॰ मोक्ष सप्तमी पर इस बार 35 हजार लोगों ने की वंदना
॰ पहली बार 19 घंटे तक यात्रियों की कतार
॰ बाइक से कई फिसले ॰ मेडिकल सुविधाओं से कोई बड़ी दुर्घटना नहीं
॰ पार्टिशन की बल्लियां तोड़ी, महिलाओं से धक्का-मुक्की
॰ पहली बार हुआ देवों और भक्तों में कड़ा मुकाबला

7 अगस्त 2025 / श्रावण शुक्ल त्रयोदशी /चैनल महालक्ष्मीऔर सांध्य महालक्ष्मी/ शरद जैन /
श्री सम्मेदशिखरजी में मोक्ष सप्तमी से पहले एक पखवाड़े में दो बड़ी घटनाओं ने पूरे जैन समाज को चिंतन पर मजबूर कर दिया। पहले चन्द्रप्रभ की ललित कूट पर एक यात्री ने चरणों पर नारियल फोड़ा, जिससे बड़ा नुकसान होने से बाल-बाल बचा और फिर मोक्ष सप्तमी से एक दिन पहले दोपहर 12 से एक बजे के बीच एक अन्य यात्री ने पारस प्रभु की स्वर्णभद्र कूट में चरणों पर नारियल फोड़ने की कोशिश में, उस पर लगा शीशा ही तोड़ दिया। हैरानी होती है कि अपनी भावनाओं को इस रूप में प्रकट करना, निश्चित ही टोंकों की सुरक्षा के लिये खतरा है।

19 घंटे लगातार करते रहे दर्शन
मोक्ष सप्तमी में तो इस बार यात्रियों का तांता रात्रि 8 बजे चढ़ना शुरू हुआ और दो बजे ही सैकड़ों लोग वहां पहुंच गये। हर बार की तरह 5 बजे खुलने वाले द्वार को इस बार साढ़े तीन बजे खोला गया। सबसे अनोखी बात रही कि सैकड़ों यात्रियों के साथ पहले एक श्वान ने भी वहीं सीढ़ियों से दर्शन किये। और दर्शन का यह सिलसिला पहली बार रात 9 बजे तक चला यानि 19 घंटे तक लगातार दर्शन।

देवों और भक्तों के बीच कड़ा मुकाबला
एक माह से शिखरजी में बारिश चल रही है, पर पिछले 50 वर्षों में मोक्ष सप्तमी पर जो दृश्य देखने को मिला, वह आज तक किसी ने नहीं देखा। रात 3 बजे से ही जैसे इन्द्रों ने डेरा डाल दिया और उन्होंने अभिषेक करने की ठान ली। सूरज को निकलने नहीं दिया। तेज वर्षा के बावजूद यात्रियों का तांता नहीं रुका। पहले आधा घंटे की कतार जो 11 बजे तक 3 घंटे की कतार में बदल गई। चन्द्रप्रभ टोंक पर भी कुछ ऐसा ही हाल था, लगभग 35 हजार लोगों ने इस बार वंदना की।

बाइकों से कई फिसले, कोई बड़ी दुर्घटना नहीं
तेज बरसात से वाहन का रास्ता काफी टूट गया। इस बार बाइकों की संख्या सबसे ज्यादा थी, और कई गिरे भी। एक के पैर में चोट आई, जिसे गिरडीह अस्पताल भेजा गया। प्राथमिक चिकित्सा केन्द्रों को देख रहे मितेश जैन ने बताया कि एक दिन पहले तलहटी में एक को पेरालिसिस अटैक आया, उसकी तड़के 3 बजे फर्स्ट एड कर अस्पताल रैफर किया। बाइकों से गिरने वालों की प्राथमिक चिकित्सा की।

ठंड व तेज वर्षा से 40 से ज्यादा बच्चे बीमार
लगातार बारिश व तेज हवाओं के चलते ठण्ड बढ़ गई, जिससे 6 माह से 10 वर्ष तक के 40 से ज्यादा बच्चे बीमार पड़ गये। उनका शरीर सफेद पड़ गया। उन सबको मेडिकल सुविधायें दी गई और इस पावन धरा पर कोई बड़ी दुर्घटना की कोई सूचना प्राप्त नहीं हुई।
पहली बार छत्रों की सुविधा
पारस टोंक पर पहली बार यात्रियों को छत्र चढ़ाने की सुविधा भी मिली। टोंक के नीचे ही तीर्थक्षेत्र कमेटी ने नि:शुल्क लाडू की व्यवस्था की थी। लंबी लाइन में लगे रहने का कारण अनेक यात्री लाडू व्यवस्था का लाभ नहीं ले पाये।

गुफा के दर्शन भी करने पड़े बंद
तेज बारिश के बावजूद बढ़ती भीड़ के कारण प्रात: 9 बजे से एक बजे के बीच गुफा के द्वार को बंद कर दर्शन रोकने पड़े। व्यवस्थापकों ने चैनल महालक्ष्मी को बताया कि सीढ़ियों पर कोई दुर्घटना घटना न हो, इसलिये गुफा दर्शन को रुक-रुक कर कई बार द्वार बंद कर रोकना पड़ा।
महिलाओं से धक्का मुक्की, पार्टीशन बल्लियां टूटी
मितेश जैन ने बताया कि इस भीड़ में कुछ लोगों ने महिलाओं से धक्का-मुक्की भी की, जिन्हें कतार से बाहर निकाला। भीड़ इतनी ज्यादा थी कि आने-जाने के रास्ते को बनाने के लिए लगाई गई बल्लियां तक टूट गई।
सैकड़ों ने साझा किये वंदना के अनुभव
चैनल महालक्ष्मी की टीम तीर्थक्षेत्र कमेटी के कार्यालय के आगे 5 घंटे बैठ कर सबसे यात्रा के अनुभव लेती रही। किसी भी तीर्थयात्री ने कोई गंभीर शिकायत नहीं की। बाइकों से बहुत लोग परेशान दिखे। तेज बरसात के बावजूद सब वंदना कर आनंदित दिखे। तीर्थक्षेत्र कमेटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जम्बू प्रसाद जैन तथा 125 वर्ष की कमेटी के अध्यक्ष जवाहर लाल जैन जी ने अन्य कमेटी सदस्यों के साथ तीन दिन पूर्व से ही सभी गतिविधियों पर नजर कर पूरी तैयारी की। इस बारे में पूरी जानकारी चैनल महालक्ष्मी के एपिसोड नं. 3420, 21, 22 में देख सकते हैं।
चैनल महालक्ष्मी चिंतन : इस बार तेज वर्षा के बावजूद यात्रियों के उत्साह ने पिछले सब रिकार्ड तोड़ डाले। तीर्थक्षेत्र कमेटी की पूर्व तैयारियों व प्रभु की कृपा से कोई बड़ी दुर्घटना नहीं घटी। तीर्थक्षेत्र कमेटी को एक दानपात्र गुफा चरण में भी रखना चाहिए। वापस आने की पुरानी सीढ़ियों के जीर्णोद्धार जरूरी है। बाइकों पर नियंत्रण आवश्यक है, वहीं इस बार दुकानों पर यात्री कम संख्या में दिखे। जगह-जगह टूटा मार्ग मरम्मत की ओर संकेत कर रहा है। हां, इस बार बंदरों की बारात अभिनंदन टोंक पर तथा वंदना मार्ग पर नहीं दिखी। कुछ अन्य टोंकों पर बंदर थे, लेकिन वे शांत तथा सामग्री खाने में मग्न थे, ऐसा शायद बरसात के कारण था। पहाड़ के जीर्णोद्धार के लिये यात्री तीर्थक्षेत्र कमेटी के कार्यालय में दान दें, इस पर ज्यादा जागरूक करने की आवश्यकता है। यात्रा से पहले चैकअप कैम्प की सुविधा भी जी जाये तो बेहतर रहेगा।
















