक्तिगत आकांक्षायें पूरी करते दिखने लगे हैं। कोई स्वप्न में नहीं सोच सकता, जिन्हें मंदिर की सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी, वो ही लुटेरे बनते जा रहे हैं। अब हर समाज को अपनी कमेटी और ट्रस्टियों पर भी कड़ी नजर रखनी होगी और कोई भी गलत कदम दिखे, तो मिलकर तुरंत विरोध करें, समाज हित में, मंदिर हित में।