॰ 45+ उम्र के यात्री वंदना से पहले टेस्ट जरूर करवायें
॰ वंदना में थोड़ा भी असहज होते ही तुरंत रुके, करे विश्राम
॰ क्या सरकार की जिम्मेदारी नहीं कि कोई लाइफ सपोर्ट व आधुनिक सुविधा का अस्पताल निर्मित कराये
20 नवंबर 2022/ मंगसिर कृष्ण अमावस /चैनल महालक्ष्मी और सांध्य महालक्ष्मी/ शरद जैन
रविवार को अजमेर से श्री सम्मेदशिखरजी यात्रा के लिए 50 यात्री आये, उन्हीं में वहां के अशोक विहार कालोनी के 53 वर्षीय आशीष जैन सलगिया की आकस्मिक मृत्यु हो गई। हां, आत्मा अनश्वर है, पर व्यवहारिक परिपेक्ष्य में एक पत्नी ने पति को, बेटा-बेटियों ने पिता को और अनेकों ने अपने परिजन को खो दिया।

निहारिका के मैनेजर संजीव जैन ने सान्ध्य महालक्ष्मी को पूरे घटनाग्रम की जानकारी देते हुए बताया कि रविवार 16 नवंबर को तड़के दो बजे आशीष जी अपनी पत्नी कानन बाला व 15 वर्षीय छोटी बेटी के साथ निहारिका के कमरा नं. 207 से वंदना के लिये गये और सायं तीन बजे बेटी के साथ लौटे। कमरे की चाबी पत्नी के पास थी, इसलिये कैंटीन में रुककर चाय आदि लेकर ऊपर पहली मंजिल पर बढ़े। तभी अंतिम सीढ़ी पर थोड़ा चक्कर-सा जान कर, वहीं खड़ी हाउस कीपिंग महिला से हाथ पकड़कर सहारा देने का संकेत किया, पर जब तक वो पकड़ती, वे पीछे की तरफ गिर गये।

आनन-फानन वहां मौजूद निहारिका के सभी कर्मी पहुंचे और उन्हें नीचे लाये। अप्राकृतिक रूप से सांस दी गई, पम्पिंग की गई, दो बार असर भी दिखा। इतने में डॉ. ओ.पी. सिंह भी आ गये, एम्बुलेंस भी पहुंची। मुंह से उनके झाग निकले और डॉक्टर ने कह दिया अब सांस नहीं रही। फिर भी सेवायतन ले गये, पर डॉक्टर का जवाब वही था.. नो मोर…। डॉक्टरों के अनुसार संभवत: उन्हें हार्ट अटैक आया था। यात्रा के दौरान वह असहज भी महसूस कर रहे थे, लेकिन जैसा होता है, परिवार ने उसे थकान समझा क्योंकि आशीषजी ने भी कोई शिकायत नहीं की थी।

15 साल की बेटी, जो वंदना में अधिकांश समय पिता के साथ ही रही, वह अब बार-बार कह रही थी कि पापा थोड़ा असहज बताये तो थे… काश हम रुक जाते। पर वह छोटी-सी भूल आज उनकी जिंदगी ले गई।
संजीव जी के अनुसार सूचना के बाद बड़ी बेटी दिल्ली से फ्लाइट से कोलकाता उतर कर यहां आई और अंतिम संस्कार, वहीं सोमवार दोपहर को किये गये। दोनों बेटी ने ही पिता की चिता को मुखाग्नि दी।
इस घटना को महज हर बार की तरह सिद्ध क्षेत्र पर मृत्यु समझ कर भूल नहीं जाना चाहिये।

सान्ध्य महालक्ष्मी का स्पष्ट कहना है कि पश्चिम-दक्षिण से आने वाले यात्री यहां के वातावरण को भलीभांति नहीं जानते। वहीं अगर वंदना से पहले अपना हेल्थ चैकअप, विशेषकर 45 की उम्र से ज्यादा के लोग, करवा लेके, तो शायद स्थिति अलग ही होती।
27 किमी की इस लम्बी वंदना में ऊपर-नीचे चढ़ना-उतरना, ठंडी हवाओं का अचानक चलना, वर्षा का बेसमय बरसना, कहीं बीच में आक्सीजन का दबाव कम होना। इसके साथ कई कारण और भी हैं – नींद पूरी न होना, बीपी, शुगर हृदय संबंधी समस्यायें, सांस की तकलीफ, जोड़ों में दर्द, डीहाइड्रेशन, खाली पेट, अर्थात् शरीर की भी सीमायें हैं। क्या जरूरी नहीं, वंदना से पहले हैल्थ चैकअप?
यात्रा के दौरान सीने में दर्द, भारीपन, सांस का उखड़ना, सीने में दर्द, बैचेनी, कंधे-बाहों में दर्द, ऐसी कोई भी समस्या होने पर तत्काल विराम जरूरी है। सच में यह थकान, कहीं साइलेंट अटैक भी हो सकता है।
एक बार फिर सान्ध्य महालक्ष्मी इस सिद्धक्षेत्र पर वंदना करने से पहले निम्न सावधानियां बरतने का उल्लेख कर रही है :
॰ दौड़ कर चढ़ाई नहीं करें, साथ वाले को देख तेज न चलें।
॰ बीपी – डायबटीज की दवा की अनदेखी न करें।
॰ जरा भी असहज महसूस करें, तो हल्के में ना लें, तत्काल विश्राम लें, रुकें।
॰ खाली पेट चढ़ाई से बचें, पानी की कमी यानि डिहाइडेशन से बचें।
॰ सबसे जरूरी, 45 से ऊपर के हैं तो चैकअप जरूर करा कर चलें, नेगेटिव रिपोर्ट होने पर यात्रा न करें।
इस बारे में पूरी जानकारी – चैनल महालक्ष्मी के एपिसोड नं. 3542 में देख सकते हैं।

















