जैन की जनगणना क्या अब सही होगी? 40 करोड़ से 4 करोड़ से 44 लाख, अब कितने…

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॰ दो चरणों में जनगणना, अभी पहले फेज पर रखें ध्यान
॰ पहले फेस में हर जैन घर हो शामिल, यह जरूरी
॰ धर्म, जाति, भाषा दूसरे चरण में अगले वर्ष होगी
॰ 140 साल पहले अंग्रेजों ने की थी जैन श्वेताम्बर-दिगंबर गणना भी
24 मार्च 2026 / चैत्र शुक्ल षष्ठी /चैनल महालक्ष्मी और सांध्य महालक्ष्मी/ शरद जैन

ध्यान रहे, संख्याबल ही लोकतंत्र की ताकत बनता है, यदि हम कागजों पर कम होते गये, तो भविष्य में हमारी समृद्ध परम्पराओं और संस्कृति-विरासतों के संरक्षण की शक्ति भी कम हो जाएगी।
हम जैन 2 करोड़, 3 करोड़, 5 करोड़… कुछ वर्षों से गाते आ रहे हैं। वहीं एक-डेढ़ साल से जनगणना विषय पर कई मुख से कई बातें सोशल मीडिया में प्रचारित-प्रसारित भी की जा रही हैं। सन् 2011 में 44,51,753 की गिनती सरकार ने दर्ज की और सिर्फ 0.43% मानकर तीन I’S’ सुविधा, संरक्षण, सुरक्षा से ऐसे अलग कर दिया, जैसे हम मक्खी को घी से निकालकर, एक तरफ कर, घी का उपयोग करने लगते हैं। हां, ‘जैन’ वही मधुमक्खी है, जिसे कोई पूछता नहीं, पर उसका ‘शहद’ उपयोग करने से कोई पीछे नहीं हटता, आज चैनल महालक्ष्मी इसी महत्वपूर्ण विषय पर तथ्यात्मक जानकारी दे रहा है, जो शायद अब तक हमारे बीच नहीं थी।

जनगणना 2027 – दुनिया की सबसे बड़ी जनगणना एक्सरसाइज- खुद करें अपनी गणना
॰ यह जनगणना 2027 – दो चरणों में होगी, यह दुनिया की सबसे बड़ी जनगणना एक्सरसाइज है।
॰ पहली बार जनगणना डिजीटल तरीके से होगी और सेल्फ-एन्यूमरेशन का आप्शन मिलेगा।
॰ सेल्फ-एन्यूमरेशन एक सुरक्षित बेस्ट सुविधा है, जिसके जरिये जवाब देने वाले डोर-टू-डोर सर्वे से पहले 16 भाषाओं में अपनी जानकारी आॅनलाइन डाल सकते हैं।

॰ इस जनगणना के लिये गृहमंत्री श्री अमित शाह द्वारा 05 मार्च 2026 को दो मैस्कॉट ‘प्रगति’ और ‘विकास’ 2027 तक भारत को विकसित देश बनाने के संकल्प को पूरा करने में महिला और पुरुषों की भागीदारी का प्रतीक है।
॰ इस जनगणना में 30 लाख से ज्यादा एन्यूमरेटर, सुपरवाइजर और दूसरे अधिकारी शामिल होंगे।

इस कड़ी में आगे बढ़ने से पहले, सान्ध्य महालक्ष्मी इस समय के पहिये को इतिहास में पीछे घुमाता है।
40 करोड़ से 04 करोड़ से लुढ़कते रह गये 44 लाख, दिगंबर-श्वेताम्बर की अलग-अलग गणना भी

कहा जाता है महावीर स्वामी के समय जैनों की जनसंख्या 40 करोड़ के आसपास थी, फिर अकबर शासन में यह 04 करोड़ रह गई और अब आजाद भारत में जब पिछली बार 2011 में जनगणना की गई, तो सिमट कर मात्र 44,51,753 रह गई। आज भारत की जनसंख्या 140 करोड़ के पार है, ऐसे में लगता है जैन समाज विलुप्त होने की ओर तेजी से लुढ़कता जा रहा है।
अंग्रेजों ने 1881 में जैनों की सीमित गणना भी की और वो भी दिगंबर-श्वेताम्बर की अलग-अलग, शायद यह तथ्य कोई नहीं जानता।

जैन क्यों कम होते जा रहे लगाते हैं तथ्यों के सागर में डुबकी
आज तक इस पर शायद गंभीरता से नहीं विश्लेषण हुआ। चैनल महालक्ष्मी इस पर विस्तार से चर्चा करने की बजाय अनेक तथ्यात्मक, सामाजिक और सांख्यिकीय कारणों को संक्षिप्त रूप से तीन भागों में विभाजित करना उचित समझता है:-
1. राजनीतक-सामाजिक सतह से कांटों की चुभन
40 करोड़ से 44 लाख तक लुढ़कने के पीछे अवश्य ही कुछ ऐतिहासिक घटनाये रहीं:-
॰ राजकीय संरक्षण का अंत – सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य, खारवेल और दक्षिण के कई राजाओं के बाद राजकीय समर्थन कम होता चला गया। बाद के शासकों ने अन्य धर्मों, विशेषकर वैष्णव हिन्दू धर्म और 2600 साल पहले उपजे बौद्ध धर्म को अधिक संरक्षण दिया।

॰ धर्म की कठोरता – आप में से कई चैनल महालक्ष्मी से शायद सहमत न हो, पर यह कटु सत्य है। जैन धर्म के पांच महाव्रत – अहिंसा, सत्य, अचौर्य, अपरिग्रह और ब्रह्मचर्य, इनके साथ कठोर तप-तपस्या, पग विहार, केश लोंचन, एक समय अंजुलि में आहार। साथ ही गृहस्थों यानि श्रावकों के लिये भी अणु व्रत के रूप में कडेÞ नियम, जिससे सामान्य जनमानस का झुकाव सरल दिखने वाले ‘मध्यम मार्ग’ यानि बौद्ध धर्म या भक्ति मार्ग की ओर झुकता चला गया।

॰ आंतरिक विभाजन – वैसे सभी धर्मों में ही दिखता है, पर कम होती गिनती के चलते श्वेताम्बर-दिगम्बर, फिर दिगंबर में – तेरापंथी, बीसपंथी, कांजी स्वामी आदि अनेक, वहीं श्वेताम्बर में मूर्तिपूजक, स्थानकवासी, तेरापंथ और उनमें अनेक विभाजन से, सम्प्रदायों के बीच मतभेद बढ़ता गया और समाज की संगठित शक्ति कमजोर होती चली गई। आज तो संतों के नाम पर बंटती जा रही है, कब लगेगा इस पर विराम?

॰ विदेशी कारण – मध्यकाल में बाहरी आक्रमणों के दौरान अनेक जैन और ज्ञान भण्डारों को नष्ट किया गया। मुगलकाल में तो छह-छह माह तक शास्त्रों की होली जलाई गई, जिससे सांस्कृतिक और जनसांख्यिकीय क्षति हुई।

॰ धर्मांतरण – यह किसी से नहीं छिपा भीतर भी, बाहर से भी, सत्ता के प्रभाव से धर्मांतरण के लगातार प्रयास होते रहे। सराक जाति सहित आज अनेक, ऐसे लाखों में हैं। वहीं मद्रास टू मदुरै, गोवा में हजारों-हजारों की हत्या किसी से छिपी नहीं है, चाहे उन इतिहास के पन्नों से सच्चाई कोई सामने न लाये।

2. आधुनिक सांख्यिकीय कारण कसूर तो कहीं हमारा भी है
सन् 2011 की जनगणना में जैन मात्र 44,51,753 गिने गये, इस कम गिनती के पीछे कुछ ठोस ‘डेटा-आधारित’ तथ्य भी हैं, जैसे:-
॰ न्यूनतम प्रजनन दर : 2011 के आंकड़ों के अनुसार जैन समाज की प्रजनन दर 1.4 से भी नीचे 1.2 तक पहुंच गई है, यानि एक जैन युगल – दो मिलकर 1.2 बच्चों को जन्म देते हैं, स्पष्ट है कि गिनती तो कम होती ही चली जाएगी। जनसंख्या को स्थिर रखने के लिये भी 2.1 की दर आवश्यक होती है। (चैनल महालक्ष्मी विषय से विषयांतर हो, इसलिये इस न्यूनतम प्रजनन दर के कारणों का उल्लेख नहीं कर रहा।)
॰ उच्च साक्षरता और शहरीकरण : 94.9 फीसदी के हिसाब से जैन सबसे ज्यादा शिक्षित समाज है और ग्रामीण नहीं, शहरीकृत समुदाय है। उच्च शिक्षा और कैरियर के प्रति जागरूकता के कारण विवाह की आयु बढ़ना और ‘छोटा परिवार’ अपनाना मुख्य कारण है। 80 फीसदी जैन शहरों में ही रहते हैं।

॰ विलंबित विवाह : शिक्षा और व्यापार में स्थिरता की खोज में युवा विवाह, अब तो 28 से 32 वर्ष की आयु में होना आम हो गया है, जिससे जन्म दर पर सीधा प्रभाव पड़ता है।

॰ बुजुर्गों की अधिक संख्या : कम जन्मदर के कारण समाज में युवाओं की तुलना में वरिष्ठ नागरिकों का प्रतिशत बढ़ रहा है, जिसे ‘जनसांख्यिकीय असंतुलन’ कहा जाता है।

3. कहां की चूक, कहां भ्रम, कहां त्रुटि
चैनल महालक्ष्मी आज तक यही सुनता आ रहा है कि ‘जैन गिने ही नहीं गये’। इसके 3 कारण हैं:-

॰ हिंदू धर्म के साथ सांस्कृतिक समानता: बड़ी संख्या में जैन परिवार दिवाली, होली, रक्षाबंधन, दशहरा और अन्य त्यौहारों में भागीदारी के कारण, खुद को हिंदू समाज का हिस्सा मानते हैं। जनगणना कर्मचारी के पूछने पर वे ज्यादा लोकप्रिय शब्द ‘हिंदू’तक कहने में नहीं सकुचाते।

॰ उपनाम का भ्रम : अग्रवाल, शाह, मेहता, गुप्ता जैसे अनेकों उपनाम जैन और हिंदू दोनों में होते हैं। प्रगणक अक्सर उपनाम देखकर स्वयं ही ‘हिंदू’ टिक कर देते हैं।

॰ प्रवास : जैन समाज व्यापार प्रधान है। गणना के समय कई लोग अपने मूल स्थान पर नहीं होते या उनका घर बंद मिलता है, जिससे वे गिनती में छूट जाते हैं।

अब जागरूक होना और करना होगा
जनगणना 2027 में जैनों की सही संख्या प्रदर्शित हो, उसके लिये जागरूकता बहुत आवश्यक है। चैनल महालक्ष्मी इसके लिये कुछ निम्न प्रभावी और आधुनिक सुझाव देता है:-

॰ अपनी जड़ों को पहचानो
युवा पीढ़ी अक्सर तर्क और विज्ञान पर भरोसा करती है, उन्हें जैन धर्म की वैज्ञानिकता से जोड़ना जरूरी है।


॰ जैन दर्शन और आधुनिक विज्ञान : युवाओं के जहन में डालना होगा कि कैसे अहिंसा, अनेकांतवाद, परिग्रह आज के ग्लोबल वार्मिंग और मानसिक तनाव के दौर में सबसे सटीक समाधान है।
॰ ऐतिहासिक विरासत भ्रमण : मिट रहे जैन तीर्थों के समय युवाओं के लिए सम्मेदशिखरजी, श्रवणबेलगोल, पालीताणा, एलोरा, मांगीतुंगी आदि ऐतिहासिक स्थलों की ‘हेरिटेज वॉक’ आयोजित की जाये, ताकि वे अपनी भव्य विरासतों को स्वयं देख सकें।

॰ प्राकृत भाषा का परिचय : जैसे योग और संस्कृत प्रसिद्ध हुए, वैसे ही प्राकृत (जैन आगम की भाषा) के छोटे कोर्स शुरू किये जाने चाहिए।

2. जनगणना 2027 में युवाओं की भूमिका
इस बार जनगणना डिजीटल है, पेपरलैस है, युवा तकनीक के जानकारी हैं, इसलिये उनकी भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है –

॰ डिजीटल एंबेसडर : हर जैन परिवार का युवा सदस्य यह सुनिश्चित करें कि उनके घर का डाटा ‘डिजीटल जनगणा ऐप’ में सही व पूरा भरा गया है।

॰ सोशल मीडिया कैंपेन : इंस्टाग्राम रील्स और यू-ट्यूब शॉट्स के जरिये # I_Am_Jain ¹ff # Jain Census 2027 जैसे ट्रेंड चलाएं, जिनमें अपनी पहचान पर गर्व करने का संदेश हो।

॰ अल्पसंख्यक अधिकारों की जानकारी : युवाओं को समझायें कि जनगणना में सही संख्या आने पर ही समाज को सरकारी छात्रवृत्ति, शिक्षण संस्थानों में आरक्षण और अल्पसंख्यकों को मिलने वाली योजनाओं का लाभ मिलता है।

3. सामाजिक और पारिवारिक संतुलन
अब समय आ चुका है कि गिरती जन्मदर पर (TFR 1.2) पर खुलकर चर्चा की जाये:-

॰ करियर और परिवार का तालमेल : युवाओं को समझाना जरूरी है कि करियर के साथ-साथ समय पर विवाह और परिवार बढ़ाना भी समाज के अस्तित्व के लिये आवश्यक है।

॰ सामूहिक विवाह और सादगी : विवाहों में होने वाले भारी खर्च को कम कर ‘सादगी’ पर जोर दिया जाये, ताकि आर्थिक दबाव कम हो और युवा विवाह के प्रति सकारात्मक हो।

॰ बेबी सिटिंग और कम्यूनिटी सपोर्ट : बड़े शहरों में ‘जैन वर्किंग कपल्स’ के लिए समाज के स्तर पर सुरक्षित क्रेच या डे-केयर सेंटर शुरू किये जायें, क्योंकि आज बड़ी संख्या में पति-पत्नी दोनों वर्किंग होते हैं।

4. व्यवहारिक कदम-
॰ सेमिनार और वेबिनार : ‘जनसंख्या और हमारा अस्तित्व’ विषय पर विशेषज्ञों और समाज के प्रभावशाली युवाओं के साथ सत्र आयोजित करें।
डाटा वेरिफिकेशन वालंटियर्स : युवाओं की जगह-जगह टीमें बनाई जाएं, जो जनगणना के दौरान प्रगणकों के साथ समन्वय करें और यह सुनिश्चित करें, किसी भी जैन घर की जानकारी गलत दर्ज न हो।

जनगणना 2027 फेस-1 अभी क्या करना है?
07 जनवरी 2026 को जारी किये गये नोटिफिकेशन के अनुसार एक अप्रैल से 30 सितम्बर 2026 के बीच हर राज्य / केन्द्र शासित प्रदेश द्वारा नोटिफाई किये गये 30 दिनों का लगातार समय दिया जाएगा। साथ ही घर-घर सर्वे से पहले 15 दिन का आॅप्शनल सेल्फ एन्यूमरेशन पीरियड भी होगा, यानि कुल 45 दिन।

॰ यह पहला चरण हाऊस लिस्टिंग व हाउसिंग सेंसेज होगा। इसमें मुख्य मकसद यही रहे कि सभी राज्यों / केन्द्र शासित प्रदेशों में सभी जैन परिवारों की 100 फीसदी गिनती हो जाये। अगर आपका परिवार पहले फेज यानि हाउस लिस्टिंग और हाऊसिंग सेंसेस के दौरान लिस्टिेड है, तो दूसरे फेज में पोपुलेशन एन्यूमरेशन के दौरान एन्यूमरेटर जरूर आपके घर आएगा।

॰ अगर एन्यूमरेटर पहले या दूसरे फेज में आपके घर नहीं आता है, तो आपको अपने घर की गिनती के लिए तय समय के अंदर संबंधित अथारिटी से संपर्क करना चाहिये और अथारिटी से एन्यूमरेटर को आपके घर आने का निर्देश देने का अनुरोध करना चाहिए।

॰ आपको यह पक्का करना होगा कि सेंसेज के दोनों फेज के दौरान आपके परिवार की सही गिनती हो जाये।

॰ आप स्वयं भी एन्यूमरेशन कर सकते हैं, जिसकी आईडी आपकी पावती होगी। पर ध्यान रहे, घर आये एन्यूमरेटर जब तक उसे अधिकृत नहीं करेगा, वो डॉटा मान्य नहीं होगा।

॰ पहले चरण में आपसे 33 प्रश्न पूछे जाएंगे। ध्यान रहे 9, 10, 12 व 33 में आप पूरी सही जानकारी दें।
॰ दूसरे फेज में पोपूलेशन एन्यूमरेशन फरवरी 2027 से होगा, जिसमें आपकी जाति, धर्म और भाषा की गिनती होगी। इसलिये अभी केवल अपने घर की पूरी लिस्टिंग और हर घर के शामिल होने पर ही जोर दिया जाये।

इस बारे में पूरी जानकारी चैनल महालक्ष्मी के एपिसोड नं. 3656 में देख सकते हैं।

(यह लेख चैनल महालक्ष्मी द्वारा सरकारी व एतिहासिक दस्तावेजों के शोध से तैयार किया है, आप इस बारे में अपने सुझाव व्हाट्स 9910690825 या ईमेल info@channelmahalaxmi.com पर भेज सकते हैं। आशा है यह लेख सभी शंकाओं के समाधान के साथ सही जैन जनगणना के लिये प्रेरणा बनेगा।