पिछले माह ही ट्रैकिंग में मां बेटे की मृत्यु
बड़ी संख्या में चल रहे थे ट्रैकिंग की मस्ती वाले हुड़दंगी
आगामी सूचना तक यात्रा बंद
अगर प्रशासन ने उचित एक्शन नहीं लिया, तो संत अन्न, जल का त्याग करेंगे: अखबार में छपी खबर
तीर्थक्षेत्र को पर्यटक स्थल बनाने में क्या जैन कमेटियां ही दोषी
अब सरकार रोपवे बनाकर बढ़ाएगी यहां पर्यटन, कमेटियों की चुप्पी
23 जुलाई 2025 / श्रावण कृष्ण चतुर्दशी/चैनल महालक्ष्मीऔर सांध्य महालक्ष्मी/ शरद जैन /

मांगीतुंगी महाराष्ट्र के नासिक जिले का बहुत बड़ा सिद्ध क्षेत्र है, जहां से राम, हनुमान, सुग्रीव, नील, महानील आदि 99 करोड़ मुनिराज सिद्धालय गए हैं और अब इस समय वहां पर दो तरफा खतरा मंडराया हुआ है। एक तरफ इस सुहाने मौसम में बड़ी संख्या में ट्रैकिंग करने के बहाने नशेड़ी, हुड़दंगी पहुंच रहे हैं और वहीं दूसरी तरफ सरकार ने यहां पर रोपवे बनाने के लिए गजट जारी कर दिया है। कमेटी ने इस क्षेत्र पर पर्यटक आवागमन को रोकने के लिए, तत्काल रूप से आगामी सूचना तक इस तीर्थ की यात्रा पूरी तरह बंद कर दी है। केवल त्यागी, व्रती ही यात्रा पर जा सकेंगे।

मांगीतुंगी ट्रस्ट की कमेटी के अध्यक्ष और महामंत्री ने चैनल महालक्ष्मी को बताया कि यहां पर कई जगह से ट्रेकिंग के लिए लोग चढ़ते हैं, कई नशा करते हैं, हुड़दंग करते हैं, नाच-गाना करते हैं। यहां तक कि नॉनवेज की भी शिकायत आई है। ऐसे समय में, जब बारिश तेज है और वहां फिसलन से भी खतरे की आशंका बन गई है, तब कमेटी ने तत्काल इस यात्रा पर आगामी सूचना तक के लिए रोक लगा दी है और इस बारे में प्रशासन को भी उचित कार्यवाही करने के लिए पत्र लिखे गए हैं।

मिली जानकारी के अनुसार इस वर्ष ही नहीं, पिछले कुछ वर्षों से पर्यटक यहां पर अपनी मस्ती के लिए आने लगे हैं, क्योंकि यहां का प्राकृतिक वातावरण और चढ़ाई उनको आकर्षित करती है।
इस तीर्थ पर चातुर्मास कर रहे मुनि श्री महिमा सागर जी महाराज और उनके संघ ने इसको तुरंत रोकने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। ‘सकाल’ अखबार में छपी खबर के अनुसार उन्होंने यह भी चेतावनी दी है कि यह सब हमारे तीर्थ पर बंद नहीं हुआ, तो वे अन्न त्याग देंगे। कमेटी ने इन घटनाओं की निंदा करते हुए वहां पर सिक्योरिटी गार्ड और बाउंसर भी लगा दिए हैं तथा प्रवेश तत्काल बंद कर दिया है। जहां एक तरफ पर्यटकों और घूमने वालों के आने से इस क्षेत्र पर खतरा मंडरा रहा है, वहीं दूसरी तरफ सरकार ने यहां पर रोपवे बनाने की भी तैयारी शुरू कर दी है। अब इस रोपवे के लिए अनुमति कहां से मिली, इस पर बहुत बड़ा प्रश्न उठा हुआ है, क्योंकि इन पर्वतों पर या तो जैन कमेटियों का अधिकार है या फिर वन विभाग का।
बगैर जैन कमेटियों की जमीन लिए यह रोपवे नहीं बन पाएगा

दोनों पर्वतों पर, पर्यटकों की संख्या काफी बढ़ गई, जिससे स्थानीय ट्रस्ट कमेटी ने सुरक्षा गार्ड्स को लगाया। जानकारी मिली है कि वे उन्हें निर्देश देते हैं, कई बार उनकी इन पर्यटकों से बहस भी होती है। कई आधे कपड़े पहने, पैरों में जूते-चप्पल पहने, नशे के समान के साथ ऊपर आते साफ दिखते हैं। इन प्राचीन पवित्र गुफाओं और मंदिरों में, ऐसे लोग शराब, सिगरेट और अन्य नशीले पदार्थों का सेवन करते हुए भी देखे गए हैं। वह अश्लील और अपमानजनक टिप्पणी भी करते हैं और खतरनाक जगहों पर हंगामा करते हैं। कई बार नशे में धुत्त पर्यटक आपस में ही झगड़ते हैं। इस बरसाती मौसम में पहाड़ों पर कोहरा छा जाता है और फिर कुछ घायल हो जाते हैं। पिछले माह इसी तरह एक मां और उसके छोटे बच्चों की, पैर फिसलने से मृत्यु हो गई थी। अब श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कमेटी ने यहां के तीर्थ पर यात्रा करने पर रोक लगा दी है और केवल साधु और पुजारी ही पहाड़ पर जा सकेंगे।

सांध्य महालक्ष्मी चिंतन: आज जगह-जगह हमारे तीर्थों पर पर्यटकों को अनुमति, जैसे मिल गई है और हमारे पवित्र तीर्थ खतरे में है। शुरूआत में ही इन पर प्रतिबंध लगाने से यह बीमारी ज्यादा नहीं बढ़ती, पर अब अति हो गई है। ऐसे अनेक तीर्थ हैं। दूसरी तरफ मांगीतुंगी तीर्थ पर रोपवे का बनना, उस खतरे को और बढ़ा देता है। अब इस रोपवे के लिए किसके द्वारा, सरकार को कहा गया, यह भी एक रहस्य है, क्योंकि बिना मांग के सरकार कुछ नहीं करती और इस तीर्थ पर जो कि पूरी तरह जैन तीर्थ है। यहां रोपवे किसी और के द्वारा बनाने की कोशिश नहीं हो सकती। इसलिए कमेटिया भी शंका के घेरे में है, क्योंकि उनके द्वारा अभी तक कोई भी कड़ा विरोध नहीं जताया गया है, जिससे सरकार इसको वापस ले। समाज को इस बारे में जागना होगा और रोपवे की, किसी भी प्रक्रिया को तुरंत रोकना होगा, क्योंकि हमारे तीर्थों पर आज वैसे ही खतरा मंडरा रहा है। यह रोपवे उसका एक बहुत बड़ा साधन बन जाएगी।














