अब सम्मेदशिखर जी पर संथाल आदिवासियों ने ठोका दावा, मुख्यमंत्री का आश्वासन भी

0
2817

॰ दिगंबर संतों के प्रति अपशब्दों के बाद, अब झारखंड मुख्यमंत्री से मिलकर अपना अधिकार संथाल आदिवासियों ने जमाया
॰ पवित्र अहिंसा स्थल पर बलि की प्रथा क्यों?
13 जून 2025 / आषाढ़ कृष्ण दौज/चैनल महालक्ष्मीऔर सांध्य महालक्ष्मी/ शरद जैन /

08 जनवरी 2023 को लोबिन हेम्ब्रोम (झामुमो के पूर्व विधायक) ने पहले प्रेस कान्फे्रंस में, फिर 10 जनवरी 2023 को मधुबन में रैली, उसके बाद फुटबाल ग्राउंड में दिगंबर संतों के प्रति बेहद असम्मानीय, शर्मसार टिप्पणियां की, जिन पर न सरकार ने, न प्रशासन ने और न ही जैन समाज ने कोई कठोर कार्रवाई के लिए कदम उठाया, वहीं उसकी ताकत बन संथाल आदिवासियों को जैनों के विरुद्ध खड़ा करने में बहुत बड़ा शस्त्र बना। फिर सलमान मुर्मु (पूर्व सांसद) भी ऐसी शर्मसार टिप्पणी दिगबंर संतों के बारे में की। बस राजनीतिक शह पर उसको हवा भी दी गई। बलि भी दी गई और जैनों के खिलाफ एक नया विवाद खड़ा कर दिया गया।

उसके बाद 12 मार्च 2025 को मधुबन में ‘अतिक्रमण हटाओ, मरांग बुरू बचाओ’, जन आक्रोश रैली का आयोजन आदिवासी समाज के कुछ संगठनों ने किया, जिससे आदिवासी समाज की महिलाओं -बच्चों सहित पुरुष, मरांग बुरू के दिशोम माझी थाने से परम्परागत हथियारों के साथ नीचे मधुबन से होते हुये फुटबाल मैदान में, सभा में बदली। इसकी शुरुआत 07 मार्च 2025 को हुये प्रदर्शन में की गई थी।

अब सोमवार, 09 जून 2025 को बिरसा मुंडा जी की पुण्यतिथि के अवसर पर संथाल समाज से जुडेÞ मरांग बुरु बचाओ संघर्ष समिति का 51 सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जी से उनके निवास पर मिला। इस प्रतिनिधि मंडल ने गिरिडीह स्थित मरांग बुरु (पारसनाथ हिल) पीटटांड को संथाल आदिवासियों के धार्मिक तीर्थ स्थल को संरक्षित करने एवं प्रबंधन निगरानी, नियत्रंण और अनुश्रवण के लिए ग्रामसभा को जिम्मेदारी देने की मांग की, जिस पर मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधि मंडल को विधिसम्मत निर्णय लेने का आश्वासन भी दिया।

साथ ही उन्होंने केन्द्र सरकार के 05 जनवरी 2023 के मेमोरेंडम, झारखंड सरकार के 22.10.2016 के तथा 21.12.2022 के दिशा-निर्देशों को भी रद्द करने की मांग की, जिसमें पवित्र पर्वत पर मांस, मदिरा के सेवन एवं खरीद-बिक्री पर प्रतिबंध लगाया गया है तथा उनमें उल्लेख भी है कि श्री सम्मेद शिखर जी (पारसनाथ हिल) जैन समाज का विश्व प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है। उन्होंने मांग की कि पारसनाथ पर्वत को संथालों का धार्मिक स्थल घोषित किया जाये।

अभी हाल ही में झारखण्ड हाइकोर्ट ने ज्योत संस्था की याचिका पर महत्वपूर्ण अन्तरिम आदेश भी दिया कि पर्वत पर किसी तरह के पशु-पक्षियों के जीवन की हानि यानि हत्या आदि प्रतिबन्धित रहेंगी।
इस पर पूर्ण जानकारी चैनल महालक्ष्मी के एपिसोड नं 3368 में देखिये।

चैनल महालक्ष्मी चिंतन- जैन समाज के प्रति रोज नये विवाद खड़े किये जाने की कड़ी में यह एक नई पटकथा तीन साल पहले लिखनी शुरु हुई , जिसको कहीं न कहीं वोटों के चक्कर में राजनीतिक संरक्षण के चलते, दिगंबर संतों के प्रति विवादित बयानबाजी पर कोई कार्यवाही नहीं की गई। अब अदालत के निर्णयों के विरुद्ध भी राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। ऐसे में जैन श्रेष्ठी वर्ग को जल्द कूटनीतिक स्तर पर इसका निदान करना आवश्यक हो गया है।