यह स्थान पुडुकोट्टई से 2 km की दूरी पर है। बताते है यह प्रतिमा श्री मुनिसुव्रतनाथ भगवान की है। वर्तमान में जैनेत्तर लोग उनको मुनीश्वर बोलकर उनकी विधी से पूजा-आराधना करते है, अभी मल मास में उनकी विशेष आराधना करते है।
आस्था की अमर मशाल: दानवीर सेठ माणिकचंद और तीर्थक्षेत्र कमेटी के...
8 जून 2026 / जयेष्ठ कृष्ण अष्टमी /चैनल महालक्ष्मी और सांध्य महालक्ष्मी/
आस्था का सवा सौ साल पुराना पहरा और मौन साधना की अनकही कहानी......



















