तीर्थ क्षेत्र पर बिन बोलियां के हुई वर्षायोग स्थापना, सांध्य महालक्ष्मी को कहा लेखन का बादशाह !

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19 जुलाई 2025 / श्रावण कृष्ण नवमी/चैनल महालक्ष्मीऔर सांध्य महालक्ष्मी/ शरद जैन /
संतों का तीर्थ पर हो चातुर्मास और इस भावना को साकार किया आचार्य श्री वसुनंदी जी ने, जब उन्होंने रविवार, 13 जुलाई को, अहिछत्र पारसनाथ अतिशय दिगंबर जैन मंदिर, रामनगर किला, बरेली में अपने 37वें वर्षयोग की ससंघ स्थापना की। आचार्य जी ने स्थापना के समय स्पष्ट कहा कि यह वर्षायोग आत्म साधना के लिए, जिनशासन की प्रभावना के लिए और चिंतन के साथ लेखन पर समर्पित रहेगा। उनके मुखारविंद से उपसंघों के वर्षायोगों की जानकारी भी दी गई। इस अवसर पर जो अच्छी बात रही कि किसी भी कलश के लिए बोली नहीं बोली गई, वही केवल एक कलश,तीर्थ सुरक्षा कलश के लिए जरूर बोली हुई। कारण था कि उसमें पूरे समाज को सुअवसर दिया जाए कि तीर्थ सुरक्षा के लिए अपनी चंचला लक्ष्मी का पुण्यार्जन में कौन सदुपयोग करना चाहता है।

आचार्य श्री ने कहा कि जैन चतुरविद संघ में चारों मुनि, आर्यिका, श्रावक, श्राविका मजबूत स्तंभ हैं, जिनके बिना जिनशासन आगे नहीं बढ़ सकता, जैसे आपके वाहन में चारों में से कोई पहिया हट जाए, तो वह चल नहीं सकता। प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ जी के समय से वर्तमान जिन शासन नायक तक यह चारों विद्यमान है। वीतरागियों की गति भी रागियों के राग से ही होती है। साधु-साध्वियों का विहार भी श्रावक-श्राविकाओं के कारण ही संभव है।

समाज को सावधान करते हुए उन्होंने कहा कि भरत चक्रवर्ती के पास मुनिराज को आहार देने का, सामायिक करने का, धर्म ध्यान करने का, जिनवाणी श्रवण करने का, समय था। पर आज आप लोग इन धार्मिक कार्यों के लिए कहते हो, कि समय नहीं है। यह बहुत हैरान करने वाला है, ऐसे समय में साधुओं की महती आवश्यकता है। ध्यान रखना पैसा कमाया जा सकता है भेजे से, दान दिया जाता है कलेजे से। पैसा कमाना आज बहुत बड़ी बात नहीं है, पर जो पैसे का सदुपयोग करता है, वही पुण्य आत्मा है, वही जिसने धन पुण्य कार्यों में लगाया है। आज जब बड़ी-बड़ी समाज भी एक साधु का चातुर्मास करने में किंतु-परंतु करती है, वही आज इस तीर्थ पर उनके बारंबार निवेदन पर हमारा संघ यहां वर्षायोग कर रहा है। कलश स्थापना करने की वर्षायोग स्थापना के समय, समाज की परंपरा है और जैसे बरसात का पानी धरा को शुद्ध करता है, वैसे ही संतों की वाणी वर्षा, तुम्हारे अतरंग को शुद्ध करती है।

इस अवसर पर उनके द्वारा कुछ पुरस्कारों की घोषणा हुई, जिसमें एक पुरस्कार सत्य, सटीक लेखन व बोलने के लिए सांध्य महालक्ष्मी व चैनल महालक्ष्मी के निदेशक श्री शरद जैन को भी उनके कर कमलोें से लेखन के बादशाह के रूप में प्राप्त हुआ। यह सम्मान पूरे समाज को एक सही दिशा में जागरूकता के लिए, तीर्थ की सुरक्षा के लिए, हमेशा कलम और आवाज, बिना किसी दबाव के, सतत चलती रहे।