यह प्रतिमा तीर्थंकर के समवसरण में विराजमान होने की धोतक है, क्यूंकि समवसरण में विराजमान भगवान को दसों दिशाओं से देखा जाता है तो भी भगवान की मुखाकृति स्पष्ट दिखती है ।इस तरह की कलाकृति की प्रतिमाऐं अब नही बनती है।
भाद्रपद पर्वों का राजा, तो चैत्र माह कल्याणकों का महाराजा
11 मार्च 2026 / चैत्र कृष्ण नवमी /चैनल महालक्ष्मी और सांध्य महालक्ष्मी/ शरद जैन
आज एक अनोखा चिंतन, विश्लेषण दे रहा है चैनल...

















