गणतंत्र दिवस पर दिल्ली की परेड देखी, पर गिरनार की चौथी टोंक पर क्या यह देखा?

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06 फरवरी 2026 / फाल्गुन कृष्ण तृतीया /चैनल महालक्ष्मी और सांध्य महालक्ष्मी/ शरद जैन
26 जनवरी, गणतंत्र दिवस, वर्ष का पहला राष्ट्रीय पर्व और भारतीय संविधान लागू होने का दिवस, जिस दिन दिल्ली के राजपथ से लालकिला तक भारत की शौर्य गाथा, देश की रक्षा, सांस्कृतिक-सामाजिक विकास की झांकी का प्रदर्शन होता है, दिल्ली की यह परेड देश में ही नहीं विदेशों में भी देखी जाती है।

पर इस बार शायद आजादी के 78 सालों में और संवैधानिक देश के 76 वर्षों में ऐसा पहले नहीं हुआ होगा, जब दिल्ली से गणतंत्र की गाथा और दूसरे बड़े सिद्धक्षेत्र गिरनारजी पर वंदना कुछ ऐतिहासिक इरादे के साथ।

आचार्य श्री सुनील सागरजी का संघ, जहां प्रवेश के तीसरे ही दिन 15 जनवरी को वंदना को गया था, 2018 के बाद दूसरी बार इस क्षेत्र पर प्रवेश था। दिल्ली के ऋषभ विहार से उन्होंने गिरनार तीर्थ की आवाज उठाई, यहां की यात्रा के लिये प्रेरित किया, कहा भी तीर्थ तभी ही सुरक्षित रहेंगे, जब तक तुम वहां की यात्रा करते रहोगे। चैनल महालक्ष्मी अगर आज तीर्थों की सुरक्षा के लिये थोड़ी बहुत आवाज उठा रहा है, तो उन्हीं की प्रेरणा से। भारतवर्षीय दिगम्बर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी को भी समय-समय पर उनसे ही निर्देशन मिलता रहा है, अन्य साधु-संतों के साथ।

26 जनवरी को सैकड़ों श्रावकों के साथ संघ भी चढ़ा, फिर उसी चौथी टोंक पर, जहां अच्छे-अच्छे पर्वतारोही भी बिना सहारे के नहीं चढ़ सकते। जहां एक सेमी. भी पैर फिसले तो जिंदगी खत्म, कुछ भी न मिले। फिर भी संघ के साधु चढ़े और सैकड़ों श्रावक भी। यह पहली बार नहीं था। पर फिर भी यह गणतंत्र दिवस बहुत खास था। इस बार वहां भगवान प्रद्युम्न स्वानी की टोंक पर जैन ध्वज का फहराना, देख हर दिल आनंदित जरूर हुआ। वहां पर उकेरा जैन ध्वज भी उस फहराते जैन ध्वज से सजीव हो गया था।

निश्चित ही गणतंत्र और अध्यात्म का अद्भुत संगम, जहां एक ओर सम्पूर्ण भारत अपने तिरंगे रूपी राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान में नतमस्तक है, वहीं गिरनार की इन पवित्र चोटियों पर जैन पंचरंगे ध्वज के साथ राष्ट्र की सुख समृद्धि हेतु नेमिनाथ भगवान की इन वादियों में प्रार्थना गूंज रही है।