एक वर्ष में हमारे द्वारा जितना भी अशुद्धि के माध्यम से पाप बंध होता है,उसके निराकरण करने के लिए हमें चंदनाषष्ठी व्रत करना चाहिए। यह व्रत भाद्रपद कृष्ण षष्ठी के दिन आता है(रक्षाबंधन के छठवे दिन)।यह व्रत घर के प्रत्येक सदस्य (जो ८ वर्ष के ऊपर है) को करना चाहिए।यह व्रत उपवास या फिर एकासन से करें।
चंदनाषष्ठी व्रत की पूजा
इस व्रत के दिन ६ पूजा की जाती है।
१] समुच्चय पूजा या नवदेवता पूजा
२] चौबीस तीर्थंकर भगवान पूजा
३]मूलनायक भगवान पूजा
४] भगवान चंद्रप्रभू पूजा
५] भगवान नेमिनाथ पूजा
६] भगवान महावीर स्वामी पूजा
नोट- अगर तीन तीर्थंकरो में से कोई मूलनायक भगवान है तो वहां पर हमें सिध्द भगवान की पूजा करनी चाहिए।
चंदनाषष्ठी व्रत के जाप
१)श्री णमोकार महामन्त्र की १ माला
२) ऊँ ह्रीं अनंतानंत श्री परम सिध्देभ्यो नमो नमः की १माला
३) ऊँ ह्रीं अर्हम् श्री चंद्रप्रभू जिनेंद्राय नमः की १ माला
४) ऊँ ह्रीं अर्हम् श्री अरिष्ट नेमिनाथ जिनेंद्राय नमः।
इसके अलावा धर्ममय दिन बिताने का प्रयास करें और अपने जीवन को सार्थक करें।
इस बार यह व्रत 28-8-2021 है














