गणिनी आर्यिका श्री ज्ञानमती माताजी को कालजयी व्यक्तित्व का सम्मान व जम्बू प्रसाद जैन को सर्वोच्च ज्ञानमति माता पुरस्कार

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अयोध्या में तीर्थक्षेत्र कमेटी का सफल नेमित्तिक अधिवेशन

17 अक्टूबर 2025 / कर्तिक कृष्ण एकादशी /चैनल महालक्ष्मीऔर सांध्य महालक्ष्मी/ शरद जैन /
शरद पूर्णिमा इस बार कुछ खास हो गई। हर वर्ष से भिन्न तीन आचार्यों – आचार्य श्री विद्या सागरजी, आचार्य श्री समय सागरजी, आचार्य श्री सुनील सागरजी के साथ सबसे वयोवृद्ध, ज्ञानवृद्ध गणिनी आर्यिका श्री ज्ञानमती माताजी का 92वां अवतरण दिवस एवं 74वां संयम दिवस अनोखा इसलिये हो गया कि जहां माताजी विराजित, उसी शाश्वत धरा अयोध्या में जन्म लेने वाले सबसे अंतिम तीर्थंकर श्री अनंतनाथजी का गर्भ कल्याणक भी उसी दिन। ऐसा संयोग शायद अब तक न मिला हो।

यह अवसर बहुत खास था, जब भारतवर्षीय दिगम्बर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी द्वारा माताजी को ‘कालजयी व्यक्तित्व’ की उपाधि का सम्मान देकर अपने को गौरवान्वित महसूस किया, वहीं 2025 का सर्वोच्च ‘गणिनी आर्यिका ज्ञानमती पुरस्कार’ तीर्थक्षेत्र कमेटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जम्बू प्रसाद जैन को तीर्थों की सेवा एवं संतों के प्रति समर्पण के लिये दिया गया। सन् 1995 में पहले पुरस्कार को प्राप्त करने वाले डॉ. अनुपम जैन ने उनकी प्रशस्ति का वाचन किया।

कालजयी व्यक्तित्व को सार्थक करते हुये माता जी ने कुछ दिन पहले ही जैसे स्वर्गारोहण को ले जाने आये यमराज को चरण छूकर अकेले ही वापस जाने को मजबूर किया। आर्यिका श्री चंदनामति माताजी ने कहा कि माता जी कालजयी व्यक्तित्व है, जिन्होंने काल पर भी विजय प्राप्त की। उनके 92 वर्षीय पायदान रूपी वट वृक्ष द्वारा तीर्थों के संरक्षण, संवर्धन, 500 से ज्यादा ग्रंथों का लेखन, उनका सम्मान करना तीर्थक्षेत्र कमेटी का सौभाग्य है।

अयोध्या रायगंज बड़ी मूर्ति पर अंतर्राष्ट्रीय स्तर का कान्फ्रेंस हॉल बनाने के शिलान्यास की शुरूआत माताजी ने मंच से बटन दबाकर की, जिसके लिये तीर्थक्षेत्र कमेटी ने 20 लाख रुपये का सहयोग दिया।

तीर्थक्षेत्र कमेटी (उत्तराखंड-उत्तर प्रदेश) अंचल के नेमित्तिक अधिवेशन में गणिनी आर्यिका श्री ज्ञानमती माताजी ने कहा कि तीर्थों की बागडोर सम्हालने वाले अनेक यहां हैं। मूलाचार में भी उल्लेखित है, जहां महापुरुषों ने मोक्ष प्राप्त किया, वो तीर्थक्षेत्र बन गये। कैलाश पर्वत, पावापुरी, गिरनार आदि जो भी तीर्थ हैं, उनकी वंदना, अर्चना, भक्ति करने से कल्याण निश्चित है। शास्त्रों में उल्लेख है कि आकाल मृत्यु टाली जा सकती है। आकस्मिक दुर्घटनाओं में आकाल मृत्यु होती है। मैंने चिंतन किया कि मेरे लिये देश-विदेश में शांतिधारा, जाप, आरती की गई। यह महिमा धर्म की है, भक्ति काम आई। उस गम्भीर अवस्था में हमने सिर्फ यही चिंतन किया कि शरीर भिन्न है, आत्मा भिन्न है। भक्ति से संसार में क्या नहीं होता, मृत्यु पर भी विजय पाई जा सकती है। तीर्थक्षेत्र कमेटी के अध्यक्ष व पूरी टीम को तीर्थों की सुरक्षा, संवर्धन के लिए बहुत आशीर्वाद है। भगवान से प्रार्थना है कि जैन समाज की उत्तरोत्तर प्रगति होती रहे। जब 72 में दिल्ली आई, तो 50 मन्दिर थे, अब 250 मंदिर हैं। जिनप्रतिमाओं में आज भी चमत्कार है। कल्याणक क्षेत्र, सिद्ध क्षेत्र, अतिशय क्षेत्र, अचेतन होकर भी चेतन के फल देते हैं। अचेतन मूर्तियां सब संकटों को दूर करती हैं। हमने काल को जीता नहीं, बस पुरुषार्थ किया है। आत्मा को परमात्मा बनाने की भावना एक दिन जरूर पूरी हो।

आर्यिका श्री चंदनामति माताजी ने इचलकरंजी, ईटखोरी में 10वें तीर्थंकर श्री शीतलनाथ जी की जन्मभूमि पर 26 से 30 नवम्बर तक होने वाले पंचकल्याणक की जानकारी दी। वहां के मंदिर के निर्माण तीर्थक्षेत्र कमेटी के सहयोग से हो रहा है।

तीर्थक्षेत्र कमेटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जम्बू प्रसाद जैन जी ने कहा कि 125 सालों से तीर्थों की सेवा करती आ रही तीर्थक्षेत्र कमेटी से जुड़ें। तन-मन-धन का तीर्थों की सुरक्षा के लिये उपयोग करें। तीर्थों से ही हमारा समाज बचेगा, उन्नति हो पायेगी। मातृशक्ति का इसमें महत्वपूर्ण सहयोग दे सकती है। 100 साल बाद क्या कोई जैन इस धरा पर बचेगा। उसके लिये हम सबको संगठित होना होगा। पंथवाद-संतवाद को छोड़कर केवल जैन बनना होगा। आप यह कहते हैं तीर्थक्षेत्र कमेटी क्या कर रही है, पर क्या कभी आपने भी अपना कर्तव्य निभाया?

125 वर्ष स्थापना कमेटी के चेयरमैन श्री जवाहरलाल जैन जी ने कहा कि तीर्थक्षेत्र कमेटी की स्थापना मथुरा में 22 अक्टूबर 1902 को हुई। तीर्थों के संरक्षण में कई रुकावटें आती हैं। शिखरजी पर उन्होंने कहा कि वहां की सीढ़ियां बनवाई, भाताघर, टोंको की मरम्मत, जहां प्राय: बिजली गिरती है, वहां 6 गुना मरम्मत लागत आती है। अनेक बाधायें हैं। यहां 4 पुजारी, 10 सुरक्षा कर्मचारी, मैनेजर, 3 सफाई वाले पहाड़ पर हैं, जिसका 5 लाख खर्च प्रति माह आता है। प्रीवी काउंसिल, लंदन में केस लड़ने के लिये चम्पत राय आदि को 6 माह के लिये लंदन भेजा। वो केस जीत कर आये। अनेक केस आज अदालत में है। अनेक तीर्थों पर अतिथि निवास, संत निवास आदि का निर्माण कराया। अभी हाल में प्रत्येक अंचल को 20-20 लाख रुपये की राशि का अनुदान दिया। आज हर मन्दिर तीर्थक्षेत्र कमेटी से जुड़े। दस्तावेजों का संरक्षण करें, इसके लिये डिजीटल रूप से डाटा पूरा करने की जिम्मेदारी अनुपम जैन जी को दी है। हर तीर्थ-मंदिर में तीर्थक्षेत्र कमेटी की गुल्लक रखी जाये।

स्वामी रवीन्द्र कीर्ति जी ने गिनीज बुक आॅफ वर्ल्ड रिकाडर््स में दर्ज 108 फीट की तीर्थंकर आदिनाथ प्रतिमा को बनाने के माताजी के विचार से निर्माण की पूरी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आज पहाड़ के तीर्थों पर प्रशासन की सड़क होती है, तभी दिक्कतें आती भी हैं, पर वहां से प्रतिमा तक जाने के लिये सड़क रास्ते हेतु 7 एकड़ जगह खरीदी है, जिस पर निर्माण होना है, उसके लिए 21 लाख रुपये का सहयोग जम्बू प्रसाद जैन जी ने व्यक्तिगत रूप से दिया है। उन्होंने कहा कि तीर्थक्षेत्र कमेटी जयवंत रहे।

सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति श्री कैलाश चंद चांदीवाल ने कहा कि ट्रस्ट-कमेटियों के कागज अपूर्ण रहते हैं। महाराष्ट्र शासन ने अभी हाल में ट्रस्ट-कमेटी नियमों में बदलाव किया है। ट्रस्टों में एकाउंटिंग, आर्थिक अनियमितता होने पर किसी भी ट्रस्टी पर 50 हजार रुपये जुर्माना व एक वर्ष कैद हो सकती है। जैसे कोई भी पक्षी एक पंख से नहीं उड़ सकता, उसी तरह तीर्थक्षेत्र कमेटी आपके सहयोग के बिना सफलतापूर्ण कार्य नहीं कर सकती।

तीर्थक्षेत्र कमेटी के उपाध्यक्ष श्री संजय पापड़ीवाल ने कहा कि पिताजी पन्नलालजी 47 वर्ष महाराष्ट्र अंचल के अध्यक्ष रहे। हमारी भावना है कि तीर्थक्षेत्र कमेटी पर 100 करोड़ का बैकअप हो, जिससे सभी तीर्थों का सुलभता से जीर्णोद्धार हो सके। तीर्थों का डाटा कमेटी को भेजिये। इसको सक्षम बनाने के लिए हर कोई तीर्थक्षेत्र कमेटी से जुड़े।

माताजी के गृहस्थ जीवन के छोटे भाई श्री कैलाश चंद जैन जी ने कहा कि आज जगह-जगह खुदाई में जैन मूर्तियां निकलती हैं। हर जिले में अपनी मूर्तियों को सुरक्षित रखने के लिये संग्रहालय होना चाहिए।

उपाध्यक्ष श्री विजय जैन लुहाड़िया ने कहा कि तीर्थों की सुरक्षा के लिए स्थानीय लोगों से संबंध – संवाद करना होगा। लोकतांत्रिक युग में वोटों से नहीं जीत सकते, दिमाग से जीत सकते हैं। हर तीर्थ पर स्कूल खोलें, इसमें पैसा इतना नहीं, पर समय लगता है। वहां पढ़ने वालों के मां-बाप – परिवार सदा आपके साथ रहेगा। तीर्थों के पास स्वास्थ्य सेवायें, आयुर्वेद अस्पताल शुरू किये जायें। तीर्थ यात्रायें करें, तीर्थों की आर्थिक समस्या दूर होगी।

मंत्री डॉ. जीवन प्रकाश जैन ने स्वागत उद्बोधन में अयोध्या में विमान आकार के म्यूजियम बनने की जानकारी दी। सभी अतिथियों का परिचय दिया।

मंत्री श्री जयकुमार जैन ने कहा कि हमें अल्पसंख्यक आयोग की कई योजनाओं का लाभ लेना चाहिए। शहर में 10 किमी के विहार अंतराल में साधुओं के विहार का अगर कोई स्थान नहीं, तो कमेटी को लिखिये, राज्य सरकार से विहार में उचित स्थान उपलब्ध करायेंगे। फिर आपको किसी से भवन, स्कूल आदि के लिए निवेदन नहीं करना होगा। दस्तावेज पूरे रखेंगे, तो कोर्ट विवादों से बच पायेंगे।
श्री पवन घुवारा ने कहा कि हम विधान तो प्राय: पढ़ते हैं, पर संविधान नहीं पढ़ते हैं। तीर्थों की रक्षा-सुरक्षा के लिए संविधान की 25-26 धारा जरूर पढ़िए। तीर्थों के दस्तावेजों की एक डिजीटल रिकॉर्ड कापी तीर्थक्षेत्र कमेटी के पास सुरक्षित रखें।

प्रतिष्ठाचार्य पं. विजय जैन ने कहा कि आज तीर्थों को बनाना सरल है, पर तीर्थों को चलाना कठिन है। जम्बूद्वीप से नि:शुल्क भोजनालय की शुरूआत हुई। आज संकल्प लें कि हम तो तीर्थक्षेत्र कमेटी से जुड़ेंगे ही, साथ ही अन्य को भी जोड़ेंगे।

डॉ. हंसमुख गांधी जी ने बखूबी मंच संचालन करते हुए तीर्थों की सुरक्षा के बारे में तीर्थक्षेत्र कमेटी के योगदान का अच्छा विवेचन किया।

चैनल महालक्ष्मी ने वर्तमान में तीर्थों पर उठ रहे विवादों, अधूरे दस्तावेजों, हर जैन द्वारा छोटी-छोटी राशि से तीर्थों के संरक्षण में योगदान के साथ पुण्य अर्जन, महिलाओं द्वारा नियमित तीर्थयात्रायें व वहां पर छोटी-छोटी समस्याओं का स्वयं अपने मण्डल द्वारा ही निवारण, मंदिर-मंदिर में तीर्थक्षेत्र कमेटी की गुल्लक रखी जाना, जो कमेटी नि:शुल्क उपलब्ध करा रही है, उसमें किया गया दान 250 से अधिक तीर्थों के पुण्य अर्जन में सहकारी बनेगा। उन्होंने कहा कि तीर्थक्षेत्र कमेटी हर साधु संत के पास पहुंच रही है, क्योंकि आज समाज में जागरूकता करने का प्रमुख आधार हमारे पूजनीय साधु जन ही हैं।

इस अवसर पर सुनयना जैन व अपराजिता जैन ने आकर्षक नृत्य कर सबको मंत्रमुग्ध किया।