॰ 750 गांवों के लाखों की रानी को बचाने के लिये 12 घंटे में 45 किमी लम्बी पगयात्रा
॰ मुख्यमंत्री आये मठ के पक्ष में
॰ राजनीति चालों से संत सावधान
॰ मठों की हजार वर्ष परम्परा तोड़कर कब्जे की साजिशें
7 अगस्त 2025 / श्रावण शुक्ल त्रयोदशी /चैनल महालक्ष्मीऔर सांध्य महालक्ष्मी/ शरद जैन /

तारीख 04 अगस्त, सुबह सूरज के उगने से पहले 5 बजे नंदणी मठ से एक कारवां शुरू हुआ, वो बढ़ता गया, फैलता गया, 5-10 हजार नहीं, 50-60 हजार नहीं, 4 लाख के पार और वो भी उस फरिश्ते के लिये जो 750 गावों की रानी थी। 95 फीसदी इंसानों से बेहतर, जो रात में नहीं खाती, जी हां, 90 फीसदी इंसानों से बेहतर, जो रोज भगवान के दर्शन करती है। देव-दर्शन नहाकर, ऐसे विरले ही होते हैं। उम्र 37 साल के आसपास यानि अभी युवा, इंसानों की तरह 60-70 साल तक की उम्र की जिंदगी। 3 साल की बच्चो को 35 साल तक लाड़-प्यार से बढ़ा किया। छोटी-मोटी बीमारी से भी लड़ी। पर इस बीच उस पर किसी का दिल आ गया, उसको लाने के लिये किसी को प्रस्ताव के साथ भेजा भी। पर उसके स्वामी ने हर बार लौटा दिया। हर 3-4 महीने में प्रस्ताव आता, ठुकरा दिया जाता। फिर तो उसमें खोट निकाले गये, और धन-बल के वजन में उसे हथिया लिया गया। और रविवार 03 अगस्त को उसको लाने के लिये नंदणी मठ से कोल्हापुर जिलाधिाकरी कार्यालय तक की 45 किमी लंबी पदयात्रा चली और 12 घंटे बाद ज्ञापन लेकर पहुंची। जी हां, बस एक पैगाम ‘हमारी माधुरी, हमें वापस दो’। यह जीवंत कथा है नंदणी मठ में भरत-बाहुबली हाथी के बाद 3 वर्ष की उम्र से आई माधुरी, आज वो 32 साल की हो गई थी। उस महारैला में हिंदू, जैन, यहां तक कि मुस्लिम औरअन्य भी थे, छोटे से लेकर बड़े तक। उसका रिश्ता सभी से था। जैनों के हर कार्यक्रम के साथ, राष्ट्रपति-हनुमान आदि सभी महोत्सवों में, मोहर्रम के लिए हैदराबाद तक जाती, और छत्रपति शाहू महाराज के लिये तो वह सबसे आगे रहती।

माधुरी पर कैसे पड़ी बुरी नजर
इस बारे में पूरा घटनाक्रम बताया नंदणी मठ के व्यवस्थापकों में से एक ने चैनल महालक्ष्मी को। 2021 में कोरोना के बाद पेटा की खुशबु गुप्ता, एक और अधिकारी के साथ आई और यहां स्वामी जी से बात की, कि हम आपको इलैक्ट्रानिक हाथी देते हैं, इसे हमें दे दो, हम कुछ सहायता भी करेंगे। स्कूल-कॉलेज के लिये डोनेशन का भी आॅफर दिया। पर घर की बेटी, परमात्मा से मिलाने वाली को कौन देता है? आॅफर अस्वीकार। पर हर 3-4 महीने में किसी न किसी लिंक से वही प्रस्ताव आता, स्पष्ट मना कर दिया जाता। यह सब मौखिक रूप से चलता रहा। फिर 2022 के मध्य में माधुरी के बीमार होने का तर्क देकर हाई पावर कमेटी को शिकायत कर दी। हमसे पूछा नहीं, एक तरफा आर्डर देकर वन्तारा को देने को कहा। हाइकोर्ट में मठ ने स्टे ले लिया। 04 अप्रैल 2024 को एक सब कमेटी बनाकर जांच करने को कहा। 12 जून को जांच हुई, 10 बातों पर जांच हुई, कुछ सुझाव दिये। 2-3 महीने में वन विभाग द्वारा जांच हुई। दिये सुझावों को लगभग पूरा कर लिया। एचपीसी की फिर सुनवाई हुई। कोल्हापुर से नागपुर एक अलग रिपोर्ट भेज दी गई। दिसम्बर 2024 में माधुरी को वन्तारा भेजने का निर्देश दिया गया। हाइकोर्ट ने एकबार फिर मठ की बात सुनने को कहा। फिर एचपीसी ने जून 2025 में माधुरी को वन्तारा भेजने को कहा। हाइकोर्ट ने 16 जुलाई को पेटा के पक्ष में निर्णय देकर वन्तारा के राधाकृष्ण टेम्पल वेल्फयेर ट्रस्ट को सौंपने का आदेश दिया। बस तभी से पेटा की गाड़ियां सांगली पहुंच गई। सुप्रीम कोर्ट अपील की गई, पर डबल बेंट ने 28 जुलाई को 3 बजे वन्तारा भेजने का आदेश दिया।

क्या हुआ 28 जुलाई को
एक घंटे में पुलिस की टीम लेकर पेटा की गाड़ियां वहां पहुंच गई। और तब हजारों लोग वहां पहुंच गये। सबकी आंखों में आंसू थे, जिनसेन स्वामी फफक कर रो पड़े। आज तक रुआंसा न होने वाली माधुरी की आंखें भी आंसू बहाने लगी। हर कोई रो रहा था। उस चार घंटे की विदाई में सबने उसे फल आदि दिये खाने को, पर उसने एक बूंद पानी भी नहीं लिया। यह भावपूर्ण दृश्य हर के दिल को छू गया और उसकी विदाई के बाद 03 अगस्त को लाखों लोग सड़क पर उतर आये।

मुख्यमंत्री कार्यालय में खलबली
हर तरफ विरोध, संतों की आवाज, रिलायंस व जिओ के बायकॉट के सिलसिले के बाद कोल्हापुर की सड़कों पर जब लाखों उतरे, तो मुख्यमंत्री कार्यालय तक खलबली मच गई। मंगलवार 05 अगस्त को विशेष बैठक बुलाई, जिसमें रैली की अगुवाई करने वाले पूर्व सांसद राजू शेट्टी ने जोरदार रूप में पक्ष रखा। चैनल महालक्ष्मी को उन्होंने बताया कि मीटिंग में चार भट्टारकजी – जिनसेन, धर्मसेन, लक्ष्मी सेन व सौरभ सेन भी मौजूद थे। मुख्यमंत्री ने एट्रोनी जनरल के सामने सभी तथ्य रखने की बात कर सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन की बात कही और कहा कि सरकार भी आपके साथ खड़ी होगी। रामू शेट्टी ने वन्तारा की कार्यवाई पर कई प्रश्न खड़े किये और अजित पवार ने भी समर्थन किया।
संतों का निर्णय
वहीं जैन हिंदू संतों की 05 अगस्त को ही जूम मीटिंग हुई जिसमें गणधराचार्य कुंथु सागरजी, आचार्य सुनील सागरजी, आचार्य विशुद्ध सागरजी, आचार्य गुणधरनंदी जी सहित अनेक आचार्य और कई बड़े हिंदू संतों ने भी चैनल महालक्ष्मी के साथ विचार रखे। एकमत निर्णय हुआ कि वन्तारा माधुरी को वापस करें। रिव्यू पिटीशन में निर्णय पलटना मुश्किल है। अब अगर ऐसा नहीं हुआ, तो आंदोलन को और विस्तृत कर कर्नाटक से मुंबई तक किया जाएगा।
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इस बारे में पूरी जानकारी चैनल महालक्ष्मी के 3424 व 3425 एपिसोड में देख सकते हैं।


चैनल महालक्ष्मी चिंतन : यह एक माधुरी का निर्णय नहीं। जैन समाज पर सवालिया निशान है, जो जिओ और जीने दो का पालन करते हुए चींटी तक को नहीं तंग करता। देश की तीन चौथाई गौशालायें चलाता है। मठों की हजार वर्ष से प्राचीन परम्परा पर निशाना है। नोट के दबाव में सत्ता भी झुक जाती है। वन्तारा चिड़ियाघर नहीं, रिहबिलेशन सेन्टर है। क्या उससे पूछा जाएगा, अब तक कितने पशु लेकर वापस किये। बाकी का क्या हुआ? पेटा पर भी कई बार आरोप लग चुके हैं। ये दोनों जैनों को जीव दया का पाठ पढ़ाएंगे? आज एक पर निशाना लगाकर, सभी जैन-हिंदू मठों पर कब्जे की यह एक शुरूआत लगती है।















