पौष शुक्ल दशमी (23 जनवरी) से जिस दिन 12वें कामदेव ने 16वें तीर्थंकर बनने के लिए, 50 हजार वर्ष राज करने के पांचवें चक्रवर्ती श्री शांतिनाथ जी ने दर्पण में अपने दो प्रतिबिम्ब देखकर वैराग्य हो गया। 16 वर्ष तक तप करके हस्तिनापुर के आमों के वन में, नंदी पेड़ के नीचे अपराह्नकाल में केवलज्ञान की प्राप्ति हुए, आपका केवलीकाल 84,984 वर्ष रहा।
कुंडलपुर बड़े बाबा के शिखर पर चढ़ रील बनाने का पागलपन
6 मार्च 2026 / चैत्र कृष्ण तृतीया /चैनल महालक्ष्मी और सांध्य महालक्ष्मी/ शरद जैन
यह तो कई बार देख चुके हैं कि कोई मनचला,...
















