यह प्रतिमा तीर्थंकर के समवसरण में विराजमान होने की धोतक है, क्यूंकि समवसरण में विराजमान भगवान को दसों दिशाओं से देखा जाता है तो भी भगवान की मुखाकृति स्पष्ट दिखती है ।इस तरह की कलाकृति की प्रतिमाऐं अब नही बनती है।
12 मार्च क्यों है सभी के लिए खास- भारत की पहचान...
चैत्र कृष्ण नवमी : इस कल्याणक को मनाना, कभी भूल ना जाना, तीर्थंकर श्री ऋषभनाथ, भरत चक्रवर्ती, ब्राह्मी की जन्मतिथि
॰ महज याद रखना नहीं,...

















