तीर्थक्षेत्र कमेटी से वादा : 25 मंदिरों का जीर्णोद्धार : आचार्य श्री प्रमुख सागरजी

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02 सितम्बर 2025 / भाद्रपद शुक्ल दशमी /चैनल महालक्ष्मीऔर सांध्य महालक्ष्मी/ शरद जैन /
भारतवर्षीय दिगंबर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी के अध्यक्ष श्री जम्बू प्रसाद जैन 15 व 16 अगस्त को पूर्व व पूर्वोत्तर में जैन समाज – तीर्थों पर जानकारी हेतु कोलकाता में बेलगछिया श्री 1008 पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में चातुर्मास कर रहे आचार्य श्री प्रमुख सागरजी के पास चैनल महालक्ष्मी व मनोज जैन (धनबाद) के साथ पहुंचे।

आचार्य श्री ने तीर्थक्षेत्र कमेटी को आसाम, नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश व पं. बंगाल में मजबूती से विस्तार करने पर बल दिया तथा वहां जाकर हजारों जैन परिवारों के बीच तीर्थक्षेत्र कमेटी की उपयोगिता व कार्यों की जानकारी देकर उन्हें जोड़ने की भूमिका में आवश्यक जानकारी दी तथा पूरे सहयोग का आश्वासन देते हुए पवन मोदी, सुरेश सेठी, संजय काला, अनंत जैन, नरेश सेठी, सौरभ जैन, कमल कालिया, प्रदीप जैन आदि से पूर्ण सहयोग मिलने की बात कही।

11 से 13 अक्टूबर को 25वें दीक्षा महोत्सव कार्यक्रम के दौरान आचार्य श्री ने चैनल महालक्ष्मी को 25 मंदिरों के जीर्णोद्धार की प्रेरणा देते हुये 25 परिवारों का सहयोग तीर्थक्षेत्र कमेटी को देने की बात कही। उस दीक्षा कार्यक्रम में सपना जी की अगुवाई में विभिन्न महिला मंडलों को जोड़ने, पूर्वी क्षेत्रों में 4-5 दिन का दौरा, तीर्थों की जागरूकता के लिये पत्रकार सम्मेलन, तीर्थक्षेत्र कमेटी की पिछले 123 वर्षों की उपलब्धियां व भविष्य की योजनाओं को भी रखने के लिये आचार्य श्री ने कहा।

धर्मसभा के दोनों दिन सम्बोधित करते हुए आचार्य श्री ने समाज को अपने तीर्थों की सुरक्षा के लिये और तीर्थक्षेत्र कमेटी से हर परिवार के एक सदस्य को जुड़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि आज हमारे तीर्थों पर जो अतिक्रमण – हमले जो हो रहे हैं, वो सब हमारी बिखरती शक्ति और बिखराव के कारण हैं, 125 वर्षों से हमारे तीर्थों की सुरक्षा-संरक्षण कर रही और अदालत में हमारे शिखरजी, गिरनार, केसरियाजी, शिरपुर आदि तीर्थों के लिये लड़ रही एकमात्र संस्था भारतवर्षीय दिगंबर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी के साथ जुड़ना हम सबका प्राथमिक कर्तव्य है। मंदिरों के साथ गुरुकुलों की स्थापना भी करें तथा उद्योगपति तीर्थों के पास उद्योग लगायें, रोजगार के साथ दिन में भोजन के संस्कार प्रदान करें, इससे तीर्थ सुरक्षित रहेंगे।

राष्ट्रीय अध्यक्ष जम्बू प्रसाद जैन ने कहा कि आज अगर जैन धर्म संस्कृति-समाज की रक्षा करनी है, तो हमें संतवाद-पंथवाद से हटकर, उसे भूलकर एकजुट होना होगा। महिलायें तीर्थ सुरक्षा के लिये महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। बच्चों को संस्कारित करती हैं। हर मंदिर में तीर्थ रक्षा गुल्लक रखी जाये, जिससे सभी का इससे पुर्ण्याजन हो सके। अपने नाम के साथ ‘जैन’ भी लिखें ताकि दुनिया को जैनों के कार्यों की पहचान मिल सकेगी, मजबूती प्रदान होगी। आगामी जनगणना में धर्म के कॉलम में सिर्फ ‘जैन’ ही लिखना। आज अपनी संस्कृति को बचाने के लिए एक हो जाएं, संगठन मजबूत करें।

चैनल महालक्ष्मी ने कहा चल-अचल तीर्थों की सुरक्षा के लिये तीर्थ यात्रायें समूह में करें, चल-अचल तीर्थों की सुरक्षा-संरक्षण करें। संतों के आहार-विहार में आगे आयें। मंदिरों के निर्माण के साथ प्राचीन तीर्थों का संरक्षण भी जरूरी है, वर्ना इस सनातन संस्कृति की पहचान मिटती जाएगी। मंदिरों के दस्तावेज पूरे रखें। तीर्थक्षेत्र कमेटी के साथ जुड़कर अपने तीर्थों की सुरक्षा में अपना बहुमूल्य योगदान करें।