॰ जैन परिवार के साथ बड़ा फर्जीवाड़ा, फर्जी दस्तावेज, प्रशासनिक भ्रष्टाचार, अवैध निर्माण, लापरवाही का जीवंत नमूना
19 जनवरी 2026 / माघ शुक्ल एकम/चैनल महालक्ष्मी और सांध्य महालक्ष्मी/ शरद जैन
विश्वास नहीं होता कि कोई मरने के चार साल बाद स्वर्ग से वापस अपने उस घर में आकर अपनी ही प्रापर्टी को बेचने के लिये पावर आफ अटार्नी पर दस्तखत कर सकता है? पर सरकारी कागजों को देखें, तो ऐसा ही लगता है। जैन परिवार के साथ यह भ्रष्टाचार, दबाव का जीता जागता उदाहरण है।

चांदनी, स्वर्गवासी विपुल कुमार टोपीवाला की बड़ी बेटी से इस बारे में जब सान्ध्य महालक्ष्मी ने सीधी बात की, तो इस फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ। यह मामला है सूरत के सचिन क्षेत्र के सेक्टर एक के प्लाट नं. 105 का। 36 वर्षीया चांदनी जी ने बताया कि वह अपने माता-पिता व छोटी बहन के साथ सूरत में रहती थी। बहन अब के.आर. एस. कलारिया स्कूल में टीचर है। उसके पिता विपुल कुमार जी का 29 अगस्त 2000 को मधुमेह के कारण निधन हो गया। फिर 2005 में माताजी अपनी दोनों बेटियों के साथ सूरत से जूनागढ़ आ गई। 2014 में चांदनी व परिवार को किसी के द्वारा जानकारी मिली कि उनके पिताजी को 1998 में भूखंड संख्या 105 लाटरी के द्वारा आवंटित किया गया था।

13 जून 2014 को उन्होंने सूरत विकास प्राधिकरण को आवेदन दिया। जिसके संबंध में सूरत नगर शहरी विकास प्राधिकरण ने 21 जून 2014 को सचिन पुलिस स्टेशन सी.ए. के अनुसार किये गये थे। चांदनी विपुल टोपीवाला ने सान्ध्य महालक्ष्मी को बताया कि सूरत के सूडा सेक्टर 01 निवासी विपुल कुमार टोपीवाला के नाम नं. 105 का स्वामित्व उनके पास था, और 03 मार्च 2004 को उन्होंने उपरोक्त संपत्ति की पावर आॅफ अटार्नी सतीश भाई एन शाह, जो उस सचिन क्षेत्र का प्रमुख बिल्डर है, उसके नाम कर दी। सरकारी कागजों में दर्ज हो गई और गजब है कि उस अटार्नी पर खरीदार सतीश शाह के हस्ताक्षर तक नहीं है और जिनका निधन 2000 में हो गया, उनके विक्रेता के रूप में 2004 में हस्ताक्षर हैं। सतीश शाह ने 17 मार्च 2004 को क्रम संख्या 3083 पर दर्ज अटार्नी को सूरत के उपपंजीयक कार्यालय में 50 हजार रु. की संपत्ति का पंजीकरण करा लिया।

उसको 2013 में दस्तावेज संख्या 2960/2013 दिनांक 23 जुलाई 2013 के साथ जारी किया गया और फिर इसे लीलाबेन जानकी लाल को बेची गई, उसके बाद इसे जुबेदा बेन, गुलाम मौहम्मद शेख, सरफराज गुलाम मौहम्मद शेख को बेची गई।
चांदनी ने सान्ध्य महालक्ष्मी को बताया कि जब एक मुस्लिम के नाम प्रापर्टी है, तो वह आगे कुछ नहीं कर पा रही थी, घर में मां-बहन ही हैं, फिर कैसे लड़ पाएगी। पर उन्होंने आरटीआई के माध्यम से दस्तावेज इकट्ठे रखना जारी रखा। भूखंड बिकता रहा, उस पर अवैध इमारत का निर्माण भी हो गया, क्योंकि भूखण्ड बिक्री में इमारत निर्माण का प्रावधान ही नहीं था। वर्तमान में वह संगीता देवी, राजू राज के नाम है, वहां 36 कमरे बन गये और हर कमरे में किरायेदार है, जिनसे मोटा किराया वसूला जा रहा है। वह प्रापर्टी अब तक 6 बार बिक चुकी है। और पिछले 12 सालों से वह परिवार सूडा, एसएमसी के चक्कर काट रहा है।

सरकारी कागजों का गड़बड़ घोटाला
॰ 2000 में मालिक का निधन, 2004 में फर्जी हस्ताक्षरों से बिक्री।
॰ 2011 में बिना किसी अनुमति के 32-36 कमरों की इमारत खड़ी हो गई और किराया वसूली जारी, पर इमारत की अनुमति आज तक नहीं दी।
॰ गजब की बात है कि सरकारी रिकॉर्ड गायब है, दोनों एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं। सूडा कहते हैं एसएमसी को रिकॉर्ड दे दिया, एसएमसी कहता है कोई रिकॉर्ड नहीं मिला।
॰ हैरानगी इस बात पर भी है कि एसएमसी 2021 से इमारत का टैक्स वसूल रहा, जो कागजों में खाली भूखण्ड है, कैसा घोटाला-भ्रष्टाचार।
॰ 18 अप्रैल 2005 से अब तक 50 से ज्यादा शिकायतों के बावजूद, इन सबके चलते पुलिस ने प्राथमिकी तक दर्ज नहीं की। हर बार जवाब – जांच चल रही है।
॰ 16 नवम्बर 2025 को एसीपी गोहिल ने कहा कि पुलिस कमिश्नर से मंजूरी नहीं आई है, इसलिए एफआईआर पैंडिंग है।
॰ 21 नवम्बर को पता चला कि मुख्य आरोपी निहालचंद शाह ने बेल ले ली है। क्या गजब की बात है। जमानत के लिए अप्लाई कर दिया गया, जबकि सही रूप में प्राथमिकी तक दर्ज नहीं हुई। बेहद गंभीर बात है।
॰ 65 साल की जैन विधवा पर ऐसा सरकारी जुल्म। तब यह बात चैनल महालक्ष्मी तक पहुंचाई गई और इसकी आवाज उठाई, जिसके बारे में पूरा एपिसोड 3584 में देख सकते हैं। अब संभवत: कुछ कार्यवाही होने की आशा है।
चैनल महालक्ष्मी चिंतन : सरकारी विभागों में आज भी इतना ज्यादा भ्रष्टाचार, दबाव है कि जिसकी आप कल्पना नहीं कर सकते और 65 साल की जैन विधवा का यह प्रकरण उसका जीवंत उदाहरण है। जिस भूखण्ड पर इमारत बनाकर 6 बार बेच दिया। 5 सालों से सूरत नगर निगम उस इमारत का टैक्स वसूल रहा, पर सूरत विकास प्राधिकरण और सूरत नगर निगम के पास उसका कोई रिकॉर्ड दर्ज नहीं, आखिरी दर्ज भूखण्ड है। इस बारे में जैन समाज द्वारा उस विधवा महिला के सहयोग में आगे न आना भी चिंता की विषय है और चैनल महालक्ष्मी ने उसकी आवाज उठाई है।













