26 दिसंबर 2025 / पौष शुक्ल षष्ठी /चैनल महालक्ष्मी और सांध्य महालक्ष्मी

चार-पांच महीने की शांति के बाद एक बार फिर अंतरिक्ष पार्श्वनाथ शिरपुर तीर्थ वेदी कब्जाने की कोशिशें से सुर्खियों में आ गया है। वहीं की पूरी जानकारी चैनल महालक्ष्मी को देते हुए ब्र. तात्या भैय्या जी ने बताया कि 15 दिसम्बर को दोपहर 2 बजे के लगभग कुछ श्वेताम्बर भाई एक श्वेताम्बर मूर्ति को कपड़े से ढककर लाये और उसे सैकड़ों साल प्राचीन खड्गासन पारस प्रभु की प्रतिमा के सामने रख दिया। ध्यान रहे यह तीर्थ दिगंबर स्वरूप है तथा सभी वेदियों पर दिगंबर प्रतिमायें विराजित हैं, सब पर लिखा भी हुआ है, केवल एक वेदी को विवादित बनाकर दोनों सम्प्रदाय अदालत में हैं। यहां दशकों से चढ़ने वाली ध्वजा का अधिकार भी दिगंबर सम्प्रदाय के पास है। यहां रखा घण्टा, वाद्य, अल्मारी, आदि सभी स्थानों पर दिगम्बरत्व लिखा हुआ है।

ब्र. तात्या भैय्या जी ने बताया कि इस तीर्थ पर क्षेत्रपाल वेदी का अलग से तलघर है, उसमें पार्श्वनाथ तीर्थंकर की एक वेदी है, जिस पर केवल एक खड्गासन पारसप्रभु की प्रतिमा दिगंबरत्व रूप में सैकड़ों सालों से विराजित है। पर अब उसके सामने एक छोटी श्वेताम्बर प्रतिमा रखकर कब्जा करने का सीधा मकसद दिख रहा है। पहल थाने में दोनों पार्टियों की मीटिंग में यह तय होने के बाद भी, क्षेत्रपाल जी को बार-बार चादर वगैरह से ढककर कब्जा करने की कोशिशें की जा रही हैं। हमने उस समय थाने में शिकायत भी की थी, लेकिन प्रशासन इस पर कुछ नहीं कर रहा है।

प्रशासन से मीटिंग में दोनों पार्टियों के कैमरे लगाने का तय होने के बाद भी, दिगंबर सम्प्रदाय के पक्ष के कैमरे की डिवाइस काट दिया गया। इस बारे में जिला प्रशासन से कई बार शिकायत करने के बाद भी कुछनहीं हुआ। ध्यान रहे पिछले 4-5 महीने दोनों सम्प्रदायों में शांति थी, लेकिन पिछले महीने से परेशानियां बढ़ने लगीं। बिना कारण दिगंबर वेदियों पर श्वेताम्बर प्रतिमायें रखना गलत है। क्या वो कुछ बड़ा तांडव करने वाले हैं, इसकी शंका सूत्रों के अनुसार जताई गई है। इस बारे में पूरी जानकारी चैनल महालक्ष्मी के एपिसोड नं. 3573 में देख सकते हैं।
चैनल महालक्ष्मी चिंतन : गुरुवर आचार्य श्री विद्यासागरजी ने ताला इसलिए नहीं खुलवाया था कि भाई-भाई पर सीधे या परोक्ष रूप में हमला करें। जब एक ही वेदी को विवादित बनाया है, फिर क्यों शेष पर भी बदलाव के कदम देखे जा रहे हैं। आज एक होने की आवश्यकता है, खण्ड-खण्ड होने की नहीं। एक के साथ अन्य कमेटियों पर भी विवाद करना, बदलने की कोशिश करना जैन स्वस्थ परम्परा के विपरीत है। कुछ समय की शांति के बाद, वातावरण को अशांत करना, जैन एकता पर कुठाराघात है। सबको एक होना होगा, एक दूसरे के प्रति कब्जे जैसी बातों से दूर रहना होगा, वरना बिखरते समाज के विघटन में ज्यादा समय नहीं लगेगा।















