26 अप्रैल 2022/ बैसाख कृष्णा एकादिशि /चैनल महालक्ष्मीऔर सांध्य महालक्ष्मी/
भरतखंड मे इस काल के प्रथम तीर्थकर भगवान रुषभदेव की प्रतिमा जिस जैन मंदिर मे मुलनायक के तौर पर हो वहा उनकी यक्षिणी चक्रेश्र्वरी माता की मुर्ति भी होती ही है।
राजस्थान के केसरियाजी जैन मंदिर में मुलनायक रुषभदेव के मुख्य मंदिर के बाहर जैन टेम्पो कोम्पलेक्ष मे चक्रेश्र्वरी माता की प्रतिमा को चतुर्भुज विष्णु कहकर ब्राह्मण पंडो ने अतिक्रमण किया हुआ है।
इसी तरह राणकपुर जैन मंदिर के मुलनायक रुषभदेव ही है और जैन मंदिर परिसर मे जो सुर्य मंदिर है उसमे भी हकीकत मे चक्रेश्रवरी माता की ही प्रतिमा है। यह प्रतिमा वाले मंदिर पर भी ब्राह्मण पंडो ने अतिक्रमण किया हुआ हैं।
वडनगर, डिस्ट्रिक्ट महेसाणा, गुजरात मे भी मुख्य जैन मंदिर के मुलनायक रुषभदेव ही है। और चक्रेश्रवरी माता की प्रतिमा अन्य जगह अपुजित रही हैं।
















