15 जुलाई 2025 / श्रावण कृष्ण पंचमी/चैनल महालक्ष्मीऔर सांध्य महालक्ष्मी/ शरद जैन /
विश्वास तो नहीं होगा आपको, पर यह 16 आने सच है, ऐसा कुछ जगह पहले भी देखा है चैनल महालक्ष्मी ने, लेकिन दिल्ली, मुंबई जैसे शहरों में ऐसा नहीं होता, जब किसी बड़े संत के प्रवेश पर उनके पाद प्रक्षालन और शास्त्रदान का सौभाग्य इन धन कुबेरों को नहीं मिलता, पर ऐसा ही हुआ।

यह अवसर था दिल्ली गेट से अपने वर्षायोग्य स्थापना के लिए ऐतिहासिक लाल मंदिर में प्रवेश का, जब वंदनीय आचार्य श्री विद्यासागर जी महामुनिराज के सुशिष्य और आचार्य श्री समय सागर जी के आज्ञानुवर्ती मुनि श्री प्रणम्य सागर जी के प्रवेश पर, उनके मंगल प्रवचन होने थे और परंपरा के अनुसार उनके पाद प्रक्षालन और शास्त्र दान का भी सौभाग्य, जैसा सामान्यत: होता आया है कि उनका चयन बोलियां से होता है और व्यवस्थापक और धन कुबेर इस आदान-प्रदान के लिए तैयार रहते हैं। वहां भी बड़े-बड़े धन कुबेर तैयार थे कि उन्हें गुरुवर के पाद प्रक्षालन और शास्त्र भेंट का सौभाग्य मिल जाएगा, यानी उनकी पुण्य ऊर्जा का कुछ भाग तो उनको अपने धन के उपयोग से मिलेगा, पर ऐसा नहीं हुआ। केवल धन कुबेर ही नहीं, हर कोई हैरान था, जब आगे बैठे हुए धन कुबेर, पीछे बैठे सामान्य लोगों से परास्त होते नजर आए।

दिल्ली जैसे बड़े शहर में, जहां धन कुबेरों का बोलबाला है, वहां ऐसा नजारा देखकर हर कोई हैरानगी के साथ, तालियां पीट रहा था। वास्तव में धर्म पर बढ़ते धन का प्रभाव, आज जैसे झुक गया था और जैन ध्वज आज कुछ ज्यादा ही तेजी से लहराने लगा था। कारण भी था कि चाह कर भी अपनी जेबों को खाली करने वाले धन कुबेर, आज पहली बार बोलियां नहीं ले पाए और सामान्य कहे जाने वाले श्रद्धालुओं ने यह सौभाग्य प्राप्त किया। कारण था कि इन बोलियां में रुपए की राशि नहीं बोली गई, बल्कि अपने अंतरंग को नई ऊंचाई देने के लिए नियम-संयम की अनोखी बोलियां बोली गई।
पाद प्रक्षालन की बोली –
1. आज से आजीवन रात्रि में चारों प्रकार के आहार का त्याग का संकल्प।
2. आज से आजीवन श्रीजी के अभिषेक का संकल्प।
शास्त्रदान की बोली –
1. आजीवन प्रतिदिन 1 घण्टे स्वाध्याय का नियम।
बोलियों में केवल वही नए व्यक्तियों ने संकल्प लिया, जिनका पहले से यह संकल्प नहीं था। आजकल हर धार्मिक आयोजन को केवल धन से जोड़ा जाता है। ऐसे में संभवत: बड़े शहरों के इतिहास में यह प्रथम अवसर है, जब बढ़े-बढ़े धनाढ्य लोगों की उपस्थिति में धन को नहीं त्याग / संकल्प धारण करने बालों को ही सौभाग्य प्रदान किया गया।

मुनिश्री द्वारा देश की राजधानी में यह अद्भुत धार्मिक संयम की जो शुरूआत की गई, आशा यही है कि आने वाले चंद महीनों से यह, आगे भी लगातार जारी रहेगी। संयमित जीवन और आंतरिक शुद्धता ही वास्तव में वर्षा योग का एक प्रमुख लक्ष्य है, जब लोग धन की बजाय धर्म से जुड़ते हैं। और यही कहेंगे धन्य है मुनिराज और साथ में आयोजकों को बहुत-बहुत धन्यवाद, चैनल महालक्ष्मी की ओर से।
चैनल महालक्ष्मी चिंतन: वैसे तो यह कोई नया प्रयोग नहीं था, पर दिल्ली, मुंबई जैसे शहरों में, जहां पर धन कुबेरों से मंच चलता है, कार्यक्रम चलते हैं, वहां पर उन्हीं के सामने, जब संयम रूपी बोलियां बोली जाती है, तो जेबों से धनवान वह शक्ति नहीं दिखा पाए जो एक सामान्य भक्ति वाला दिखा देता है और यही से एक शुरूआत होती है धर्म में धन की बजाय धर्म का सूत्रपात। बस ऐसे ही जारी रहे और अन्य जगहों पर भी इसी तरह की शुरूआत हो।
















