800 वर्ष प्राचीन टीकमगढ़ तीर्थ पर कब्जे की कोशिशें, झड़प, कई घायल

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17 फरवरी 2026 / फाल्गुन कृष्ण अमावस /चैनल महालक्ष्मी और सांध्य महालक्ष्मी/ शरद जैन
मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र के टीकमगढ़ के पपौरा चौराहा स्थित बड़ा दिगंबर जैन मंदिर से जहां मंदिर की सीढ़ियों का निर्माण शुरू किया, पर उसको रोकने, जैन मंदिर की जमीन हड़पने की साजिश में मारपीट शुरू की, जिसमें कई को चोटें आर्इं और एक जैन का अभी भी अस्पताल में इलाज चल रहा है।

बड़ा मंदिर के अध्यक्ष राजेन्द्र जैन ने चैनल महालक्ष्मी को बताया कि 867 वर्ष प्राचीन इस मंदिर पर जाने के लिये नीचे और ऊपर दो तरफ से सीढ़ियां हैं, यहां पर जब भी दर्शनार्थी आते हैं, तो उन पर अनर्गल टीका-टिप्पणी की जाती है। इस मंदिर के आसपास कोई जैन परिवार नहीं है और कुछ ब्राह्मण परिवार अवरोध ही नहीं डालते, बल्कि नीचे प्रवेश पर तो, दरवाजा लगाकर एक बाधा ही खड़ी नहीं कि, बल्कि ऊपर से आती तीन सीढ़ियां भी तोड़ दी। इस मंदिर में 8 प्राचीन वेदियां हैं। वहीं पर मंदिर का एक भूखण्ड है, जिसके पूरे कागज मंदिर के नाम पर हैं, इसके बावजूद उस पर कब्जा करने की लगातार कोशिशें जारी हैं।

अब 12 फरवरी को जब टूटी सीढ़ियों का जैन समाज की ओर से निर्माण करवाया जा रहा था, तब दूसरे पक्ष ने विरोध में झड़प और मारपीट शुरू कर दी। ऋषि और अभिषेक जैन घायल भी हो गये, एक अभी भी अस्पताल में इलाज करवा रहे हैं। पुरानी बस्ती के कुछ लोग जिनकी जैन मंदिर के भूखंड पर कब्जे की कोशिशे की जा रही हैं, वही सीढ़ियों के निर्माण रोककर मंदिर प्रवेश पर भी रोक लगाने की कोशिश कर रहा है।

पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभालने की कोशिश जरूर की, पर यह सर्वविदित है यह झड़प, रुकावट, मारपीट इस प्राचीन दिगंबर जैन मंदिर से जैनों को रोकने तथा मंदिर के भूखंड को कब्जाने की कोशिश न करने लगे।

इसकी पूरी जानकारी चैनल महालक्ष्मी के एपिसोड नं. 3627 में देख सकते हैं।

चैनल महालक्ष्मी चिंतन : जैन मंदिर और उनके भूखण्डों पर कब्जा करने की कोशिशें लगातार सामने आ रही हैं और जहां जैन लोगों का अभाव है, वहां तो दबाव और झगड़े के रूप में विवाद खड़े कर दिये जाते हैं। 800 वर्ष प्राचीन यह जिनालय उसका जीवंत उदाहरण है। ऐसे मामलों से शिक्षा लेते हुए सभी जिनालयों को अपनी सम्पत्ति के दस्तावेज पूरे रखने होंगे। पक्की बाऊण्ड्री बनी हो तथा सरकारी विभाग में अपने दस्तावेज समय-समय पर चैक करते रहें। कहीं गंगापुर सिटी की तरह अपने नाम के कागज होते हुए भी मंदिर की जमीन के कोई अवैध कागज बनवाकर नापाक कोशिशें करें।