17 जनवरी 2026 / माघ कृष्ण अमावस /चैनल महालक्ष्मी और सांध्य महालक्ष्मी/ शरद जैन
जालौर के दादल गांव में प्रवेश करते ही दूर से जब देखते हैं, तो अपनी आंखों पर हर कोई धोखा खा जाता है कि राजधानी में बना संसद भवन यहां कैसे आ गया। जी हां, यह संसद भवन जैसा दिखने वाला एक सरकारी स्कूल है। इस रूप में यह बिल्डिंग बनवाई है अमरीकी एनआरआई डॉ. अशोक जैन ने।

बातचीत में उन्होंने बताया कि बचपन में उन्होंने इसी स्कूल में यानि 1972 से 1975 के बीच क्लास एक से तीन तक पढ़ाई की थी। तब तो यहां कमरे भी नहीं थे। पेड़ के नीचे बैठकर पढ़ते थे। उसके बाद पिता जी बेंगलुरु चले गये, तो ये सब भी। उनके पिताजी ने वहां स्टेनलैस स्टील का बिजनेस शुरू किया। अशोक जी की पढ़ाई आगे वहीं हुई। फिर 1994 में एमबीबीएस करने के लिये अमरीका चले गये।

सन् 2020 में इन्हें गणतंत्र दिवस के कार्यक्रम के लिये भारत में इस स्कूल से आमंत्रित किया गया। उस समय प्रधानाचार्य ने कहा कि आप यहीं पर पढ़कर इतनी ऊंचाई तक पहुंचे हैं, इस सरकारी स्कूल की बिल्डिंग के सभी कमरे टूटे-फूटे हैं, इसलिये सभी बच्चे आज भी स्कूल के मैदान में पेड़ों के नीचे बैठकर पढ़ते हैं। हमारे पास कम्प्यूटर आ गये हैं, पर उन्हें लगा नहीं पा रहे, छतों से पानी गिरता है, उनको लगाना सुरक्षित नहीं। एक कमरा कृपया करके बनवा दीजिए। डॉ. अशोक जैन ने एक मिनट नहीं लगाई, हां करने में।

फिर घर जाकर अपनी मां को सबसे पहले यह बात बताई। तब मां की क्या प्रतिक्रिया थी, आप भी सुनकर हैरान हो जाएंगे। उन्होंने सलाह दी, एक कमरे से क्या होगा? इतने सारे बच्चें हैं, तुम्हें पूरा स्कूल बनवाना चाहिए। उन्होंने इसके बाद अपने भाई जीतमल जैन से बात की, उन्होंने खुशी-खुशी कहा कि मां की बात बिल्कुल सही है, हमें कमरा नहीं, पूरा स्कूल बनाना चाहिए। पर कोरोना काल में यह सब संभव नहीं हुआ। 2022 में मां का निधन हो गया। पत्नी ने भी सहमति जताते हुए कहा कि शिक्षा सबसे बड़ा दान है और हमारे स्कूल बनाकर शुरू करने का सही समय है। जब ऐसे ही पूरी फैमिली में स्कूल बनवाने की चर्चा हो रही थी, तो मन में आया कि संसद भवन के डिजाइन के रूप में इसको बनवाया जाए।

इन सबमें उनका विचार आया, क्यों न स्कूल के लिये मल्टीपरपज खेल मैदान भी बना दिया जाए। इसके लिये जमीन खरीदने हेतु राजपूत समुदाय के मालसिंह से अनुरोध किया। पर उन्होंने साफ शब्दों में कह दिया कि हम कभी अपनी जमीन नहीं बेचते। पर जैसे ही उन्हें मालूम चला कि वह स्कूल के लिये चाहते हैं, तो मालसिंह ने जमीन तो नहीं बेची, पर दान की स्वीकृति दी और स्कूल के सामने की 3 बीघा जमीन दान दे दी।

बिल्डिंग का काम 2023 में शुरू हुआ और तेजी से काम चलते दो साल में पूरा हो गया। अब वहां पढ़ाई की आधुनिक सुविधाओं के साथ स्कूल मे अलग-अलग खेलों – बालीवाल, बास्केट बाल, बैडमिंटन, एथलेटिक्स, फुटबाल, कबड्डी, क्रिकेट आदि के कोर्ट / मैदान भी बनवाये गये हैं और हां, इस स्कूल के सामने एक ओपन जिम भी है। आज यह जालौर जिले का सबसे बड़ा स्कूल है।
इस बारे में पूरी जानकारी चैनल महालक्ष्मी के एपिसोड नं. 3581 में देख सकते हैं।
चैनल महालक्ष्मी चिंतन : जो काम सरकार या प्रशासन नहीं कर पाये, वो एक जैन ने कर दिखाया, आकर्षक डिजाइन में जिले का सबसे बड़ा स्कूल बनाकर। यह एक प्रेरणा रूपी मिसाल है, सभी जैन श्रेष्ठियों के लिए। आधुनिक सुविधाओं वाले स्कूल बनवायें, विशेषकर जिनालयों के साथ। इससे जिनालय सुरक्षित होंगे व समाज और देश में अहिंसा, परस्परोग्रहो जीवानाम्, अनेकांत, स्याद्वाद जैसे संदेशों का जन-जन में प्रसार होगा।













