शिखरजी वंदना में दो दिन में दो यात्रियों की मृत्यु

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16 सितम्बर 2025 / आश्विन कृष्ण दशमी/चैनल महालक्ष्मीऔर सांध्य महालक्ष्मी/ शरद जैन /
अनादिनिधन तीर्थ श्री सम्मेदशिखरजी में 13 व 14 सितम्बर को लगातार दो दिन मध्यप्रदेश के दो तीर्थयात्रियों की मृत्यु हो गई।

शनिवार 13 सितंबर को भोपाल से 25 यात्रियों का समूह वंदना करने गया। उस समूह में से एक अमर जैन जी, जिन्होंने फरवरी में मुनि श्री प्रमाण सागरजी के सान्निध्य में टीटी नगर, भोपाल में पंचकल्याणक करवाया था, ने सान्ध्य महालक्ष्मी को बताया कि उनके बहनोई विनय बजाज जैन जी का शीतल नाले के पास सीढ़ी चढ़ते दिल का दौरा पड़ा, वहां से डोली के द्वारा नीचे लाये, जहां सेवायतन में दिखाया, पर उनकी मृत्यु हो चुकी थी। लगभग 60 वर्षीय विनय जी उस पंचकल्याणक में इन्द्र बने थे। उनके साथ उनकी पत्नी संध्या जैन भी चल रही थीं। (सोशल मीडिया में उनके बाइक से गिरने से मृत्यु की पोस्ट किसी ने गलती से डाल दी)।

उन्होंने बताया कि उनका अंतिम संस्कार भी शिखरजी में ही अगले दिन किया गया तथा वहां सभी से सहयोग मिला। फिर अमर जैन जी ने सान्ध्य महालक्ष्मी से अपना एक सुझाव शेयर किया कि जब सभी बड़े तीर्थों पर सरकार व प्रशासन उचित मेडिकल सुविधायें उपलब्ध कराता है तो यहां जैन तीर्थ पर क्यों नहीं? पर्यटक के नाम पर वो कमाई तो करना चाहती है, पर सुविधायें नहीं देना चाहती, ऐसा क्यों?

रविवार 14 सितम्बर को जबलपुर से आये यात्रियों के साथ पनागर के 50-55 वर्षीय पदम जैन मोदी प्रात: डेढ़ बजे के लगभग कलिकुंड से आगे गिर गये। दो-ढाई के बीच उन्हें सेवायतन लाया गया, वहां से गिरडीह रैफर कर दिया गया, पर उनको बचाया नहीं जा सका। परिजन अंतिम संस्कार के लिये पनागर ले गये।

15 सितंबर को पदम -मनीषा मोदी जी की चारों बेटियों ने अर्थी को कंधा दिया। सैकड़ों लोगों ने उस भावुक दृश्य को देखा। जब उनका कोई पुत्र न होने के कारण चारों बेटी – सुशीमा, मानसी, महिमा, परी अपने कंधों पर उठाकर मुक्तिधाम लेकर गई और मुखाग्नि दी। लोग देखकर हैरान थे कि वे कंधे पर नहीं, पिता की अर्थी को अपने-अपने सिर पर लेकर चल रही थी और छोड़ा भी नहीं, किसी को नहीं दिया। उनका कहना था कि जब पिताजी ने प्रारंभ से अंत तक हमारा साथ नहीं छोड़ा, तो हम कैसे छोड़ दें। धन्य हैं ऐसी बेटियां।

पूरी जानकारी चैनल महालक्ष्मी के एपिसोड नं. 3477-79 में देख सकते हैं।